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ई20 ईंधन भारत की ऊर्जा सुरक्षा की कुंजी: डॉ. माशेलकर ने गिनाए एथेनॉल के फायदे

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ई20 ईंधन भारत की ऊर्जा सुरक्षा की कुंजी: डॉ. माशेलकर ने गिनाए एथेनॉल के फायदे

सारांश

पद्म विभूषण डॉ. माशेलकर ने ई20 एथेनॉल को भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की कुंजी बताया — ब्राजील के 30-40 साल के अनुभव का हवाला देते हुए। साथ ही मेथेनॉल, सीबीजी और ग्रीन हाइड्रोजन को भी अनिवार्य बताया और बंजर भूमि पर ऊर्जा फसलों से नए विकल्प तलाशने का सुझाव दिया।

मुख्य बातें

रघुनाथ अनंत माशेलकर ने 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में ई20 एथेनॉल कार्यक्रम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम बताया।
ब्राजील में 30-40 वर्षों से वाहन एथेनॉल पर चल रहे हैं — इसे उन्होंने व्यवहारिकता का प्रमाण बताया।
पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए उन्होंने भारत को आयातित ऊर्जा पर निर्भरता घटाने की अपील की।
एथेनॉल के अलावा मेथेनॉल, डीएमई, सीबीजी और ग्रीन हाइड्रोजन को भी स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण में शामिल करने का सुझाव दिया।
बंजर और अर्ध-बंजर भूमि पर नेपियर घास जैसी ऊर्जा फसलें उगाकर सीबीजी और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संभव — खाद्य भूमि पर दबाव नहीं।

पद्म विभूषण से सम्मानित著名 वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ अनंत माशेलकर ने 14 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कहा कि एथेनॉल-मिश्रित ई20 पेट्रोल वैश्विक स्तर पर एक सिद्ध परिवहन ईंधन है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने में इसकी भूमिका निर्णायक हो सकती है। वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के पूर्व महानिदेशक ने ब्राजील के दशकों पुराने एथेनॉल अनुभव का हवाला देते हुए भारत को कच्चे तेल की आयात-निर्भरता से मुक्त होने का आग्रह किया।

ब्राजील का अनुभव: एथेनॉल की व्यवहारिकता का प्रमाण

रॉयल सोसाइटी के फेलो और केमिकल इंजीनियर डॉ. माशेलकर ने कहा, "ब्राजील में पिछले 30-40 वर्षों से वाहन एथेनॉल पर चल रहे हैं। यह अनुभव बताता है कि एथेनॉल एक व्यवहारिक ईंधन है।" उनके अनुसार ब्राजील का यह मॉडल भारत के लिए एक सुस्थापित रोडमैप प्रस्तुत करता है, जिसे अपनाकर भारत अपनी परिवहन ऊर्जा ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा घरेलू स्रोतों से पूरा कर सकता है।

भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ज़रूरत

पश्चिम एशिया में हालिया भू-राजनीतिक तनाव का संदर्भ देते हुए डॉ. माशेलकर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बाधाएं यह स्पष्ट संकेत देती हैं कि भारत को घरेलू स्तर पर उत्पादित वैकल्पिक ईंधनों को तेज़ी से अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें आत्मनिर्भर बनना होगा। हमें अपना ईंधन खुद तैयार करना चाहिए। आयातित ऊर्जा पर निर्भरता किसी भी देश को वैश्विक संघर्षों और आपूर्ति में व्यवधान जैसी परिस्थितियों के प्रति अधिक संवेदनशील बना देती है।"

केवल एथेनॉल नहीं — स्वच्छ ईंधनों का व्यापक पोर्टफोलियो

एथेनॉल का समर्थन करते हुए भी डॉ. माशेलकर ने एकल-ईंधन निर्भरता के प्रति सावधान किया। उन्होंने मेथेनॉल, डाइमेथाइल ईथर (डीएमई), कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) और बायोमास-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन को भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिश्रण का अनिवार्य हिस्सा बताया। उन्होंने स्पष्ट किया, "मैं केवल एथेनॉल की बात नहीं कर रहा हूँ। हमें इन सभी वैकल्पिक ईंधनों पर ध्यान देना होगा।"

