होर्मुज जलडमरूमध्य से 60 दिनों तक शुल्क-मुक्त आवागमन, ईरान-अमेरिका एमओयू के बाद बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
ईरान की शीर्ष सुरक्षा संस्था सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) ने 19 जून 2026 को घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से अगले 60 दिनों तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह निर्णय ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच इलेक्ट्रॉनिक रूप से हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तुरंत बाद आया है। यह घोषणा वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए सबसे संवेदनशील जलमार्गों में से एक पर तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
मुख्य घोषणाएँ और नियम
एसएनएससी के बयान के अनुसार, समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी जहाजों को 60 दिनों की अवधि में पारगमन शुल्क से छूट मिलेगी और इस दौरान होने वाले सभी खर्चों का वहन ईरान सरकार स्वयं करेगी। जलमार्ग से गुजरने के इच्छुक जहाजों को अपने अनुरोध पर्सियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (पीजीएसए) को भेजने होंगे। एसएनएससी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित समुद्री यातायात सुनिश्चित करने और दुर्घटनाओं से बचाव के लिए जहाजों को निर्धारित मार्ग से ही गुजरना होगा और तय समय-सीमा का पालन करना अनिवार्य होगा।
बयान में यह भी कहा गया कि जलडमरूमध्य में यातायात धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से बढ़ाया जाएगा, क्योंकि मार्ग में कुछ सुरक्षा जोखिम अभी भी विद्यमान हैं। तकनीकी और कार्यान्वयन संबंधी विस्तृत दिशानिर्देश पीजीएसए द्वारा अलग से जारी किए जाएंगे।
अमेरिका की शर्तें और वेंस का बयान
समझौते के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने गुरुवार को कहा कि अगले 60 दिन इस समझौते के भविष्य के लिए निर्णायक होंगे। वेंस ने मीडिया से कहा, "60-दिन का समय आज आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को मिलने वाले आर्थिक लाभ केवल वादों पर नहीं, बल्कि सत्यापित कदमों पर निर्भर होंगे।
वेंस ने यह भी बताया कि अमेरिका इस एमओयू को एक स्थायी शांति समझौते में बदलने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर व्यापक चर्चा शामिल होगी। हालाँकि, उन्होंने माना कि दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास के कारण यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे संकरा और सबसे संवेदनशील मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव वर्षों से बना हुआ है और होर्मुज को बंद करने की धमकियाँ समय-समय पर वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों को अस्थिर करती रही हैं।
आगे क्या होगा
यह 60-दिवसीय अवधि ईरान-अमेरिका संबंधों में एक परीक्षण चरण के रूप में देखी जा रही है। यदि इस दौरान दोनों पक्ष एमओयू की शर्तों का पालन करते हैं, तो यह व्यापक और दीर्घकालिक कूटनीतिक समझौते की नींव बन सकती है। पीजीएसए के दिशानिर्देश जारी होने के बाद जहाजरानी कंपनियों को स्पष्ट परिचालन प्रक्रिया मिलेगी, और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार इस घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं।