कश्मीरी पंडितों को धमकियां दुश्मन देशों की साजिश: किरण वट्टल, कॉमेडियन शेरोन वर्मा पर भी साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
विश्व कश्मीरी समाज के संयोजक किरण वट्टल ने 29 अगस्त 2026 को श्रीनगर में कश्मीरी पंडित समुदाय को मिल रही हालिया धमकियों को दुश्मन देशों की सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने चेताया कि 1985-86 और 1999 में भी इसी तरह की धमकियाँ आई थीं, जिनका अंत नरसंहार में हुआ था। साथ ही उन्होंने कॉमेडियन शेरोन वर्मा और समय रैना से जुड़े विवाद पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
धमकियों की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
किरण वट्टल ने कहा, 'जो धमकियां आ रही हैं, ये 1985, 1986 और 1999 में भी आई थीं, जिसका परिणाम नरसंहार था। धमकियों के अलावा हत्याएं भी बहुत हुईं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि उस दौर और आज की परिस्थितियों में 'जमीन-आसमान का फर्क है।' यह ऐसे समय में आया है जब कश्मीर में सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशें जारी हैं।
वट्टल के अनुसार, ये धमकियाँ किसी स्थानीय समर्थन से नहीं, बल्कि दुश्मन देशों की ओर से प्रायोजित हैं। उन्होंने कहा कि जिन ताकतों ने किसी क्षेत्र पर कब्जा किया हुआ है, वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ऐसी धमकियाँ देकर लोगों को वहाँ से खदेड़ना चाहती हैं, ताकि उस भूमि पर फिर से नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
समुदाय की बहादुरी और जमीनी हकीकत
वट्टल ने बताया कि कश्मीरी पंडित समुदाय अब इन धमकियों से डरने वाला नहीं है। उन्होंने ताज़ा उदाहरण देते हुए कहा कि शुक्रवार को निकाली गई महादेव यात्रा में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सभी भारी संख्या में शामिल हुए और प्रशासन की व्यवस्थाएं भी संतोषजनक रहीं। उन्होंने कहा, 'कश्मीर का परिवार हमारे साथ है और चाहता है कि ये सिलसिला बना रहे।'
सरकार से अपील: कानून-व्यवस्था पर सतर्कता जरूरी
किरण वट्टल ने सरकार से आग्रह किया कि वह धमकी देने वालों की पहचान करे और यह समझे कि समुदाय को क्या संकेत मिल रहा है। उन्होंने माना कि अभी भी स्थिति केवल 80-85 फीसदी ही सामान्य हुई है और शेष बचे तनाव को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कॉमेडियन विवाद: शेरोन वर्मा और समय रैना पर तीखा प्रहार
कॉमेडियन शेरोन वर्मा और समय रैना से जुड़े विवाद पर वट्टल ने कड़े शब्दों में कहा, '36 साल से जुल्म झेल रहे, अपने घर से बेघर हुए एक समुदाय का मजाक उड़ाकर टीआरपी बटोरना शर्मनाक है। इन्हें शर्म आनी चाहिए।' उन्होंने समय रैना को भी नसीहत दी कि उन्हें उसी वक्त प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी और वह शो तुरंत बंद हो जाना चाहिए था।
वट्टल ने कहा कि जहाँ इतनी हत्याएं हुईं, उस दर्द का मज़ाक बनाना केवल टीआरपी की भूख को दर्शाता है। उन्होंने भरोसा जताया कि पूरा समाज ऐसे लोगों को 'मुंहतोड़ जवाब' देगा। गौरतलब है कि यह विवाद उस वक्त और संवेदनशील हो जाता है जब कश्मीरी पंडित पहले से ही धमकियों का सामना कर रहे हैं।
आगे क्या
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक धमकी देने वाले तत्वों की पहचान कर उन्हें जवाबदेह नहीं ठहराया जाता, तब तक इस तरह की घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी। समुदाय की सुरक्षा और सम्मान दोनों सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।