अशोक पंडित का 'कॉकरोच जनता पार्टी' पर निशाना — जनआंदोलनों की आड़ में राजनीतिक एजेंडा चल रहा है
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म निर्माता एवं सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने 8 जून 2026 को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के चल रहे आंदोलन पर तीखे सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि इस आंदोलन के पीछे वास्तविक न्याय की चिंता कम और राजनीतिक हित साधने की मंशा अधिक है। मुंबई से अपनी बात रखते हुए पंडित ने कहा कि जनआंदोलनों की आड़ में राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाया जा रहा है।
इंस्टाग्राम पोस्ट में उठाए सवाल
अशोक पंडित ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा कि जितना अधिक वे इस पार्टी को देखते हैं, उतना ही उनके मन में इसके इरादों को लेकर संदेह गहरा होता जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल सवाल उठा रहे हैं और इस पार्टी के पैटर्न को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल है।
अन्ना हजारे आंदोलन का संदर्भ
पंडित ने 2010 के अन्ना हजारे आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि आज़ादी के बाद व्यवस्था के विरुद्ध यह सबसे बड़ा जनआंदोलन था, जिसमें समाज सुधारक, बुद्धिजीवी और आम नागरिक एकजुट हुए थे। उस आंदोलन से अरविंद केजरीवाल एक प्रमुख चेहरे के रूप में उभरे। पंडित का आरोप है कि केजरीवाल ने बाद में उस आंदोलन को अपनी निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने दावा किया कि जिसे नए भारत का चेहरा बताया गया, वही व्यक्ति बाद में कथित तौर पर शराब नीति मामले में जेल भी गए।
पेपर लीक और CJP पर आरोप
पंडित ने पेपर लीक घोटाले को 'बेहद निंदनीय' करार दिया और कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता — दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। हालाँकि उनका आरोप है कि CJP अपने राजनीतिक एजेंडे के चलते असली मुद्दों को हाशिये पर धकेल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस आंदोलन के कई प्रमुख चेहरों का ट्रैक रिकॉर्ड संदिग्ध है — एक प्रमुख आवाज़ ने कथित तौर पर उमर खालिद की तारीफ की है, जबकि सोनम वांगचुक जैसे नाम भी जाँच के दायरे में रहे हैं। पंडित के अनुसार यह आंदोलन अब आम नागरिकों के विद्रोह से कम और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के पुनर्मिलन जैसा अधिक प्रतीत होता है।
विपक्षी नेताओं पर निशाना
पंडित ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद केजरीवाल की घटती राजनीतिक साख का ज़िक्र करते हुए कहा कि वे अपनी कम होती राजनीतिक पूँजी बचाने के लिए नए मुद्दों की तलाश में हैं। उन्होंने पंजाब, गुजरात और उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को देखते हुए आरोप लगाया कि केजरीवाल जनाक्रोश की लहर खड़ी करके राजनीतिक फायदा उठाना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी, अखिलेश यादव और ममता बनर्जी सहित कई विपक्षी नेताओं पर भी आरोप लगाया कि ये नेता जनसमर्थन न मिलने पर ऐसे आंदोलनों के सहारे राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
पंडित ने आगाह किया कि जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आएँगे, देशभर में ऐसे विरोध प्रदर्शनों में अचानक उछाल आ सकता है। उन्होंने किसान आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले भी विदेशी हस्तियों, टूलकिट और राजमार्गों पर राजनीतिक प्रदर्शन देखे जा चुके हैं, जो चुनाव समाप्त होते ही अदृश्य हो गए। उनके शब्दों में — 'मुखौटे बदलते रहते हैं, लेकिन असली चेहरा वही रहता है।'