25 अगस्त 2026
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'कॉकरोच जनता पार्टी' ट्रेंड पर बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल का तीखा हमला, बेरोजगार युवाओं को बताया दिशाहीन

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'कॉकरोच जनता पार्टी' ट्रेंड पर बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल का तीखा हमला, बेरोजगार युवाओं को बताया दिशाहीन

सारांश

'कॉकरोच जनता पार्टी' — सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी से उपजा व्यंग्य अब बेरोजगार युवाओं के गुस्से का प्रतीक बन चुका है। बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल ने इसे कुचलने की कोशिश में वही भाषा दोहराई जिसने यह आग लगाई थी — और विवाद और गहरा हो गया।

मुख्य बातें

बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने 23 मई 2026 को कटिहार में 'कॉकरोच जनता पार्टी' ट्रेंड पर तीखा हमला बोला।
यह ट्रेंड 15 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस सूर्यकांत की एक विवादित टिप्पणी के बाद उभरा था।
सोशल मीडिया यूजर अभिजीत डिपके ने एक्स प्लेटफॉर्म पर गूगल फॉर्म शेयर कर इस काल्पनिक पार्टी के लिए रजिस्ट्रेशन की अपील की थी।
मंत्री जायसवाल ने इस अभियान से जुड़े लोगों की तुलना 'कॉकरोच' और 'चूहों' से की — उसी शब्दावली का उपयोग जिसके विरोध में यह आंदोलन खड़ा हुआ।
जायसवाल ने पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अजहा पर गोहत्या पर रोक की माँग को लेकर भी बयान दिया।

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे 'कॉकरोच जनता पार्टी' ऑनलाइन अभियान पर कड़ा प्रहार किया है। 23 मई 2026 को कटिहार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण अभियान के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने इस ट्रेंड से जुड़े लोगों को दिशाहीन करार देते हुए कहा कि वे समाज के लिए कोई सकारात्मक योगदान नहीं दे रहे। उनके विवादित बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस छिड़ गई है।

क्या है 'कॉकरोच जनता पार्टी' ट्रेंड

यह ऑनलाइन अभियान 15 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में हुई एक सुनवाई के बाद सामने आया। सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की थी कि कुछ बेरोजगार युवा, जो पेशेवर रूप से खुद को स्थापित नहीं कर पाते, वे कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं। इस टिप्पणी की व्यापक आलोचना हुई, जिसके बाद जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया।

इसके अगले दिन अभिजीत डिपके नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने एक्स प्लेटफॉर्म पर कथित 'कॉकरोच जनता पार्टी' के लिए गूगल फॉर्म शेयर कर लोगों से रजिस्ट्रेशन की अपील की। शुरुआत में यह एक इंटरनेट मजाक और व्यंग्य था, लेकिन धीरे-धीरे यह बेरोजगारी, राजनीति और व्यवस्था के प्रति जनता की नाराजगी का बड़ा प्रतीक बन गया।

मंत्री जायसवाल का बयान और विवाद

मंत्री दिलीप जायसवाल ने अपने बयान में विवादित भाषा का प्रयोग करते हुए इस अभियान से जुड़े लोगों की तुलना 'कॉकरोच' और 'चूहों' से की। उन्होंने दावा किया कि कुछ बेरोजगार युवा इस तरह की गतिविधियों के ज़रिए देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र इतना मज़बूत है कि इस तरह के ट्रेंड या अभियान उसे कमज़ोर नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि मंत्री की यह भाषा उसी शब्दावली को दोहराती है जिसके विरोध में यह पूरा ऑनलाइन आंदोलन खड़ा हुआ था — जिससे आलोचकों ने इसे विरोधाभासी और असंवेदनशील बताया है।

गोहत्या पर भी दिया बयान

इसी दौरान जायसवाल ने पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अजहा के अवसर पर गोहत्या पर सख्त रोक लगाने की माँग को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गाय का विशेष धार्मिक महत्व है और वे गोसंरक्षण के पक्षधर हैं। इस बयान ने भी राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

मंत्री के दोनों बयानों के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला तेज हो गया है। आलोचकों का कहना है कि बेरोजगार युवाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना उनकी वास्तविक समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में युवा बेरोजगारी एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बनी हुई है।

आगे क्या

'कॉकरोच जनता पार्टी' ट्रेंड अब महज़ एक इंटरनेट मजाक से आगे निकलकर बेरोजगारी और व्यवस्था के प्रति युवा असंतोष की व्यापक बहस का हिस्सा बन चुका है। मंत्री जायसवाल के बयान ने इस बहस को और तेज़ कर दिया है, और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी भाषा को दोहराकर उन्होंने ट्रेंड को और हवा दे दी। 'कॉकरोच जनता पार्टी' मूलतः एक व्यंग्य था, लेकिन सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया ने उसे बेरोजगार युवाओं की असली पीड़ा की वैध अभिव्यक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। असली सवाल यह नहीं है कि यह ट्रेंड 'देशविरोधी' है या नहीं — असली सवाल यह है कि लाखों युवा इस व्यंग्य में अपनी पहचान क्यों देख रहे हैं, और उस पर सत्ता की चुप्पी क्यों है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या है और यह कैसे शुरू हुई?
यह एक काल्पनिक ऑनलाइन पार्टी है जो 15 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में जस्टिस सूर्यकांत की एक विवादित टिप्पणी के बाद इंटरनेट पर व्यंग्य के रूप में उभरी। सोशल मीडिया यूजर अभिजीत डिपके ने एक्स प्लेटफॉर्म पर गूगल फॉर्म शेयर कर रजिस्ट्रेशन की अपील की, और धीरे-धीरे यह बेरोजगारी व व्यवस्था के प्रति युवा असंतोष का प्रतीक बन गया।
जस्टिस सूर्यकांत की किस टिप्पणी से यह विवाद शुरू हुआ?
15 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय की एक सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि कुछ बेरोजगार युवा, जो पेशेवर रूप से खुद को स्थापित नहीं कर पाते, वे कॉकरोच की तरह हर जगह फैल जाते हैं। इस पर व्यापक आलोचना के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी बात को गलत तरीके से समझा गया।
बिहार मंत्री दिलीप जायसवाल ने इस ट्रेंड पर क्या कहा?
मंत्री दिलीप जायसवाल ने 23 मई 2026 को कटिहार में कहा कि कुछ बेरोजगार युवा इस अभियान के ज़रिए देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस ट्रेंड से जुड़े लोगों की तुलना 'कॉकरोच' और 'चूहों' से की और दावा किया कि भारत का लोकतंत्र ऐसे अभियानों से कमज़ोर नहीं होगा।
इस ट्रेंड का राजनीतिक असर क्या है?
मंत्री जायसवाल के बयान ने इस ऑनलाइन व्यंग्य को एक बड़ी राजनीतिक बहस में बदल दिया है। आलोचकों का कहना है कि बेरोजगार युवाओं को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना उनकी वास्तविक समस्याओं को नज़रअंदाज़ करना है, जिससे सत्ता पक्ष की छवि को नुकसान हो सकता है।
क्या मंत्री जायसवाल ने इस दौरान कोई और विवादित बयान दिया?
हाँ, उसी दौरान जायसवाल ने पश्चिम बंगाल में ईद-उल-अजहा के अवसर पर गोहत्या पर सख्त रोक लगाने की माँग की। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गाय का विशेष धार्मिक महत्व है और वे गोसंरक्षण के पक्षधर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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