उच्च शिक्षा परिषद की बैठक: LG मनोज सिन्हा ने जम्मू-कश्मीर में शिक्षा सुधार की व्यापक रणनीति पर दिया जोर
सारांश
Key Takeaways
- उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 24 अप्रैल को लोक भवन, जम्मू में उच्च शिक्षा परिषद की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
- बैठक में जम्मू-कश्मीर के शिक्षा क्षेत्र के समग्र परिवर्तन के लिए व्यापक रणनीतियों पर चर्चा हुई।
- 11 से 22 अप्रैल के बीच जम्मू मंडल में ₹3 करोड़ मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त और ₹1 करोड़ की संपत्तियां कुर्क की गईं।
- 187 ड्राइविंग लाइसेंस, 4 वाहन पंजीकरण रद्द और 15 दवा दुकानों के लाइसेंस निरस्त किए गए।
- 48 नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ वित्तीय जांच शुरू की गई है।
- LG ने नशा तस्करों और आतंकवादियों को एक ही आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा बताते हुए संयुक्त कार्रवाई का निर्देश दिया।
जम्मू, 24 अप्रैल। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार, 24 अप्रैल को लोक भवन, जम्मू में जम्मू-कश्मीर उच्च शिक्षा परिषद की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में केंद्र शासित प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन लाने के लिए व्यापक और दीर्घकालिक रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपराज्यपाल कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इसकी जानकारी साझा की।
उच्च शिक्षा में समग्र परिवर्तन की रणनीति
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बैठक में स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के शिक्षा क्षेत्र को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप ढालना सरकार की प्राथमिकता है। परिषद ने उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता, अनुसंधान क्षमता और रोजगारपरकता बढ़ाने के उद्देश्य से ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया।
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ वर्षों में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं, लेकिन दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यह बैठक उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
नशा तस्करी और आतंकवाद के गठजोड़ पर सख्त चेतावनी
उसी दिन एक अन्य कार्यक्रम में उपराज्यपाल सिन्हा ने पुलिस और सभी प्रवर्तन एजेंसियों को सचेत किया कि नशीले पदार्थों के तस्कर और आतंकवादी एक समन्वित नेटवर्क के रूप में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इन दोनों को अपराध में सहयोगी मानकर एक साथ कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा विशेषज्ञ लंबे समय से यह रेखांकित करते रहे हैं कि नार्को-टेररिज्म जम्मू-कश्मीर में एक गंभीर खतरे के रूप में उभर रहा है। सीमा पार से नशीले पदार्थों की तस्करी के जरिए आतंकी संगठनों को वित्तीय सहायता मिलती है — यह पैटर्न अब खुफिया रिपोर्टों में भी दर्ज है।
नशा विरोधी अभियान के प्रमुख आंकड़े
उपराज्यपाल ने बताया कि 11 अप्रैल से 22 अप्रैल के बीच जम्मू मंडल में नशा विरोधी अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की गई। इस दौरान लगभग ₹3 करोड़ मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए गए और लगभग ₹1 करोड़ मूल्य की चल व अचल संपत्तियां कुर्क की गईं।
इसके अलावा 187 ड्राइविंग लाइसेंस और 4 वाहन पंजीकरण रद्द किए गए। 48 नशीले पदार्थों के तस्करों के खिलाफ वित्तीय जांच शुरू की गई है। 15 दवा दुकानों के लाइसेंस भी रद्द किए गए हैं और तस्करों की संपत्तियों को ध्वस्त किया गया है।
समाज और सामुदायिक भागीदारी का आह्वान
उपराज्यपाल सिन्हा ने गैर सरकारी संगठनों (NGOs), सामाजिक कार्यकर्ताओं, आध्यात्मिक नेताओं और शिक्षकों से इस नशा विरोधी मिशन में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि माताएं और बहनें समाज की नैतिक आधारशिला हैं और उनकी भागीदारी से यह लड़ाई जीती जा सकती है।
उन्होंने एक ऐतिहासिक जन-आंदोलन खड़ा करने की अपील करते हुए कहा कि यह बदलाव घरों, स्कूलों, मोहल्लों और गांवों से शुरू होना चाहिए। उनका यह संदेश स्पष्ट रूप से सरकारी कार्रवाई की सीमाओं को स्वीकार करते हुए सामाजिक जागरूकता को केंद्र में रखता है।
आगे की राह
जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा परिषद की यह बैठक और नशा विरोधी अभियान दोनों मिलकर एक बड़ी तस्वीर प्रस्तुत करते हैं — एक ऐसा केंद्र शासित प्रदेश जो एक साथ शिक्षा सुधार और सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। आने वाले हफ्तों में उच्च शिक्षा परिषद की सिफारिशों को लागू करने की समयसीमा और नशा तस्करी पर वित्तीय जांच के नतीजे इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देंगे।