18 सितंबर 2026
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एफएसएसएआई ने नेस्ले इंडिया के शिशु पोषण उत्पादों पर दर्ज किए तीन कानूनी मामले, NAN और Lactogen पर उठे सवाल

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एफएसएसएआई ने नेस्ले इंडिया के शिशु पोषण उत्पादों पर दर्ज किए तीन कानूनी मामले, NAN और Lactogen पर उठे सवाल

सारांश

एफएसएसएआई ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन कानूनी मामले दर्ज किए — NAN Excella Pro और Lactogen Pro 1 पर भ्रामक दावों और एक फॉलो-अप फॉर्मूला में बायोटिन मानक उल्लंघन को लेकर। शिशु आहार के प्रचार पर भारतीय कानून की पकड़ कितनी सख्त है, यह मामला उसकी अग्नि-परीक्षा बन सकता है।

मुख्य बातें

एफएसएसएआई ने 18 सितंबर 2026 को नेस्ले इंडिया के खिलाफ शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े तीन न्यायनिर्णयन मामले दर्ज किए।
NAN Excella Pro Stage 1 पर '5 HMOs' और 'व्हे प्रोटीन' दावों को लेकर आपत्ति; Lactogen Pro 1 पर 'आसानी से पचने योग्य' दावे पर सवाल।
एक फॉलो-अप फॉर्मूला में दो अलग प्रयोगशाला परीक्षणों में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
कार्रवाई का आधार खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण) विनियम, 2020 का नियम 4(2) और IMS अधिनियम, 1992 की धारा 3 है।
अभी तक कोई अंतिम जुर्माना नहीं लगाया गया; मामले न्यायनिर्णयन प्रक्रिया में हैं।
खबर प्रकाशित होने तक नेस्ले इंडिया ने स्टॉक एक्सचेंजों को कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 18 सितंबर 2026 को घोषणा की कि उसने नेस्ले इंडिया के शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े कथित नियामकीय उल्लंघनों के मद्देनज़र तीन अलग-अलग न्यायनिर्णयन (एडजुडिकेशन) मामले दायर किए हैं। इन मामलों में NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 जैसे प्रमुख शिशु फॉर्मूला उत्पाद शामिल हैं। यह कार्रवाई भारत के शिशु आहार क्षेत्र में नियामकीय निगरानी के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मामले का पूरा विवरण

नियामक ने अपनी जाँच के दौरान ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सूचीबद्ध इन उत्पादों और उनसे जुड़ी प्रचार सामग्री की समीक्षा की। NAN Excella Pro Stage 1 के संदर्भ में एफएसएसएआई ने उत्पाद पर किए जाने वाले '5 HMOs' और 'व्हे प्रोटीन' से जुड़े दावों पर आपत्ति जताई। वहीं Lactogen Pro 1 के मामले में व्हे प्रोटीन को 'आसानी से पचने योग्य' बताए जाने वाले दावे पर प्रश्नचिह्न लगाया गया।

गौरतलब है कि एफएसएसएआई ने इन दावों के संबंध में पहले नेस्ले इंडिया से स्पष्टीकरण माँगा था। जाँच पूरी होने के बाद नियामक ने पाया कि ये उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 के नियम 4(2) का उल्लंघन करते हैं, जो शिशु आहार उत्पादों की बिक्री बढ़ाने हेतु किए जाने वाले प्रचार और दावों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाता है।

कानूनी आधार

एफएसएसएआई ने अपनी कार्रवाई में इन्फेंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स, फीडिंग बॉटल्स एंड इन्फेंट फूड्स (उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 3 का भी हवाला दिया है, जो ऐसे उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार पर प्रतिबंध लगाती है। यह ऐसे समय में आया है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और घरेलू स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार शिशु फॉर्मूला के भ्रामक विपणन के खिलाफ आवाज़ उठाते रहे हैं।

बायोटिन मानक उल्लंघन का मामला

तीसरे मामले में एफएसएसएआई ने कहा कि नेस्ले इंडिया द्वारा निर्मित एक फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने में प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। संदेह की पुष्टि के लिए नमूने को एक रेफरल प्रयोगशाला भेजा गया, जहाँ दोबारा परीक्षण में भी यही निष्कर्ष सामने आया — कि उत्पाद खाद्य पदार्थ (शिशु पोषण) विनियम, 2020 के तहत निर्धारित बायोटिन मानकों को पूरा नहीं करता।

नेस्ले इंडिया की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति

रिपोर्टों के अनुसार, खबर प्रकाशित होने तक नेस्ले इंडिया की ओर से इस नोटिस पर स्टॉक एक्सचेंजों को कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी। यह भी उल्लेखनीय है कि नियामक के नोटिस में अभी तक किसी अंतिम जुर्माने का उल्लेख नहीं है — ये मामले फिलहाल न्यायनिर्णयन प्रक्रिया में हैं। आगे की सुनवाई में ही तय होगा कि नेस्ले इंडिया पर क्या दंडात्मक कार्रवाई होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे उपभोक्ता हित को व्यावहारिक सुरक्षा नहीं मिल पाती। नेस्ले का मौन भी खुद में एक संकेत है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएसएसएआई ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
एफएसएसएआई ने नेस्ले इंडिया के शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े कथित नियामकीय उल्लंघनों को लेकर तीन अलग-अलग न्यायनिर्णयन मामले दर्ज किए हैं। इनमें NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 पर भ्रामक दावों के मामले और एक फॉलो-अप फॉर्मूला में बायोटिन मानक उल्लंघन का मामला शामिल है।
NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 पर क्या आपत्ति है?
NAN Excella Pro Stage 1 पर '5 HMOs' और 'व्हे प्रोटीन' से जुड़े दावों पर एफएसएसएआई ने सवाल उठाए हैं। Lactogen Pro 1 के मामले में व्हे प्रोटीन को 'आसानी से पचने योग्य' बताने वाले दावे पर आपत्ति दर्ज की गई है। दोनों उत्पाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण) विनियम, 2020 के नियम 4(2) का उल्लंघन करते पाए गए।
बायोटिन मानक उल्लंघन का मामला क्या है?
नेस्ले इंडिया के एक फॉलो-अप फॉर्मूला के नमूने में प्रयोगशाला परीक्षण में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानकों से कम पाई गई। इसकी पुष्टि के लिए नमूने को रेफरल प्रयोगशाला भेजा गया, जहाँ दोबारा परीक्षण में भी यही परिणाम आया।
क्या नेस्ले इंडिया पर कोई जुर्माना लगाया गया है?
अभी तक नेस्ले इंडिया पर कोई अंतिम जुर्माना नहीं लगाया गया है। ये तीनों मामले फिलहाल न्यायनिर्णयन प्रक्रिया में हैं। खबर प्रकाशित होने तक नेस्ले इंडिया ने स्टॉक एक्सचेंजों को भी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
शिशु फॉर्मूला के प्रचार पर भारत में क्या कानून है?
भारत में इन्फेंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स, फीडिंग बॉटल्स एंड इन्फेंट फूड्स (उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 3 शिशु आहार उत्पादों के विज्ञापन और प्रचार पर रोक लगाती है। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा एवं मानक (शिशु पोषण) विनियम, 2020 का नियम 4(2) बिक्री बढ़ाने के उद्देश्य से किए जाने वाले दावों पर भी प्रतिबंध लगाता है।
राष्ट्र प्रेस
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