सीजेपी के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी: 'न अनुमति माँगी, न दी गई'
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 19 जुलाई 2025 को एक आधिकारिक एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च के लिए न तो कोई अनुमति माँगी गई है और न ही दी गई है। यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है जब संसद का मानसून सत्र भी 20 जुलाई से शुरू हो रहा है, जिससे राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी कर दी गई है।
एडवाइजरी में क्या कहा गया
दिल्ली पुलिस की एडवाइजरी के अनुसार, नई दिल्ली जिले में धारा 163 बीएनएसएस (पूर्ववर्ती धारा 144 सीआरपीसी) के तहत निषेधाज्ञा पहले से लागू है। इसके तहत पाँच या अधिक व्यक्तियों के विरोध मार्च, जुलूस, प्रदर्शन और सभाएँ सख्त रूप से प्रतिबंधित हैं। अपवाद केवल जंतर-मंतर स्थित निर्धारित विरोध स्थल पर पूर्व अनुमति के साथ आयोजित कार्यक्रमों के लिए है।
पुलिस ने यह भी चेतावनी दी कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति पर धारा 223 बीएनएसएस और कानून के अन्य लागू प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाया जाएगा।
सुरक्षा के कारण
दिल्ली पुलिस ने बताया कि संसद सत्र 20 जुलाई से शुरू होने के कारण जन सुरक्षा, संरक्षित व्यक्तियों की सुरक्षा और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। पुलिस ने सभी नागरिकों से अनधिकृत सभाओं या मार्च में भाग न लेने और सार्वजनिक शांति बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है।
सीजेपी की पृष्ठभूमि और भूख हड़ताल
गौरतलब है कि सीजेपी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक मार्च का ऐलान किया था। इससे पहले, जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया। उनके बाद सीजेपी के फाउंडर अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।
आगे क्या होगा
दिल्ली पुलिस की स्पष्ट चेतावनी के बावजूद सीजेपी ने अपने मार्च की योजना से पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। यह ऐसे समय में है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और राजधानी में सुरक्षा बल पूरी तरह सतर्क हैं। किसी भी अनधिकृत मार्च की स्थिति में कानूनी कार्रवाई तय मानी जा रही है।