सेमीकॉन इंडिया 2026: 68 जापानी कंपनियाँ भारत में मैन्युफैक्चरिंग-रिसर्च प्लान को दे रहीं अंतिम रूप — वैष्णव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 18 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 के जापानी पवेलियन में कहा कि इस शिखर सम्मेलन में भाग ले रही 68 जापानी कंपनियाँ भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च और साझेदारी योजनाओं को अंतिम रूप दे रही हैं। यह आयोजन भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
जापानी पवेलियन के दौरे के दौरान वैष्णव ने कहा, 'इस कार्यक्रम में 30 से अधिक देश भाग ले रहे हैं। अभी हम जापानी पवेलियन में हैं जहाँ 68 जापानी कंपनियाँ हैं और भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च प्लान और साझेदारों को लेकर योजनाओं को अंतिम रूप दे रही हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस आयोजन को लेकर युवाओं में जबरदस्त ऊर्जा देखने को मिल रही है और यह देश के युवाओं के लिए बड़ी संख्या में उच्च-कौशल रोज़गार के अवसर पैदा कर रहा है।
NIT राउरकेला की स्वदेशी चिप: गर्व का क्षण
आयोजन में एक विशेष आकर्षण रहा — ओडिशा के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला के छात्रों द्वारा विकसित स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप। वैष्णव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि यह चिप भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के टैलेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत तैयार की गई है। उन्होंने इस चिप को मीडिया के समक्ष भी प्रस्तुत किया और बताया कि छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष भी इस पर एक प्रभावशाली प्रेजेंटेशन दी।
ओडिशा सरकार की प्रतिक्रिया
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 'मेड-इन-इंडिया' सेमीकंडक्टर चिप्स के बीच NIT राउरकेला की स्वदेशी डिज़ाइन को देखकर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'यह हर ओडिया के लिए बेहद गर्व का क्षण है और हमारे संस्थानों की प्रतिभा, इनोवेशन और रिसर्च क्षमताओं का प्रमाण है।' माझी ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के समर्पित प्रयासों से भारत एक मज़बूत और आत्मनिर्भर सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
आम जनता और युवाओं पर असर
सेमीकॉन इंडिया 2026 की इस भागीदारी का सीधा असर भारतीय युवाओं पर पड़ने की संभावना है। वैष्णव के अनुसार, इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर उच्च-कौशल रोज़गार सृजित हो रहे हैं, जो इंजीनियरिंग, चिप डिज़ाइन, फैब्रिकेशन और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में करियर के नए द्वार खोलेंगे। गौरतलब है कि सेमीकंडक्टर उद्योग वैश्विक स्तर पर सबसे तेज़ी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल है और भारत इसमें अपनी हिस्सेदारी मज़बूत करने में जुटा है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार सेमीकंडक्टर मिशन के तहत घरेलू चिप उत्पादन और डिज़ाइन क्षमता को तेज़ी से विस्तार देने में लगी है। 30 से अधिक देशों की भागीदारी यह संकेत देती है कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका अब केवल बाज़ार के रूप में नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्र के रूप में भी स्वीकार की जा रही है। आने वाले महीनों में जापानी कंपनियों की मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च योजनाओं के ठोस रूप लेने की उम्मीद है।