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सेमीकॉन इंडिया 2026: दुनिया के 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवर भारत में — एस. कृष्णन

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सेमीकॉन इंडिया 2026: दुनिया के 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवर भारत में — एस. कृष्णन

सारांश

सेमीकॉन इंडिया 2026 के समापन पर MeitY सचिव एस. कृष्णन का बड़ा दावा — दुनिया के 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवर भारत में हैं और 85,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का अभियान चल रहा है। 500 से अधिक प्रदर्शकों और एशियाई देशों की भारी भागीदारी ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

कृष्णन ने कहा — दुनिया के लगभग 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवर भारत में कार्यरत हैं।
सरकार वर्तमान में 85,000 डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम चला रही है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में 500 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया; पहले दिन 12,000 और दूसरे दिन 16,000 आगंतुक पहुँचे।
जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर और मलेशिया के प्रतिनिधिमंडलों ने मज़बूत उपस्थिति दर्ज कराई।
कृष्णन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन से दिए जाने वाले प्रोत्साहन से पहले प्रत्येक निवेश प्रस्ताव का कड़ा मूल्यांकन किया जाएगा।
ICEA चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि भारत ने केवल पाँच वर्षों में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'सेमीकॉन इंडिया 2026' के समापन दिवस पर कहा कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रतिभा का प्रमुख केंद्र बन चुका है और दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवर इस समय भारत में कार्यरत हैं। तीन दिवसीय इस सम्मेलन के अंतिम सत्र में उद्योग जगत के दिग्गजों ने एकमत से माना कि भारत की प्रतिभा क्षमता और सरकार की स्थिर नीतियाँ वैश्विक निवेशकों को देश की ओर आकर्षित कर रही हैं।

कौशल विकास: सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

एस. कृष्णन ने कहा, 'सेमीकंडक्टर क्षेत्र में कौशल विकास सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में से एक है।' उन्होंने बताया कि सरकार ने डिजाइन प्रतिभा को विकसित करने पर विशेष जोर दिया है और वर्तमान में लगभग 85,000 डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का कार्यक्रम सक्रिय रूप से चलाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि कुछ कंपनियों ने अपने पायलट कौशल विकास कार्यक्रमों में भारत को अन्य देशों की तुलना में बेहतर परिणाम देने वाला देश बताया है।

निवेश प्रस्तावों का होगा कड़ा मूल्यांकन

कृष्णन ने स्पष्ट किया कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आने वाले प्रत्येक निवेश प्रस्ताव का गहन मूल्यांकन किया जाएगा, क्योंकि इसमें सरकार की ओर से महत्वपूर्ण प्रोत्साहन राशि शामिल होती है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन का उपयोग होने के कारण सरकार सावधानीपूर्वक परीक्षण के बाद ही प्रोत्साहन स्वीकृत करेगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैश्विक कंपनियाँ भारत में निवेश के इच्छुक होने के पीछे दो प्रमुख कारण हैं — 'भारत की मज़बूत प्रतिभा क्षमता और सरकार की स्थिर एवं सहयोगी नीतियाँ।'

सेमीकॉन इंडिया 2026 की अभूतपूर्व भागीदारी

इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) के चेयरमैन पंकज मोहिंद्रू ने कहा कि इस वर्ष सम्मेलन को मिली प्रतिक्रिया उम्मीदों से कहीं बेहतर रही है। उन्होंने बताया कि 500 से अधिक प्रदर्शकों की भागीदारी और दुनिया भर से आए उद्योग प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को अभूतपूर्व बना दिया। मोहिंद्रू ने रेखांकित किया कि भारत ने केवल पिछले पाँच वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है और हर साल सेमीकॉन इंडिया का दायरा एवं वैश्विक प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

एशियाई देशों की मज़बूत उपस्थिति, युवाओं में उत्साह

सेमी इंडिया और इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) के सीईओ और अध्यक्ष अशोक के. चंदक ने बताया कि जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर और मलेशिया की कंपनियाँ और प्रतिनिधिमंडल बड़ी संख्या में सम्मेलन में शामिल हुए। जापान, सिंगापुर और मलेशिया के कंट्री पवेलियन भी लगाए गए और विभिन्न देशों के साथ विशेष राउंडटेबल चर्चाएँ आयोजित हुईं।

चंदक ने आगंतुकों की संख्या का हवाला देते हुए कहा, 'पहले दिन कुल 12,000 आगंतुक आए, दूसरे दिन 16,000 और आज भी यह सिलसिला जारी है।' उन्होंने यह भी बताया कि छात्रों की उत्साहजनक भागीदारी यह दर्शाती है कि युवा पीढ़ी सेमीकंडक्टर क्षेत्र में करियर के प्रति गंभीर है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की होड़ में भारत को एक प्रमुख विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह आँकड़ा डिजाइन सेंटर में कार्यरत इंजीनियरों की गिनती करता है, न कि स्वतंत्र IP या फैब क्षमता का। भारत के पास डिजाइन इंजीनियर हैं, पर विनिर्माण संयंत्रों की शुरुआत अभी नवजात अवस्था में है — और यही असली चुनौती है। 85,000 इंजीनियरों के प्रशिक्षण कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये प्रतिभाएँ भारतीय कंपनियों में रहती हैं या बहुराष्ट्रीय R&D केंद्रों में। जब तक निवेश प्रस्तावों के मूल्यांकन की समयसीमा और पारदर्शी मानदंड सार्वजनिक नहीं किए जाते, 'कड़े परीक्षण' की घोषणा महज आश्वासन बनी रहेगी।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन इंडिया 2026 क्या है और इसका क्या महत्व है?
सेमीकॉन इंडिया 2026 नई दिल्ली में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमीकंडक्टर सम्मेलन है, जिसमें 500 से अधिक प्रदर्शकों और जापान, ताइवान, दक्षिण कोरिया सहित कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया। यह आयोजन भारत की सेमीकंडक्टर नीति और निवेश रणनीति का प्रमुख वार्षिक मंच है।
भारत में कितने सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवर हैं?
MeitY सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, दुनिया के लगभग 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन पेशेवर भारत में कार्यरत हैं। यह आँकड़ा भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन प्रतिभा के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बनाता है।
सरकार 85,000 डिजाइन इंजीनियरों को कैसे प्रशिक्षित कर रही है?
MeitY के तहत एक सक्रिय कौशल विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत लगभग 85,000 सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। कुछ कंपनियों ने भारत के पायलट कार्यक्रमों को अन्य देशों की तुलना में बेहतर परिणाम देने वाला बताया है।
सेमीकंडक्टर निवेश प्रस्तावों का मूल्यांकन कैसे होगा?
एस. कृष्णन ने स्पष्ट किया कि चूँकि प्रोत्साहन में सार्वजनिक धन शामिल है, इसलिए प्रत्येक निवेश प्रस्ताव का गहन परीक्षण किया जाएगा और उसके बाद ही प्रोत्साहन राशि स्वीकृत होगी। सरकार ने तत्काल प्रोत्साहन देने के बजाय सावधानीपूर्वक मूल्यांकन को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई है।
सेमीकॉन इंडिया 2026 में किन देशों की भागीदारी उल्लेखनीय रही?
IESA के सीईओ अशोक के. चंदक के अनुसार, इस वर्ष जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, सिंगापुर और मलेशिया की कंपनियों और प्रतिनिधिमंडलों की भागीदारी विशेष रूप से मज़बूत रही। जापान, सिंगापुर और मलेशिया के कंट्री पवेलियन लगाए गए और विशेष राउंडटेबल चर्चाएँ भी आयोजित हुईं।
राष्ट्र प्रेस
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