15 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बांग्लादेश आईसीटी का बड़ा फैसला: 68 दोषियों में 22 को मौत की सजा, शेख हसीना भी शामिल

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बांग्लादेश आईसीटी का बड़ा फैसला: 68 दोषियों में 22 को मौत की सजा, शेख हसीना भी शामिल

सारांश

बांग्लादेश के आईसीटी ने 2024 के छात्र विद्रोह में हुई हिंसा पर अब तक का सबसे बड़ा फैसला सुनाया — 68 दोषियों में 22 को मौत की सजा। शेख हसीना समेत अवामी लीग के शीर्ष नेता और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दोषी करार दिए गए, जिनमें 18 अभी भी फरार हैं।

मुख्य बातें

बांग्लादेश आईसीटी ने 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़े 7 मामलों में 68 लोगों को सजा सुनाई, जिनमें 22 को मौत की सजा दी गई।
मंगलवार के ताज़ा फैसले में अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर समेत 7 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई।
दोषियों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल शामिल हैं, जिन पर 17 नवंबर को गैर-मौजूदगी में मुकदमा चला था।
मौत की सजा पाने वाले 22 में से 18 फरार हैं; 4 हिरासत में हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, 2024 के विद्रोह में 1,400 से अधिक लोग मारे गए थे और अवामी लीग पर बाद में प्रतिबंध लगा दिया गया।
फरवरी 2026 में हुए चुनावों में तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में आई।

बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित हत्या, उकसावे और साजिश से जुड़े सात मामलों में अब तक 68 लोगों को सजा सुनाई है, जिनमें से 22 को मौत की सजा दी गई है। 15 सितंबर 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन दोषियों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और अवामी लीग के कई शीर्ष नेता शामिल हैं।

ताज़ा फैसला और दोषी

मंगलवार को आए ताज़ा फैसले में अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर समेत छह अन्य व्यक्तियों को मौत की सजा सुनाई गई। बांग्लादेश बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, मौत की सजा पाने वाले 22 लोगों में से 18 फरार हैं, जबकि 4 हिरासत में हैं।

दोषियों में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल, अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं। मौत की सजा पाने वाले 11 लोग अवामी लीग या उससे संबद्ध संगठनों से जुड़े हैं, जबकि शेष 11 पुलिस अधिकारी हैं।

पहले की सज़ाएँ और गैर-मौजूदगी में मुकदमे

शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को पिछले वर्ष 17 नवंबर को मौत की सजा सुनाई गई थी — और यह मुकदमा उनकी गैर-मौजूदगी में चलाया गया था, ठीक वैसे ही जैसे मंगलवार के फैसले में छह दोषियों पर हुआ।

वहीं, पूर्व इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून, जो सरकारी गवाह बन गए थे, को पाँच साल की जेल की सजा मिली। मौत की सजा पाने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों में ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) के पूर्व कमिश्नर, पूर्व संयुक्त कमिश्नर सुदीप कुमार चक्रवर्ती और तत्कालीन अतिरिक्त डिप्टी पुलिस कमिश्नर शाह आलम मोहम्मद अख्तरुल इस्लाम शामिल हैं। इसके अलावा, पाँच अन्य पुलिस अधिकारियों को तीन से छह साल तक की सज़ा सुनाई गई है।

2024 का छात्र आंदोलन: पृष्ठभूमि

2024 के जुलाई-अगस्त में छात्रों के नेतृत्व में हुए विद्रोह ने हसीना के दशकों लंबे राजनीतिक दबदबे को चुनौती दी। भ्रष्टाचार, शिक्षा व्यवस्था की विफलता और तानाशाही शासन के खिलाफ उठे इस आंदोलन में हज़ारों लोग सड़कों पर उतरे। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने अर्धसैनिक बलों और वास्तविक गोलियों का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की।

पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, इस विद्रोह में अनुमानित 1,400 से अधिक लोग मारे गए और देश का राजनीतिक परिदृश्य बदल गया। इसके बाद अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि शेख हसीना बदले की कार्रवाई के भय से देश छोड़कर चली गईं।

