झारखंड हाईकोर्ट का निर्देश: जेपीएससी अध्यक्ष पद रिक्त नहीं रह सकता, 20 अगस्त तक सरकार दे जवाब
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के अध्यक्ष का पद संवैधानिक महत्व का है और इसे लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार को 20 अगस्त तक यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक होगी।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ वन विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्ति से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने अदालत को बताया कि वन विभाग के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है।
अधिवक्ता पिपरवाल ने बताया कि असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (एसीएफ) और रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (आरएफओ) के पदों के लिए प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पूरी हो चुकी है। मुख्य परीक्षा का परिणाम भी घोषित किया जा चुका है और शारीरिक दक्षता परीक्षा की तिथि भी तय कर दी गई है।
नियुक्ति प्रक्रिया में बाधा
आयोग की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि जेपीएससी अध्यक्ष के इस्तीफे और आयोग से जुड़ी चल रही जाँच के कारण नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वन विभाग में बड़ी संख्या में रिक्त पद वन संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित कर रहे हैं।
अदालत की टिप्पणी और निर्देश
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि जेपीएससी एक संवैधानिक संस्था है और उसके अध्यक्ष का पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रखा जा सकता। खंडपीठ ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकार से स्पष्ट निर्देश लेकर अगली सुनवाई में अवगत कराएँ। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार और आयोग दोनों से प्रगति रिपोर्ट भी माँगी है।
पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट वन विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों के बड़ी संख्या में रिक्त पदों के कारण वन संरक्षण और प्रशासनिक कार्यों पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले की निगरानी कर रही है। अदालत पहले भी राज्य सरकार को समयबद्ध नियुक्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दे चुकी है।
आगे क्या
मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित है, जिसमें राज्य सरकार को जेपीएससी अध्यक्ष की नियुक्ति की समयसीमा स्पष्ट करनी होगी। यह सुनवाई तय करेगी कि झारखंड की सरकारी भर्ती प्रक्रिया को पटरी पर लाने में कितना और समय लगेगा।