बायोमास: स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का प्रमुख फीडस्टॉक

डॉ. माशेलकर ने बायोमास को भारत के ऊर्जा परिवर्तन की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा, "सूरज की ऊर्जा से ही बायोमास का उत्पादन होता है। इस कारण बायोमास हमारा प्रमुख फीडस्टॉक होना चाहिए, जिससे हम विभिन्न प्रकार के ईंधन तैयार कर सकें।" उन्होंने यह भी सुझाया कि बंजर और अर्ध-बंजर भूमि पर नेपियर घास जैसी ऊर्जा फसलें उगाकर सीबीजी और ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है — और इससे खाद्यान्न उत्पादन वाली कृषि भूमि पर कोई दबाव नहीं पड़ेगा।

आगे की राह

डॉ. माशेलकर के ये विचार ऐसे समय में आए हैं जब भारत सरकार अपने ई20 एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करने की दिशा में सक्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल, बायोगैस और ग्रीन हाइड्रोजन के समन्वित उपयोग से भारत अपनी कच्चे तेल की आयात लागत में उल्लेखनीय कमी ला सकता है और ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम गन्ना-केंद्रित रहेगा या विविध बायोमास स्रोतों तक विस्तृत होगा — क्योंकि गन्ने पर अत्यधिक निर्भरता जल-संकट और खाद्य-ईंधन प्रतिस्पर्धा को जन्म दे सकती है। ब्राजील का मॉडल प्रेरक है, परंतु वहाँ की कृषि-भौगोलिक परिस्थितियाँ भारत से भिन्न हैं। बंजर भूमि पर ऊर्जा फसलों का सुझाव दिशा सही है, किंतु इसके लिए भूमि-अधिकार, सिंचाई और आपूर्ति-शृंखला की ठोस नीति अभी भी अनुत्तरित है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई20 ईंधन क्या है और यह सामान्य पेट्रोल से कैसे अलग है?
ई20 वह पेट्रोल है जिसमें 20% एथेनॉल मिलाया जाता है। यह मिश्रण कच्चे तेल की खपत घटाता है, कार्बन उत्सर्जन कम करता है और घरेलू कृषि-आधारित एथेनॉल उत्पादन को प्रोत्साहन देता है।
डॉ. माशेलकर ने ब्राजील का उदाहरण क्यों दिया?
ब्राजील में पिछले 30-40 वर्षों से वाहन एथेनॉल पर चल रहे हैं, जो इस ईंधन की दीर्घकालिक व्यवहारिकता का सिद्ध प्रमाण है। डॉ. माशेलकर ने इसे भारत के लिए एक अनुकरणीय मॉडल बताया।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एथेनॉल क्यों ज़रूरी है?
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, जिससे वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर पड़ता है। एथेनॉल जैसे घरेलू ईंधन इस निर्भरता को कम कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाते हैं।
डॉ. माशेलकर ने एथेनॉल के अलावा और कौन-से ईंधन सुझाए?
उन्होंने मेथेनॉल, डाइमेथाइल ईथर ( डीएमई ), कंप्रेस्ड बायोगैस ( सीबीजी ) और बायोमास-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन को भारत के स्वच्छ ऊर्जा पोर्टफोलियो का अनिवार्य हिस्सा बताया।
बंजर भूमि पर ऊर्जा फसलों का क्या महत्व है?
डॉ. माशेलकर के अनुसार बंजर और अर्ध-बंजर भूमि पर नेपियर घास जैसी ऊर्जा फसलें उगाकर सीबीजी और ग्रीन हाइड्रोजन तैयार किया जा सकता है। इससे खाद्यान्न उत्पादन वाली कृषि भूमि पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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