झारखंड में नारी शक्ति वंदन अधिनियम: BJP ने CM हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर विशेष सत्र की मांग की
सारांश
Key Takeaways
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने 3 मई 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के समर्थन में झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की माँग की है। BJP नेताओं का कहना है कि महिला आरक्षण से जुड़े इस महत्वपूर्ण विधेयक पर राज्य सरकार को ठोस पहल करनी चाहिए।
पत्र में क्या कहा गया
पत्र में BJP नेताओं ने उल्लेख किया कि केंद्र सरकार ने 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' पेश किया था। उनका आरोप है कि विपक्षी दलों के सहयोग की कमी के कारण यह विधेयक संसद से पारित नहीं हो सका। मरांडी और साहू ने तर्क दिया कि यदि यह विधेयक पारित होता, तो 2029 से देश की आधी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक अवसर मिलता।
झारखंड पर संभावित प्रभाव
BJP नेताओं के अनुसार, इस विधेयक के लागू होने पर झारखंड की लोकसभा सीटें 14 से बढ़कर 21 हो सकती हैं, जिनमें से 7 सीटों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसी तरह विधानसभा सीटों की संख्या 81 से बढ़कर 121 होने और उनमें से 41 सीटों पर महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलने की बात भी पत्र में रेखांकित की गई है। यह ऐसे समय में आया है जब महिला राजनीतिक भागीदारी को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ हो रही है।
सांस्कृतिक संदर्भ और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मरांडी और साहू ने पत्र में झारखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में महिलाओं को हमेशा सम्मानजनक स्थान मिला है। उन्होंने वीरांगना फूलो-झानो का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड की महिलाओं को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। गौरतलब है कि झारखंड में आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पहले से ही राष्ट्रीय औसत से कम रही है।
BJP की मुख्यमंत्री से अपील
BJP नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि वह राज्यपाल की अनुमति लेकर झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएं और 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' के समर्थन में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इसे दोबारा संसद में लाने का आग्रह करें। पत्र में यह भी कहा गया कि यदि मुख्यमंत्री दलगत राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लेते हैं, तो यह झारखंड की आधी आबादी के लिए ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
आगे क्या होगा
अभी तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह माँग सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए राजनीतिक दबाव बनाने की BJP की रणनीति का हिस्सा हो सकती है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब राज्य में अगले चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं।