PM पैकेज कर्मचारियों को कथित धमकी पर KPSS का सवाल: 'भय खत्म हो तो भाईचारा शुरू होगा'
सारांश
मुख्य बातें
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (KPSS) ने मंगलवार, 25 अगस्त को श्रीनगर में जारी एक प्रेस बयान में घाटी में कार्यरत प्रधानमंत्री पैकेज के तहत नियुक्त कर्मचारियों को कथित तौर पर मिली नई धमकी पर गहरी चिंता व्यक्त की। समिति ने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और विश्वास बहाली के लिए महज़ भाईचारे की बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस और सत्यापन-योग्य कदम उठाने की ज़रूरत है। उल्लेखनीय है कि सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक इस कथित धमकी या उससे जुड़े तथाकथित संगठन की प्रामाणिकता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
मुख्य घटनाक्रम
KPSS के अध्यक्ष संजय कुमार टिक्कू ने बयान में कहा, 'भाईचारा वहीं शुरू होता है जहां भय समाप्त होता है। यह केवल एक औपचारिक शब्द नहीं बन सकता, जिसे हर धमकी या त्रासदी के बाद दोहराया जाए, जबकि मूल समस्या जस की तस बनी रहे।' उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार कश्मीरी पंडित समुदाय पर ही यह जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती कि वह कश्मीर के प्रति अपना भरोसा साबित करे, जबकि इस समुदाय ने पहले ही हिंसा और विस्थापन का दर्द झेला है।
समुदाय की पीड़ा और उपेक्षा का आरोप
टिक्कू ने कहा कि वर्षों से यह कहा जाता रहा है कि कश्मीरी पंडितों की वापसी घाटी की बहुलतावादी पहचान को बहाल करने के लिए ज़रूरी है, लेकिन जब वे लौटते हैं तो उनसे परिस्थितियों के अनुसार ढलने को कहा जाता है। उनके अनुसार, जब पंडित सुरक्षा माँगते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि हालात सुधर रहे हैं; जब वे पैतृक संपत्तियों की बात करते हैं तो भविष्य की ओर देखने की सलाह दी जाती है; और जब नई धमकियाँ सामने आती हैं तो उनसे धैर्य और विश्वास बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। टिक्कू ने तीखा सवाल उठाया, 'एक पीड़ित को कश्मीर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता आखिर कितनी बार साबित करनी होगी, इससे पहले कि कश्मीर उसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित करे?'
सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल
समिति ने कहा कि जो लोग मौजूदा खतरे को केवल एक पोस्टर बताकर उसकी गंभीरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि डर और धमकी केवल कागज़ के एक टुकड़े पर निर्भर नहीं होती। KPSS ने पूछा कि पोस्टर किसने तैयार किया, उसे किसने फैलाया, संबंधित लोगों की निजी जानकारी कैसे हासिल की गई, और क्या इसके पीछे कोई स्थानीय नेटवर्क या मददगार मौजूद थे। समिति ने स्पष्ट किया कि ये राजनीतिक नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल हैं और इनके विश्वसनीय जवाब मिलने चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि किसी समाज की वास्तविक परीक्षा यह नहीं होती कि वह किसी हत्या के बाद कितना शोक व्यक्त करता है, बल्कि यह होती है कि वह हत्या से पहले मिलने वाली चेतावनियों को कितनी गंभीरता से लेता है।
KPSS की माँगें
समिति ने माँग की कि धमकियों की गंभीर जाँच हो, PM पैकेज कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, उनकी निजी जानकारी की रक्षा की जाए, पैतृक संपत्ति के अधिकार सुरक्षित रखे जाएँ और वापसी के अधिकार को साहस या किस्मत नहीं, बल्कि सुरक्षा और न्याय का विषय बनाया जाए। KPSS ने कहा कि यह किसी विशेष सुविधा की माँग नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, बहुलतावादी और न्यायपूर्ण समाज की न्यूनतम अपेक्षा है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब घाटी में PM पैकेज के तहत नियुक्त कश्मीरी पंडित कर्मचारी पहले भी कई बार सुरक्षा की माँग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं और कुछ ने घाटी छोड़ने का रास्ता चुना है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कथित धमकी की प्रामाणिकता की जाँच अभी जारी बताई जा रही है। समिति की माँगों पर प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।