सुबनसिरी पर्यटन हब: अरुणाचल में विश्वस्तरीय इको-टूरिज्म केंद्र बनाने की बड़ी योजना, 2,500 रोजगार का लक्ष्य
सारांश
Key Takeaways
- अरुणाचल प्रदेश सरकार ने सुबनसिरी लोअर पोंडेज को विश्वस्तरीय इको-टूरिज्म हब बनाने की घोषणा की है।
- मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पांच केंद्रीय मंत्रालयों से सहयोग मांगा है।
- परियोजना से लगभग 2,500 रोजगार सृजित होने और सालाना 1.5 लाख पर्यटक आकर्षित करने का लक्ष्य है।
- 2,000 मेगावाट क्षमता वाली सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना दिसंबर 2026 तक पूर्ण होगी, जिसके पोंडेज क्षेत्र को पर्यटन के लिए विकसित किया जाएगा।
- परियोजना में इको-टूरिज्म, रिवर क्रूज, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जनजातीय सांस्कृतिक पर्यटन शामिल होंगे।
- 28 मार्च को मुख्यमंत्री ने सुबनसिरी नदी पर 45 किलोमीटर की हाई-स्पीड रिवर यात्रा कर परियोजना की संभावनाओं का जायजा लिया था।
ईटानगर, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने सुबनसिरी लोअर पोंडेज को एक विश्वस्तरीय पर्वत एवं नदी आधारित इमर्सिव पर्यटन हब के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से सहयोग मांगा है। यह पहल राज्य को राष्ट्रीय और वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम मानी जा रही है।
परियोजना की रूपरेखा और उद्देश्य
इस योजना के अंतर्गत इको-टूरिज्म, एडवेंचर एवं वाटर स्पोर्ट्स, सांस्कृतिक एवं विरासत पर्यटन, अंतर्देशीय मत्स्य पालन, लग्जरी रिवर क्रूज और मरीन गतिविधियों जैसे अनेक घटकों को एकीकृत किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना सतत आजीविका के अवसर भी उपलब्ध कराएगी। प्रस्तावित पर्यटन इकोसिस्टम को देश के सबसे जैव-विविध नदी कॉरिडोर में स्थापित किया जाएगा।
यह पहल दुनिया के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों — नेपाल की फेवा झील, थाईलैंड के काएंग क्रचन राष्ट्रीय उद्यान, इटली की कोमो झील और न्यूजीलैंड के मिलफोर्ड साउंड — से प्रेरणा लेकर तैयार की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार की दृष्टि केवल घरेलू नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने की भी है।
सुबनसिरी जलविद्युत परियोजना से जुड़ाव
सुबनसिरी निचली जलविद्युत परियोजना, जिसकी उत्पादन क्षमता 2,000 मेगावाट है, देश की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है। यह सुबनसिरी नदी पर स्थित है और इसके चार यूनिट पहले ही चालू हो चुके हैं। पूरी परियोजना के दिसंबर 2026 तक पूर्णतः संचालित होने की उम्मीद है।
इस जलविद्युत परियोजना से निर्मित पोंडेज क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की रणनीति वास्तव में दोहरे उद्देश्य को साधती है — ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ पर्यटन आय। यह मॉडल वैश्विक स्तर पर कई देशों में सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
रोजगार और स्थानीय समुदायों को लाभ
मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना में स्थानीय और जनजातीय समुदायों को केंद्र में रखा जाएगा। ये समुदाय इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और पारिस्थितिक विरासत के संरक्षक होने के साथ-साथ परियोजना के मुख्य लाभार्थी भी होंगे।
परियोजना से लगभग 2,500 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है, जिनसे विशेष रूप से स्थानीय युवाओं को फायदा होगा। मध्यम अवधि में प्रति वर्ष 1.5 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
केंद्र सरकार से सहयोग की मांग
मुख्यमंत्री खांडु ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में पर्यटन मंत्रालय, ऊर्जा मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, पोत परिवहन मंत्रालय और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय से तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग का अनुरोध किया है। यह बहु-मंत्रालयी दृष्टिकोण परियोजना की व्यापकता और जटिलता को दर्शाता है।
पहले चरण की कार्ययोजना
पहले चरण में सरकार अग्रणी डिजाइन और योजना एजेंसियों की सहायता से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगी। इसमें वित्तीय अनुमान और कार्यान्वयन ढांचा शामिल होगा। यह पूरी प्रक्रिया स्थानीय समुदायों से परामर्श के साथ संपन्न की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 28 मार्च को मुख्यमंत्री पेमा खांडु ने अपने मंत्रियों और अधिकारियों के साथ सुबनसिरी नदी पर लगभग 45 किलोमीटर की हाई-स्पीड रिवर यात्रा की थी। उन्होंने इसे राज्य में जलविद्युत और पर्यटन संभावनाओं को जोड़ने की व्यापक पहल का हिस्सा बताया था। यह यात्रा इस परियोजना की नींव रखने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम थी।
अरुणाचल प्रदेश, जो अपनी अद्वितीय जैव-विविधता, जनजातीय संस्कृति और हिमालयी परिदृश्य के लिए जाना जाता है, अब तक पर्यटन के मामले में अपनी पूर्ण क्षमता का उपयोग नहीं कर पाया था। इनर लाइन परमिट (ILP) की आवश्यकता और सीमित बुनियादी ढांचे के कारण यहां पर्यटकों की संख्या सीमित रही है। इस परियोजना के माध्यम से सरकार इन बाधाओं को दूर करते हुए राज्य को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य बनाने का इरादा रखती है।
आने वाले महीनों में DPR तैयार होने के बाद परियोजना के क्रियान्वयन की समयसीमा और निवेश के आंकड़े स्पष्ट होंगे। केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और बजट आवंटन इस परियोजना की गति निर्धारित करेंगे।