गुजरात की 'जहाज निर्माण और मरम्मत नीति 2026' लॉन्च, पोरबंदर क्लस्टर से ₹27,000 करोड़ के निवेश की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 27 जुलाई 2026 को गांधीनगर में अपनी 'जहाज निर्माण और मरम्मत नीति 2026' का औपचारिक शुभारंभ किया, जिसका लक्ष्य राज्य को भारत के अग्रणी समुद्री विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इस नीति के तहत पोरबंदर में एक मेगा ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल चुकी है, जिससे ₹27,000 करोड़ से अधिक के निवेश की संभावना जताई जा रही है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने नीति का अनावरण करते हुए कहा कि राज्य की 2,340 किलोमीटर लंबी तटरेखा और सुदृढ़ बंदरगाह अवसंरचना इसे समुद्री उद्योग के लिए एक स्वाभाविक केंद्र बनाती है।
नीति की मुख्य विशेषताएँ
यह नीति शिपयार्डों के विकास, समुद्री उपकरण निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, कौशल विकास और हरित एवं स्मार्ट शिपयार्डों को प्रोत्साहन देने का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करती है। नीति का सबसे महत्त्वाकांक्षी प्रस्ताव है — एकीकृत मेगा शिपबिल्डिंग पार्क (IMSP) की स्थापना, जिसे शिपयार्ड, समुद्री उपकरण निर्माण क्लस्टर, परीक्षण सुविधाएँ, लॉजिस्टिक्स अवसंरचना, अनुसंधान एवं विकास केंद्र और प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एक समग्र समुद्री औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
पोरबंदर ग्रीनफील्ड क्लस्टर: निवेश का खाका
केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत यह मेगा क्लस्टर पोरबंदर जिले के कुच्छड़ी में स्थापित होगा। राज्य सरकार के अनुसार, इस क्लस्टर में दो से तीन विश्वस्तरीय शिपयार्ड होंगे, जिन्हें सहायक उद्योगों के नेटवर्क का समर्थन मिलेगा। शिपयार्डों में निजी निवेश लगभग ₹23,700 करोड़ रहने का अनुमान है, जबकि केंद्र की जहाज निर्माण विकास योजना (SBDS) और राज्य की वित्तीय सहायता से साझा अवसंरचना में ₹3,300 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। साझा अवसंरचना में ब्रेकवाटर, फ्लोटिंग क्रेन, ड्रेजिंग सुविधाएँ, बंदरगाह बेसिन विकास, नौवहन चैनल, सड़कें, बिजली और जल आपूर्ति नेटवर्क शामिल हैं — जिनका उद्देश्य निवेशकों की अवसंरचना लागत घटाना और परियोजना कार्यान्वयन में तेज़ी लाना है।
प्रोत्साहन पैकेज और निवेशक सुविधाएँ
निवेश आकर्षित करने के लिए नीति में राजकोषीय और गैर-राजकोषीय प्रोत्साहनों का एक व्यापक पैकेज प्रस्तुत किया गया है। इनमें पूंजी सहायता, स्टांप शुल्क की प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी, ड्रेजिंग सहायता, MSME खरीद प्रोत्साहन, बिजली एवं जल शुल्क समर्थन, समुद्री उपकरण विनिर्माण समूहों के लिए विशेष प्रोत्साहन और निर्धारित समय सीमा के भीतर विकास शुरू करने वाले निवेशकों के लिए अतिरिक्त लाभ शामिल हैं। गुजरात समुद्री बोर्ड द्वारा क्लस्टर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है।
राष्ट्रीय समुद्री नीति से तालमेल
यह नीति केंद्र सरकार की जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना 2025 (SBFAS), समुद्री विजन 2047 और 'आत्मनिर्भर भारत' के व्यापक उद्देश्यों के साथ संरेखित है। गौरतलब है कि भारत वैश्विक जहाज निर्माण बाज़ार में अभी भी चीन, दक्षिण कोरिया और जापान से पीछे है, और यह नीति उस अंतर को पाटने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। गुजरात की इस पहल से देश में समुद्री विनिर्माण को नई गति मिलने की उम्मीद है।