झारखंड कौशल विकास मिशन में ₹55 करोड़ की अनियमितता का आरोप, मरांडी ने हेमंत सोरेन को लिखा पत्र
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी (जेएसडीएमएस) में कथित ₹55 करोड़ की वित्तीय अनियमितता के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर न्यायिक जाँच की माँग की है। 17 जुलाई को लिखे इस पत्र में मरांडी ने दोषी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, उन्हें तत्काल निलंबित करने और पूरे प्रकरण का भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से विशेष ऑडिट कराने की भी माँग की है।
मुख्य आरोप: फर्जी बैंक गारंटी और ₹55 करोड़ का भुगतान
मरांडी के पत्र के अनुसार, जेएसडीएमएस में फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत करने वाली छह कंपनियों को तत्कालीन मिशन निदेशक ने 8 अगस्त 2024 को अगस्त 2026 तक के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था। आरोप है कि इसके बावजूद 14 अक्टूबर 2024 को वर्तमान मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल ने 'लोकहित' का हवाला देते हुए इन कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से बाहर कर दिया और तत्पश्चात उन्हें कथित तौर पर ₹55 करोड़ का भुगतान जारी किया गया।
घटनाक्रम: गिरफ्तारी के बाद फिर ब्लैकलिस्ट
मरांडी ने यह भी उल्लेख किया कि अगस्त 2025 में फर्जी बैंक गारंटी मामले में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे की गिरफ्तारी के बाद इन्हीं कंपनियों को पुनः ब्लैकलिस्ट किया गया। उनके अनुसार, ब्लैकलिस्ट से हटाने, भुगतान जारी करने और फिर दोबारा ब्लैकलिस्ट करने का यह घटनाक्रम गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
मरांडी के सवाल: जवाबदेही किसकी?
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से कई सीधे सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि फर्जी बैंक गारंटी की दोषी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट से हटाने का निर्णय किसके आदेश पर और किस नियम के तहत लिया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि ₹55 करोड़ के भुगतान की स्वीकृति किस स्तर पर दी गई और इसके लिए कौन-सा अधिकारी जिम्मेदार था।
मरांडी ने यह भी उठाया कि यदि एक विभाग के सचिव के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, तो श्रम विभाग के तत्कालीन और वर्तमान सचिवों के खिलाफ अब तक कोई कदम क्यों नहीं उठाया गया।
माँगें: एफआईआर, निलंबन और कैग ऑडिट
मरांडी ने माँग की है कि श्रम विभाग के तत्कालीन और वर्तमान सचिव समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही वर्ष 2023-24 से अब तक जेएसडीएमएस के सभी निर्णयों का कैग या किसी स्वतंत्र एजेंसी से विशेष ऑडिट कराया जाए।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यालय की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। न्यायिक जाँच या ऑडिट की दिशा में सरकार क्या कदम उठाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।