दिल्ली हाईकोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' प्रदर्शन विरोधी याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 जून 2025 को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के 6 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन के खिलाफ दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई नियमित निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होगी।
याचिका में क्या माँग की गई
सेव इंडिया फाउंडेशन की ओर से दायर इस याचिका में माँग की गई कि प्रस्तावित आंदोलन के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के निर्धारित दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से मध्य दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास बिना अनुमति बड़ी संख्या में लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाने की अपील की।
वकीलों की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता विकास शर्मा ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को संविधान के अंतर्गत शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, किंतु बिना अनुमति के लाखों लोगों को एकत्र करने की घोषणा गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, 'यदि कोई यह घोषणा करता है कि पाँच लाख या दस लाख लोग किसी स्थान पर एकत्र होंगे और इसके लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई है, खासकर राष्ट्रीय राजधानी में, तो यह गंभीर मामला बन जाता है।'
अधिवक्ता उमेश चंद शर्मा ने तर्क दिया कि दो-तीन वर्ष पूर्व सर्वोच्च न्यायालय ने सार्वजनिक जमावड़ों को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए थे और उनकी याचिका उन्हीं आदेशों के अनुपालन की माँग करती है। उन्होंने यह भी बताया कि अदालत की वेकेशन अवधि के कारण एकल पीठ बैठ रही है, जिससे उनकी उसी दिन सुनवाई की माँग अस्वीकार कर दी गई।
याचिकाकर्ता की चिंताएँ
याचिकाकर्ता प्रीत सिरोही ने कहा कि आयोजकों की ओर से अब तक न तो व्यवस्था का कोई ब्यौरा सार्वजनिक किया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि इतने बड़े प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से कैसे संचालित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दिल्ली को शाहीन बाग जैसी स्थिति में लाने की कोशिश की गई तो वे भी सड़कों पर उतरेंगे।
कोर्ट का रुख
अदालत ने याचिका को खारिज नहीं किया, बल्कि तत्काल सुनवाई की माँग को अस्वीकार करते हुए मामले को नियमित सूची में रखा। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजधानी में बड़े सार्वजनिक आयोजनों को लेकर कानूनी और प्रशासनिक सवाल बार-बार उठते रहे हैं।
आगे क्या
याचिका पर सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी। तब तक 6 जून का प्रस्तावित प्रदर्शन कानूनी चुनौती के साये में रहेगा। सार्वजनिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों के बीच यह संतुलन आने वाले दिनों में न्यायिक परीक्षण का विषय बन सकता है।