कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए भरोसा और भाईचारा ज़रूरी: BJP नेता अशोक कौल
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जम्मू-कश्मीर महासचिव (संगठन) अशोक कौल ने 24 अगस्त को श्रीनगर में कहा कि कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी का आधार केवल लक्षित हत्याओं (टारगेटेड किलिंग्स) को रोकने पर नहीं, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास की पुनर्स्थापना और भाईचारे को मज़बूत करने पर होना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत में कौल ने इस वापसी को एक सकारात्मक घटनाक्रम बताते हुए सामाजिक एकजुटता को इसकी बुनियादी शर्त करार दिया।
मुख्य घटनाक्रम
अशोक कौल ने कहा, 'कश्मीरी पंडितों को घाटी में लौटते और अपनी पैतृक जगहों से फिर से जुड़ते देखना उत्साहजनक है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर में इस समय भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मज़बूत करने की सबसे अधिक ज़रूरत है।
दक्षिण कश्मीर में हाल ही में हुई लक्षित हत्याओं के संदर्भ में कौल ने कहा कि ऐसी घटनाएँ किसी एक स्थान तक सीमित नहीं हैं और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में होती रहती हैं। उनके अनुसार, कोई भी जगह पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।
भाईचारे पर ज़ोर
कौल ने स्वीकार किया कि घाटी में लौटने और जीवन नए सिरे से शुरू करने की प्रक्रिया में कश्मीरी पंडितों को चुनौतियों और संघर्षों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'टारगेट किलिंग रुकेंगी नहीं और भाईचारा बनाना ज़रूरी है।' उनका ज़ोर इस बात पर था कि सामाजिक सद्भाव बढ़ाए बिना स्थायी पुनर्वास संभव नहीं।
पलायन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 1990 के दशक में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों से जान को गंभीर खतरे के कारण घाटी से कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ था। इस समुदाय को अपनी संपत्ति, आजीविका और सब कुछ पीछे छोड़कर निकलना पड़ा था। कौल ने यह भी कहा कि पंडित तत्कालीन राज्यपाल जगमोहन के आने से पहले ही घाटी छोड़ चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में कुछ लोगों ने बाहरी ताकतों का समर्थन किया, जिससे उन्हें बल मिला।
पिछले 37 वर्षों से कश्मीरी पंडित अपने ही देश में विस्थापित जीवन जी रहे हैं। इस दौरान समुदाय ने अपने साहस, संकल्प और शिक्षा के बल पर देश-विदेश में खुद को स्थापित किया है।
पुनर्वास के लिए अनुकूल माहौल की ज़रूरत
कौल ने कहा कि घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी और स्थायी पुनर्वास के लिए विभिन्न समुदायों के बीच भाईचारे को मज़बूत करने की कोशिशें अनिवार्य हैं। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक और सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया जारी है।
आगे की राह
BJP नेता के इस बयान ने कश्मीरी पंडितों की वापसी की बहस को नए सिरे से केंद्र में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक विश्वास का पुनर्निर्माण ही इस प्रक्रिया को दीर्घकालिक रूप से सफल बना सकता है।