पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी चुनाव नतीजे आज: 4 मई को सामने आएंगे रुझान
सारांश
Key Takeaways
नई दिल्ली, 4 मई — पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभाओं के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित होने हैं, और शुरुआती रुझान कुछ ही घंटों में स्पष्ट होने लगेंगे। पाँचों क्षेत्रों में अप्रैल माह में संपन्न हुए मतदान के बाद अब करोड़ों मतदाताओं की नज़रें मतगणना केंद्रों पर टिकी हैं।
मतदान कब और कैसे हुआ
असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान संपन्न हुआ था। तमिलनाडु में भी 23 अप्रैल को एकल चरण में वोट डाले गए। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में — 23 अप्रैल और 29 अप्रैल — मतदान हुआ।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की 294 में से 293 सीटों के नतीजे आज घोषित होंगे। फाल्टा सीट पर चुनाव आयोग (ECI) ने पुनर्मतदान का आदेश दिया है, जो 21 मई को होगा और उसके परिणाम 24 मई को आएंगे।
बहुमत के आँकड़े: किसे चाहिए कितनी सीटें
पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों का बहुमत आवश्यक है। असम की 126 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आँकड़ा 64 है। केरल की 140 सीटों वाली विधानसभा में किसी भी दल को सत्ता के लिए 71 सीटें चाहिए।
तमिलनाडु की 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का जादुई आँकड़ा 118 है, जबकि पुडुचेरी की 30 सीटों वाली विधानसभा में मात्र 16 सीटों से सरकार बनाई जा सकती है।
रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत
आँकड़ों के अनुसार, इन सभी क्षेत्रों में इस बार मतदान प्रतिशत उल्लेखनीय रहा। पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक 92.47% मतदान दर्ज किया गया। पुडुचेरी में 89.08%, असम में 85.38%, तमिलनाडु में 85.1% और केरल में 78% मतदान हुआ।
गौरतलब है कि उच्च मतदान प्रतिशत को राजनीतिक विश्लेषक आमतौर पर सत्ताविरोधी लहर या मज़बूत जनाधार वाले दल के पक्ष में संकेत के रूप में देखते हैं, हालाँकि अंतिम निर्णय मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
मतगणना से पूर्व सभी काउंटिंग सेंटरों पर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। पश्चिम बंगाल के सभी मतगणना केंद्रों को हाई-सिक्योरिटी ज़ोन घोषित किया गया है। शांति-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान हिंसा की छिटपुट घटनाओं की खबरें आई थीं, जिससे मतगणना के दिन सुरक्षा की ज़िम्मेदारी और अधिक संवेदनशील हो गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि इन पाँच क्षेत्रों में कौन-सी राजनीतिक शक्ति अगले पाँच वर्षों के लिए सत्ता की बागडोर संभालेगी।