आईसीटी की भूमिका और संशोधित अधिकार-क्षेत्र

बांग्लादेश का इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) एक घरेलू युद्ध अपराध न्यायाधिकरण है, जिसे 2009 में 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान किए गए नरसंहार के संदिग्धों पर मुकदमा चलाने के लिए स्थापित किया गया था। न्यायाधिकरण ने 2010 में पहली बार आरोप तय किए थे।

यह ऐसे समय में आया है जब नवंबर 2024 में आईसीटी अधिनियम में अहम संशोधन किए गए — न्यायाधिकरण के अधिकार-क्षेत्र को आधुनिक बनाने और उसका दायरा बढ़ाने के लिए इन्हें पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया। गौरतलब है कि 2024 के छात्र विद्रोह के बाद इस ट्रिब्यूनल की भूमिका की फिर से समीक्षा की गई, और राज्य की हिंसा तथा बड़े पैमाने पर अत्याचार के नए आरोपों को इसके दायरे में लाया गया।

नई सरकार और राजनीतिक बदलाव

इस वर्ष फरवरी 2026 में बांग्लादेश में हुए आम चुनावों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में आई। यह राजनीतिक बदलाव उस ऐतिहासिक उथल-पुथल का परिणाम है जो 2024 के छात्र आंदोलन के बाद देश में आई। आने वाले समय में इन मामलों की अपीलें और फरार दोषियों के प्रत्यर्पण के प्रयास बांग्लादेश की न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया की अगली बड़ी परीक्षा होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

अब अवामी लीग के शीर्ष नेता। यह एक गहरा प्रश्न खड़ा करता है: क्या यह संस्था वास्तव में न्याय की रक्षक है, या सत्ता-परिवर्तन के बाद विजेताओं का हथियार बन जाती है? गैर-मौजूदगी में मुकदमे और 18 फरार दोषी यह भी दर्शाते हैं कि फैसले की प्रतीकात्मक ताकत से अधिक, क्रियान्वयन की चुनौती कहीं बड़ी है। भारत के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि शेख हसीना भारत में शरण लिए हुई हैं और ढाका उनके प्रत्यर्पण की मांग कर सकता है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश आईसीटी ने 2024 छात्र आंदोलन मामले में किन्हें सजा सुनाई?
बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) ने 2024 के छात्र आंदोलन से जुड़ी हिंसा के सात मामलों में कुल 68 लोगों को सजा सुनाई है, जिनमें 22 को मौत की सजा दी गई। दोषियों में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल, अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
शेख हसीना को कब और किस आरोप में मौत की सजा मिली?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 17 नवंबर 2024 को मौत की सजा सुनाई गई थी। यह मुकदमा उनकी गैर-मौजूदगी में चलाया गया, क्योंकि वे 2024 के छात्र विद्रोह के बाद देश छोड़कर चली गई थीं। उन पर कथित हत्या, उकसावे और साजिश के आरोप हैं।
2024 का बांग्लादेश छात्र आंदोलन क्या था?
जुलाई-अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्रों ने भ्रष्टाचार, शिक्षा व्यवस्था की विफलता और तानाशाही शासन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए। पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, इस विद्रोह में 1,400 से अधिक लोग मारे गए। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया गया।
बांग्लादेश का इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) क्या है?
आईसीटी एक घरेलू न्यायाधिकरण है, जिसे 2009 में 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान हुए नरसंहार के संदिग्धों पर मुकदमा चलाने के लिए स्थापित किया गया था। नवंबर 2024 में इस अधिनियम में संशोधन कर इसके अधिकार-क्षेत्र को आधुनिक बनाया गया और 2024 के छात्र विद्रोह में हुई हिंसा के मामलों को भी इसके दायरे में लाया गया।
मौत की सजा पाने वाले फरार दोषियों का क्या होगा?
रिपोर्टों के अनुसार, मौत की सजा पाने वाले 22 लोगों में से 18 अभी फरार हैं। उनके खिलाफ प्रत्यर्पण प्रक्रिया बांग्लादेश सरकार की अगली बड़ी चुनौती होगी। शेख हसीना के भारत में होने की खबरें हैं, जो भारत-बांग्लादेश के बीच एक संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 9 महीने पहले
  2. 9 महीने पहले
  3. 9 महीने पहले
  4. 10 महीने पहले
  5. 10 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 1 साल पहले