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जम्मू-कश्मीर सुरक्षा समीक्षा: एलजी मनोज सिन्हा ने एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर दिया जोर

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जम्मू-कश्मीर सुरक्षा समीक्षा: एलजी मनोज सिन्हा ने एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल पर दिया जोर

सारांश

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की, जिसमें सेना, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल और ड्रोन के ज़रिए हथियार तस्करी रोकने पर ध्यान केंद्रित किया गया। जम्मू-कश्मीर में 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर मंथन हुआ।

मुख्य बातें

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 1 सितंबर को श्रीनगर के लोक भवन में उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में भारतीय सेना , जम्मू-कश्मीर पुलिस , खुफिया विभाग और नागरिक प्रशासन के बीच समन्वय मज़बूत करने पर जोर दिया गया।
सुरक्षा बल आतंकवादियों, OGW और उनके समर्थकों के विरुद्ध संयुक्त अभियान चला रहे हैं।
सीमा पार से ड्रोन के ज़रिए हथियार, नशीले पदार्थ और नकदी की तस्करी रोकने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक और ह्यूमन इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है।
एलजी सिन्हा की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत नियमित सुरक्षा समीक्षाओं का क्रम जारी है।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मंगलवार, 1 सितंबर को श्रीनगर के लोक भवन में एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद के पूर्ण उन्मूलन के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वित और केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने पर विशेष बल दिया गया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब जम्मू-कश्मीर में सीमा पार से ड्रोन के ज़रिए हथियार और नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाएँ लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।

बैठक में किन मुद्दों पर हुई चर्चा

इस उच्च-स्तरीय बैठक में मौजूदा सुरक्षा हालात, सुरक्षा बलों की ऑपरेशनल तैयारी और खुफिया सूचना साझाकरण को सुदृढ़ करने की रणनीतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कई सुरक्षा बलों और प्रशासनिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया और उपराज्यपाल को आंतरिक सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा आतंकवाद से जुड़ी उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए किए जा रहे सक्रिय उपायों से अवगत कराया।

एजेंसियों के बीच तालमेल पर जोर

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, खुफिया विभाग और नागरिक प्रशासन जैसी विभिन्न एजेंसियों के बीच परस्पर सहयोग को मज़बूत करने के उपायों पर ज़ोर दिया। गौरतलब है कि सिन्हा नियमित अंतराल पर ऐसी समीक्षा बैठकें आयोजित करते रहे हैं और आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को लगातार दोहराते आए हैं।

आतंकी नेटवर्क को खत्म करने की रणनीति

सुरक्षा बल केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद के समर्थन तंत्र को पूरी तरह नष्ट करने के उद्देश्य से निरंतर अभियान चला रहे हैं। इस रणनीति के तहत आतंकवादियों, उनके ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) और समर्थकों के विरुद्ध संयुक्त ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल जहाँ आंतरिक अभियान संचालित करते हैं, वहीं भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) नियंत्रण रेखा (LOC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए तैनात हैं।

ड्रोन खतरे से निपटने की तैयारी

सीमा पार बैठे आतंकी संचालक जम्मू-कश्मीर में हथियार, गोला-बारूद, नकदी और नशीले पदार्थ पहुँचाने के लिए ड्रोन का व्यापक उपयोग कर रहे हैं। ये सामग्री प्रायः OGW द्वारा एकत्र की जाती है और बाद में सक्रिय आतंकवादियों को सौंपी जाती है। इस खतरे से निपटने के लिए भारतीय सेना और BSF मानव खुफिया तंत्र के साथ-साथ उच्च-तकनीकी एंटी-ड्रोन प्रणाली का भी उपयोग कर रहे हैं।

आगे की दिशा

यह बैठक जम्मू-कश्मीर में बहु-एजेंसी सुरक्षा ढाँचे को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। उपराज्यपाल के नेतृत्व में ऐसी समीक्षाओं का क्रम जारी रहने की संभावना है, क्योंकि केंद्र शासित प्रदेश में स्थायी शांति स्थापित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी ज़मीनी नतीजे हैं। जम्मू क्षेत्र में पिछले दो वर्षों में आतंकी हमलों की बढ़ती संख्या यह सवाल उठाती है कि क्या बहु-एजेंसी तालमेल की बातें व्यावहारिक धरातल पर उतर रही हैं। ड्रोन तकनीक का आतंकी उपयोग एक नई और जटिल चुनौती है जिसके लिए केवल बैठकें नहीं, बल्कि तकनीकी निवेश और सीमा प्रबंधन में संरचनात्मक सुधार की ज़रूरत है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एलजी मनोज सिन्हा ने सुरक्षा समीक्षा बैठक क्यों बुलाई?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में मौजूदा सुरक्षा हालात का जायजा लेने और सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय को मज़बूत करने के उद्देश्य से यह बैठक बुलाई। यह उनकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत नियमित रूप से आयोजित होने वाली समीक्षाओं की कड़ी का हिस्सा है।
जम्मू-कश्मीर में ड्रोन का आतंकी उपयोग कैसे होता है?
सीमा पार बैठे आतंकी संचालक ड्रोन के ज़रिए हथियार, गोला-बारूद, नकदी और नशीले पदार्थ जम्मू-कश्मीर में गिराते हैं, जिन्हें ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) एकत्र कर सक्रिय आतंकवादियों तक पहुँचाते हैं। इसे रोकने के लिए भारतीय सेना और BSF एंटी-ड्रोन तकनीक और मानव खुफिया तंत्र का उपयोग कर रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में कौन-कौन सी सुरक्षा एजेंसियाँ काम करती हैं?
जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीमा सुरक्षा बल (BSF), खुफिया विभाग और नागरिक प्रशासन मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं। BSF और सेना नियंत्रण रेखा (LOC) तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा करती हैं, जबकि पुलिस आंतरिक अभियान चलाती है।
ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) कौन होते हैं?
OGW वे व्यक्ति होते हैं जो सक्रिय आतंकवादी नहीं होते, लेकिन उन्हें रसद, सूचना, हथियार और धन पहुँचाने में सहायता करते हैं। सुरक्षा बल आतंकी नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए आतंकवादियों के साथ-साथ OGW के विरुद्ध भी अभियान चलाते हैं।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा समीक्षा बैठकें कितनी बार होती हैं?
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा नियमित अंतराल पर विभिन्न सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित करते हैं। इनका उद्देश्य सुरक्षा तंत्र की ऑपरेशनल तैयारी का मूल्यांकन करना और उभरती चुनौतियों के अनुरूप रणनीति को अद्यतन करना है।
राष्ट्र प्रेस
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