बेमेतरा सीएमएचओ डॉ. रोहलेडर निलंबित: महिला स्वास्थ्य अधिकारियों से अभद्र व्यवहार के आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट
सारांश
मुख्य बातें
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अमृतलाल रोहलेडर को राज्य शासन ने 15 सितंबर 2026 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने यह कार्रवाई महिला सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ अशोभनीय टिप्पणी, अभद्र भाषा के प्रयोग और अनुचित स्पर्श से संबंधित गंभीर शिकायतों की जांच पूरी होने के बाद की है।
जांच में क्या सामने आया
शिकायत मिलने के बाद संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए। जांच प्रतिवेदन में डॉ. रोहलेडर के विरुद्ध अनुचित भाषा के प्रयोग और अनुचित स्पर्श से संबंधित आरोप प्रथम दृष्टया पुष्ट पाए गए। जांच अधिकारी ने उनके विरुद्ध विधिवत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की थी, जिसके आधार पर यह निलंबन लागू हुआ।
स्वास्थ्य मंत्री की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे संवेदनशील और मर्यादित आचरण बनाए रखें। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति, चाहे किसी भी पद पर हो, नियमों और मर्यादाओं से ऊपर नहीं है।
मंत्री ने यह भी कहा कि विभाग में भयमुक्त, सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा व सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
निलंबन की शर्तें और कानूनी आधार
राज्य शासन ने डॉ. रोहलेडर को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबित किया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, जगदलपुर संभाग-बस्तर निर्धारित किया गया है। वे सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
आम जनता और स्वास्थ्यकर्मियों पर असर
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकारी विभागों में जागरूकता बढ़ रही है। गौरतलब है कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ होती हैं और उनके कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करना स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए भी अनिवार्य है।
आगे की कार्रवाई
प्रथम दृष्टया आरोप पुष्ट होने के बाद अब विधिवत विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अधिकारियों के अनुसार, मामले में नियमानुसार सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इस निर्णय से राज्य के अन्य जिलों में भी ऐसी शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर एक स्पष्ट संदेश गया है।