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बाब-अल-मंदेब विवाद: भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर दिया जोर, हूतियों ने जलडमरूमध्य बंद करने से किया इनकार

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बाब-अल-मंदेब विवाद: भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर दिया जोर, हूतियों ने जलडमरूमध्य बंद करने से किया इनकार

सारांश

बाब-अल-मंदेब पर बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्रता पर जोर दिया। हूतियों ने जलडमरूमध्य बंद करने से इनकार करते हुए प्रतिबंध केवल सऊदी जहाजों तक सीमित बताए और दो तेल टैंकरों पर मिसाइल व ड्रोन हमले का दावा किया।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 24 जुलाई को कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री मार्ग खुले रहने चाहिए।
हूती प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुल सलाम ने बाब-अल-मंदेब बंद होने की खबरों को खारिज किया; प्रतिबंध केवल सऊदी अरब से जुड़े जहाजों पर।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरेआ ने दावा किया कि लाल सागर में 'एन्सेलिया' और 'लैला' नामक दो सऊदी तेल टैंकरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया।
हूतियों का कहना है कि यह कदम सऊदी अरब की कथित घेराबंदी के जवाब में उठाया गया है।
बाब-अल-मंदेब वैश्विक व्यापार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है।

विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार, 24 जुलाई को स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत वैश्विक समुद्री मार्गों पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही का अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बयान बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव और यमन के हूती समूह द्वारा सऊदी अरब से जुड़े जहाजों पर लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों की पृष्ठभूमि में आया है।

भारत का आधिकारिक रुख

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, 'जहाँ तक व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और समुद्री रास्तों पर आने-जाने के अधिकार का सवाल है, भारत हमेशा यही कहता है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग खुले रहने चाहिए। यह दुनिया के व्यापार, वैश्विक आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास जो भी घटनाएँ हो रही हैं, उन्हें हम इसी नजरिए से देखते हैं।' जायसवाल का यह बयान इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली लाल सागर क्षेत्र में किसी भी एकतरफा समुद्री नाकेबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध मानता है।

हूतियों का स्पष्टीकरण: जलडमरूमध्य बंद नहीं

हूती समूह के मुख्य वार्ताकार और प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुल सलाम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक बयान जारी करते हुए उन खबरों को सिरे से खारिज किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग यह प्रचार कर रहे हैं कि बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट बंद कर दिया गया है, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। हमारी कार्रवाई सिर्फ सऊदी अरब से जुड़े जहाजों पर लागू होती है।' अब्दुल सलाम के अनुसार, यह कदम हूती-नियंत्रित इलाकों पर सऊदी अरब की अगुवाई वाली कथित 'घेराबंदी' के जवाब में और यमन की जनता की सुरक्षा, संप्रभुता एवं स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मुख्य घटनाक्रम: प्रतिबंध और हमले

रिपोर्टों के अनुसार, सोमवार को हूती समूह ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों पर समुद्री प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था। समूह का तर्क था कि सऊदी अरब लंबे समय से हूती-नियंत्रित क्षेत्रों की नाकेबंदी कर रहा है। इसके बाद गुरुवार को हूती समूह ने दावा किया कि उसने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों'एन्सेलिया' और 'लैला' — को सैन्य कार्रवाई में निशाना बनाया। हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरेआ ने समूह के अल-मसीरा टीवी पर प्रसारित बयान में कहा कि इन जहाजों पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया। सरेआ ने दावा किया कि हमलों के बाद दोनों टैंकरों में आग लग गई और अभियान सफल रहा। हालाँकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

वैश्विक व्यापार पर असर

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अत्यंत संवेदनशील केंद्र है, जहाँ से प्रतिवर्ष अरबों डॉलर का माल और कच्चा तेल गुजरता है। यह जलमार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यूरोप तथा एशिया के बीच व्यापार के लिए सबसे छोटा समुद्री रास्ता है। गौरतलब है कि भारत की ऊर्जा आपूर्ति और निर्यात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए नई दिल्ली की इस मुद्दे पर गहरी रुचि स्वाभाविक है। यह ऐसे समय में आया है जब लाल सागर में हूती हमलों के कारण वैश्विक शिपिंग कंपनियाँ पहले से ही वैकल्पिक मार्गों की तलाश में हैं।

आगे की स्थिति

फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हूती समूह ने स्पष्ट किया है कि उसके प्रतिबंध केवल सऊदी अरब से संबद्ध जहाजों तक सीमित हैं, लेकिन इस क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियाँ वैश्विक शिपिंग उद्योग के लिए अनिश्चितता का माहौल बना रही हैं। भारत समेत तमाम देशों की नजरें इस जलडमरूमध्य पर टिकी हैं, और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मुक्त नौवहन की माँग तेज होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी धार सीधे हूती कार्रवाइयों पर है — बिना किसी पक्ष का नाम लिए। असली सवाल यह है कि जब भारतीय ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला इसी मार्ग पर निर्भर है, तो क्या केवल 'अंतरराष्ट्रीय कानून' का हवाला पर्याप्त है? लाल सागर में हूती हमलों के कारण पहले से ही शिपिंग लागत बढ़ चुकी है और वैकल्पिक मार्गों पर निर्भरता बढ़ी है। भारत की निष्क्रिय राजनयिक भाषा और उसके ठोस आर्थिक हितों के बीच का यह अंतर्विरोध आने वाले समय में और स्पष्ट होगा।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य विवाद क्या है?
बाब-अल-मंदेब लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। हूती समूह ने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों पर समुद्री प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है।
भारत ने इस विवाद पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 24 जुलाई को कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री मार्ग खुले रहने चाहिए और यह वैश्विक व्यापार, आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। भारत बाब-अल-मंदेब की घटनाओं को इसी दृष्टिकोण से देखता है।
हूतियों ने क्या प्रतिबंध लगाए हैं और क्या जलडमरूमध्य बंद है?
हूती प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुल सलाम ने स्पष्ट किया कि बाब-अल-मंदेब बंद नहीं है। उनके अनुसार, प्रतिबंध केवल सऊदी अरब से संबद्ध जहाजों तक सीमित है, जो सऊदी अरब की कथित घेराबंदी के जवाब में लगाया गया है।
हूतियों ने किन जहाजों पर हमला किया?
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरेआ ने दावा किया कि गुरुवार को लाल सागर में 'एन्सेलिया' और 'लैला' नामक दो सऊदी तेल टैंकरों पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया गया। दावा है कि हमलों के बाद दोनों टैंकरों में आग लग गई, हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इस विवाद का भारत पर क्या असर पड़ सकता है?
बाब-अल-मंदेब से भारत का महत्वपूर्ण ऊर्जा आयात और व्यापारिक निर्यात गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी व्यवधान से भारत की ऊर्जा सुरक्षा और शिपिंग लागत प्रभावित हो सकती है, इसीलिए भारत ने मुक्त नौवहन के अधिकार पर जोर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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