14 अगस्त 2026
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एनएचआरसी ने 'एनालॉग पनीर' पर एफएसएसएआई और राज्यों को नोटिस, दो हफ्ते में माँगी रिपोर्ट

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एनएचआरसी ने 'एनालॉग पनीर' पर एफएसएसएआई और राज्यों को नोटिस, दो हफ्ते में माँगी रिपोर्ट

सारांश

पारंपरिक दूध-पनीर की आड़ में बिक रहे 'एनालॉग पनीर' पर एनएचआरसी ने सख्त रुख अपनाया है — एफएसएसएआई और सभी राज्यों को दो हफ्ते में जवाब देना होगा। मामला उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार और खाद्य सुरक्षा मानकों की खामियों पर सीधा सवाल उठाता है।

मुख्य बातें

एनएचआरसी ने 14 अगस्त 2026 को 'एनालॉग पनीर' पर एफएसएसएआई और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया।
संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली बेंच ने नियामकीय स्थिति, पोषण मूल्य और परीक्षण पद्धतियों पर स्पष्टीकरण माँगा।
मामला एडवांस्ड स्टडी इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया (एएसआईए) , स्वास्थ्य समता केंद्र की शिकायत पर दर्ज हुआ।
एनएचआरसी ने उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार को भी प्रमुख मुद्दा माना; उत्पाद की स्पष्ट लेबलिंग पर सवाल उठाए।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 14 अगस्त 2026 को बाज़ार में पारंपरिक दूध-पनीर के विकल्प के रूप में बिक रहे 'एनालॉग पनीर' के नियामकीय, पोषण और खाद्य सुरक्षा पहलुओं पर गंभीर चिंता जताते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) तथा सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने संबंधित पक्षों को दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामला क्या है

आयोग सदस्य प्रियंक कानूनगो के नेतृत्व वाली बेंच के समक्ष यह मामला एडवांस्ड स्टडी इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया (एएसआईए), स्वास्थ्य समता केंद्र की शिकायत के आधार पर आया। शिकायत के साथ 'एनालॉग पनीर इन इंडिया: ए फूड-सिस्टम्स थ्रेट टू हेल्थ इक्विटी' नामक रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई थी। एनएचआरसी ने इस रिपोर्ट और शिकायत में उठाए गए मुद्दों की विस्तृत जाँच आवश्यक मानी है।

एफएसएसएआई से माँगी गई जानकारी

बेंच ने एफएसएसएआई से एनालॉग पनीर की मौजूदा नियामकीय स्थिति, उसकी संरचना के लिए लागू मानक, पोषण मूल्य, संभावित स्वास्थ्य प्रभाव और परीक्षण पद्धतियों पर स्पष्टीकरण माँगा है। आयोग ने विशेष रूप से यह मूल सवाल उठाया है कि जब किसी उत्पाद की संरचना पारंपरिक दूध-पनीर से पर्याप्त रूप से भिन्न हो, तो उसे पनीर के विकल्प के रूप में बनाने और बेचने की अनुमति देने का नियामकीय आधार क्या है।

एनएचआरसी ने दूध से बने पनीर और वनस्पति तेल, वसा तथा अन्य गैर-दुग्ध घटकों से तैयार उत्पादों के बीच अंतर करने वाली वैज्ञानिक परीक्षण पद्धतियों की जानकारी भी माँगी है, जिसमें बीटा-सिटोस्टेरोल की भूमिका और प्रासंगिकता भी शामिल है।

राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से माँगा ब्यौरा

आयोग ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों से एनालॉग पनीर के निर्माण, आपूर्ति, बिक्री और खाद्य प्रतिष्ठानों में इसके परोसे जाने की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। उनसे निरीक्षण, सैंपलिंग, सामने आए उल्लंघनों और की गई प्रवर्तन कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा भी माँगा गया है।

उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार पर जोर

एनएचआरसी ने उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार को इस मामले का महत्वपूर्ण पहलू माना है। बेंच जानना चाहती है कि क्या उपभोक्ताओं को ऐसे उत्पादों की पहचान, वास्तविक संरचना और पोषण संबंधी विशेषताओं के बारे में स्पष्ट व पर्याप्त जानकारी दी जा रही है, ताकि वे खरीद और सेवन को लेकर सूचित निर्णय ले सकें। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में खाद्य मिलावट और उपभोक्ता संरक्षण को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।

आगे क्या होगा

एफएसएसएआई और राज्यों की रिपोर्ट मिलने के बाद एनएचआरसी अगली सुनवाई में आगे की कार्रवाई तय करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इस जाँच के परिणाम एनालॉग पनीर की लेबलिंग और बिक्री के नियमों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी इसकी लेबलिंग और संरचना पर कोई स्पष्ट मानक नहीं है — यह उपभोक्ता संरक्षण की बड़ी विफलता है। असली सवाल यह है कि क्या एफएसएसएआई की रिपोर्ट केवल कागज़ी कार्रवाई बनकर रह जाएगी या इससे ठोस नियामकीय सुधार होंगे। बिना बाध्यकारी लेबलिंग नियम और स्वतंत्र परीक्षण व्यवस्था के, यह नोटिस भी पिछले खाद्य सुरक्षा मामलों की तरह अनुत्तरित रह सकता है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनालॉग पनीर क्या होता है?
एनालॉग पनीर वह उत्पाद है जो दूध की जगह वनस्पति तेल, वसा और अन्य गैर-दुग्ध घटकों से तैयार किया जाता है और पारंपरिक दूध-पनीर के विकल्प के रूप में बेचा जाता है। इसकी संरचना असली पनीर से पर्याप्त रूप से भिन्न होती है, जिससे पोषण मूल्य और स्वास्थ्य प्रभाव अलग हो सकते हैं।
एनएचआरसी ने एनालॉग पनीर पर नोटिस क्यों जारी किया?
एनएचआरसी ने एडवांस्ड स्टडी इंस्टीट्यूट ऑफ एशिया (एएसआईए), स्वास्थ्य समता केंद्र की शिकायत के आधार पर संज्ञान लिया, जिसमें एनालॉग पनीर को स्वास्थ्य समता के लिए खतरा बताया गया था। आयोग ने पाया कि इसके नियामकीय और पोषण पहलुओं पर विस्तृत जाँच ज़रूरी है।
एफएसएसएआई और राज्यों को कितने समय में रिपोर्ट देनी होगी?
एनएचआरसी ने एफएसएसएआई और सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों को दो सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
एनएचआरसी ने उपभोक्ताओं के किस अधिकार पर ध्यान दिलाया है?
आयोग ने उपभोक्ताओं के सूचना के अधिकार को महत्वपूर्ण मुद्दा माना है। बेंच जानना चाहती है कि क्या उपभोक्ताओं को एनालॉग पनीर की वास्तविक संरचना और पोषण संबंधी विशेषताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जा रही है, ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें।
बीटा-सिटोस्टेरोल का एनालॉग पनीर से क्या संबंध है?
बीटा-सिटोस्टेरोल एक वनस्पति-आधारित यौगिक है जो असली दूध-पनीर में नहीं पाया जाता, लेकिन वनस्पति तेल से बने एनालॉग पनीर में मौजूद हो सकता है। एनएचआरसी ने एफएसएसएआई से इसकी भूमिका और प्रासंगिकता स्पष्ट करने को कहा है, ताकि दोनों उत्पादों की वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित हो सके।
राष्ट्र प्रेस
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