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कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च को दिल्ली पुलिस की 'ना', BNS धारा 163 लागू: DCP सचिन शर्मा

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कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च को दिल्ली पुलिस की 'ना', BNS धारा 163 लागू: DCP सचिन शर्मा

सारांश

दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी के 20 जुलाई के संसद मार्च को साफ 'ना' कह दी है — न आवेदन मिला, न अनुमति दी गई। BNS धारा 163 लागू है और संसद सत्र कल से शुरू हो रहा है। सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुँचने के बाद अब CJP संस्थापक अभिजीत दिपके भूख हड़ताल पर हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 20 जुलाई के संसद मार्च की कोई अनुमति नहीं दी है।
डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि CJP की ओर से कोई अनुमति-आवेदन भी प्राप्त नहीं हुआ।
BNS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू; जंतर-मंतर के बाहर 5 या अधिक लोगों का जमावड़ा वर्जित।
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके भूख हड़ताल पर।
21 जुलाई से संसद का मानसून सत्र; सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जाएगी।

नई दिल्लीदिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई है और न ही ऐसा कोई आवेदन प्राप्त हुआ है। नई दिल्ली जिले के डीसीपी सचिन शर्मा ने 19 जुलाई को यह जानकारी देते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है।

मुख्य घटनाक्रम

CJP 20 जून से जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रही है और उसने 20 जुलाई को संसद तक मार्च का ऐलान किया है। हालाँकि, डीसीपी सचिन शर्मा ने साफ किया कि पार्टी की ओर से मार्च की अनुमति के लिए कोई औपचारिक आवेदन दिल्ली पुलिस को नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि विरोध प्रदर्शन केवल जंतर-मंतर के निर्धारित स्थल पर पूर्व अनुमति लेकर ही किए जा सकते हैं।

निषेधाज्ञा का दायरा

लागू निषेधाज्ञा के अंतर्गत जंतर-मंतर के निर्धारित विरोध स्थल को छोड़कर पाँच या अधिक व्यक्तियों का जमावड़ा, विरोध मार्च या सार्वजनिक प्रदर्शन पूरी तरह वर्जित है। डीसीपी शर्मा ने यह भी बताया कि 21 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, इसलिए जन सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए व्यापक बंदोबस्त किए जाएंगे।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को बीते दिन पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया था। इसके बाद CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी का आंदोलन एक महीने से अधिक समय से जारी है।

पुलिस की चेतावनी

डीसीपी शर्मा ने चेतावनी दी कि आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली पुलिस ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत सभा या मार्च में भाग न लें और जन शांति बनाए रखने में सहयोग करें।

आगे क्या होगा

CJP का संसद मार्च का इरादा अभी भी बरकरार बताया जा रहा है, जबकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संसद सत्र की शुरुआत और चल रहे आंदोलन के बीच 20 जुलाई की स्थिति निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे नज़रअंदाज़ करना राजनीतिक रूप से आसान नहीं होगा। असली परीक्षा 20 जुलाई को होगी — क्या CJP फिर भी मार्च का प्रयास करती है और पुलिस की प्रतिक्रिया क्या होती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च को अनुमति क्यों नहीं मिली?
दिल्ली पुलिस के अनुसार CJP ने मार्च के लिए कोई अनुमति आवेदन ही नहीं दिया और BNS धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा पहले से लागू है। जंतर-मंतर के निर्धारित स्थल के बाहर किसी भी मार्च या जमावड़े पर प्रतिबंध है।
BNS धारा 163 क्या है और इसका विरोध प्रदर्शनों पर क्या असर पड़ता है?
BNS की धारा 163 के तहत जिला प्रशासन निर्धारित क्षेत्र में पाँच या अधिक व्यक्तियों के जमावड़े, मार्च या प्रदर्शन पर रोक लगा सकता है। इसका उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
सोनम वांगचुक को अस्पताल क्यों भेजा गया?
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे, जिसके बाद उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने भूख हड़ताल जारी रखी।
CJP का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कब से चल रहा है?
कॉकरोच जनता पार्टी 20 जून से जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रही है। पार्टी ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च का ऐलान किया है, जिसे दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
20 जुलाई को संसद के पास सुरक्षा व्यवस्था क्यों कड़ी की जाएगी?
21 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है और CJP के मार्च की घोषणा के मद्देनज़र दिल्ली पुलिस ने जन सुरक्षा और सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए व्यापक बंदोबस्त की बात कही है।
राष्ट्र प्रेस
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