17 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड कौशल विकास मिशन में ₹55 करोड़ की अनियमितता का आरोप, मरांडी ने हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड कौशल विकास मिशन में ₹55 करोड़ की अनियमितता का आरोप, मरांडी ने हेमंत सोरेन को लिखा पत्र

सारांश

झारखंड में विपक्ष ने कौशल विकास मिशन पर बड़ा हमला बोला है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का आरोप है कि फर्जी बैंक गारंटी देने वाली ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को नियमों के विपरीत राहत देकर ₹55 करोड़ का भुगतान किया गया। अब वे CM सोरेन से न्यायिक जाँच और कैग ऑडिट की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 17 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर जेएसडीएमएस में कथित ₹55 करोड़ की वित्तीय अनियमितता की न्यायिक जाँच की माँग की।
फर्जी बैंक गारंटी देने वाली छह कंपनियों को 8 अगस्त 2024 को ब्लैकलिस्ट किया गया, लेकिन 14 अक्टूबर 2024 को मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने उन्हें ब्लैकलिस्ट से बाहर कर दिया।
ब्लैकलिस्ट से हटाने के बाद इन कंपनियों को कथित तौर पर ₹55 करोड़ का भुगतान जारी किया गया।
अगस्त 2025 में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे की गिरफ्तारी के बाद इन्हीं कंपनियों को पुनः ब्लैकलिस्ट किया गया।
मरांडी ने श्रम विभाग के अधिकारियों पर एफआईआर, तत्काल निलंबन और 2023-24 से अब तक के सभी निर्णयों का कैग ऑडिट कराने की माँग की।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (जेएसडीएमएस) में कथित ₹55 करोड़ की वित्तीय अनियमितता के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर न्यायिक जाँच की माँग की है। 17 जुलाई को लिखे इस पत्र में मरांडी ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, उन्हें तत्काल निलंबित करने और पूरे प्रकरण का भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से विशेष ऑडिट कराने की भी माँग की है।

मुख्य आरोप: फर्जी बैंक गारंटी और ₹55 करोड़ का भुगतान

मरांडी के पत्र के अनुसार, जेएसडीएमएस में फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत करने वाली छह कंपनियों को तत्कालीन मिशन निदेशक ने 8 अगस्त 2024 को अगस्त 2026 तक के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद 14 अक्टूबर 2024 को वर्तमान मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने 'लोकहित' का हवाला देते हुए इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से बाहर कर दिया और तत्पश्चात उन्हें कथित तौर पर ₹55 करोड़ का भुगतान जारी किया गया।

घटनाक्रम: गिरफ्तारी के बाद फिर ब्लैकलिस्ट

मरांडी ने यह भी उल्लेख किया कि अगस्त 2025 में फर्जी बैंक गारंटी मामले में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे की गिरफ्तारी के बाद इन्हीं कंपनियों को पुनः ब्लैकलिस्ट किया गया। उनके अनुसार, ब्लैकलिस्ट से हटाने, भुगतान जारी करने और फिर दोबारा ब्लैकलिस्ट करने का यह घटनाक्रम गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।

मरांडी के सवाल: जवाबदेही किसकी?

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से कई सीधे सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि फर्जी बैंक गारंटी की दोषी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से हटाने का निर्णय किसके आदेश पर और किस नियम के तहत लिया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि ₹55 करोड़ के भुगतान की स्वीकृति किस स्तर पर दी गई और इसके लिए कौन-सा अधिकारी जिम्मेदार था।

मरांडी ने यह भी उठाया कि यदि एक विभाग के सचिव के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, तो श्रम विभाग के तत्कालीन और वर्तमान सचिवों के खिलाफ अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया।

माँगें: एफआईआर, निलंबन और कैग ऑडिट

मरांडी ने माँग की है कि श्रम विभाग के तत्कालीन और वर्तमान सचिव समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही वर्ष 2023-24 से अब तक जेएसडीएमएस के सभी निर्णयों का कैग या किसी स्वतंत्र एजेंसी से विशेष ऑडिट कराया जाए।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यालय की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। न्यायिक जाँच या ऑडिट की दिशा में सरकार क्या कदम उठाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड कौशल विकास मिशन में ₹55 करोड़ की अनियमितता का आरोप क्या है?
आरोप है कि जेएसडीएमएस में फर्जी बैंक गारंटी देने वाली छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद नियमों के विपरीत राहत दी गई और उन्हें कथित तौर पर ₹55 करोड़ का भुगतान किया गया। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में न्यायिक जाँच की माँग की है।
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से क्या माँगें की हैं?
मरांडी ने न्यायिक जाँच, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर और तत्काल निलंबन, तथा वर्ष 2023-24 से अब तक जेएसडीएमएस के सभी निर्णयों का कैग या स्वतंत्र एजेंसी से विशेष ऑडिट कराने की माँग की है।
कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से क्यों और कैसे हटाया गया?
8 अगस्त 2024 को तत्कालीन मिशन निदेशक ने छह कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर ब्लैकलिस्ट किया था। 14 अक्टूबर 2024 को वर्तमान मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने 'लोकहित' का हवाला देते हुए इन्हें ब्लैकलिस्ट से बाहर कर दिया, जिसके बाद इन्हें भुगतान जारी किया गया।
विनय चौबे की गिरफ्तारी का इस मामले से क्या संबंध है?
अगस्त 2025 में फर्जी बैंक गारंटी मामले में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे को गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही इन्हीं कंपनियों को पुनः ब्लैकलिस्ट किया गया, जो मरांडी के अनुसार मामले की गंभीरता को और उजागर करता है।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यालय की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि सरकार न्यायिक जाँच या कैग ऑडिट की अनुमति देती है, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि ₹55 करोड़ के भुगतान की जिम्मेदारी किस स्तर पर है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले