2 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एफएसएसएआई का बड़ा एक्शन: रेड बुल, पेप्सिको, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को 'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर नोटिस

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एफएसएसएआई का बड़ा एक्शन: रेड बुल, पेप्सिको, कैम्पा समेत कई ब्रांड्स को 'एनर्जी ड्रिंक' दावों पर नोटिस

सारांश

एफएसएसएआई ने रेड बुल, पेप्सिको, कैम्पा और मॉन्स्टर समेत प्रमुख बेवरेज ब्रांड्स को नोटिस भेजकर साफ कर दिया है — भारतीय कानून में 'एनर्जी ड्रिंक' का कोई मान्य मानक नहीं है। यह कदम तेज़ी से बढ़ते एनर्जी ड्रिंक बाज़ार पर नियामकीय शिकंजे की शुरुआत हो सकता है।

मुख्य बातें

एफएसएसएआई ने 2 जुलाई 2026 को रेड बुल , पेप्सिको इंडिया (एड्रेनालिन रश, स्टिंग), कैम्पा , मॉन्स्टर एनर्जी और हेल एनर्जी को नोटिस जारी किए।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत 'एनर्जी ड्रिंक' के लिए कोई परिभाषित मानक मौजूद नहीं है।
ब्रांड्स पर आरोप है कि उन्होंने एनर्जी बढ़ाने, फोकस सुधारने जैसे कार्यात्मक या चिकित्सीय दावे किए जो कानूनन अनुमत नहीं हैं।
जून 2026 में भी एफएसएसएआई ने कई फूड बिजनेस ऑपरेटर्स को गुमराह करने वाली लेबलिंग पर नोटिस भेजे थे।
ब्रांड्स को अपना पक्ष रखना होगा; उल्लंघन साबित होने पर लेबलिंग बदलाव या कानूनी कार्रवाई संभव।

भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 2 जुलाई 2026 को रेड बुल, पेप्सिको इंडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड, कैम्पा, मॉन्स्टर एनर्जी और हेल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड सहित कई बड़े बेवरेज ब्रांड्स को औपचारिक नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस उनके उत्पादों पर 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द के इस्तेमाल और कथित तौर पर गुमराह करने वाले स्वास्थ्य दावों को लेकर भेजे गए हैं। नियामक का कहना है कि मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत ऐसे उत्पादों के लिए कोई मान्यता प्राप्त मानक तय नहीं किया गया है।

किन ब्रांड्स को मिला नोटिस

एफएसएसएआई ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया कि नोटिस पाने वाले ब्रांड्स में रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, हेल एनर्जी (हेल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड), कैम्पा एनर्जी ड्रिंक, मॉन्स्टर एनर्जी, और पेप्सिको इंडिया के उत्पाद एड्रेनालिन रश तथा स्टिंग शामिल हैं। इन सभी पर गलत ब्रांडिंग और लेबलिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

क्या है कानूनी आधार

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 और उसके अंतर्गत बने नियमों तथा विनियमों में 'एनर्जी ड्रिंक्स' या समकक्ष उत्पादों के लिए कोई परिभाषित मानक मौजूद नहीं है। एफएसएसएआई ने यह भी स्पष्ट किया कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (फूड प्रोडक्ट्स स्टैंडर्ड्स एंड फूड एडिटिव्स) रेगुलेशन, 2011 के तहत 'फूड कैटेगरी सिस्टम' का उपयोग किसी उत्पाद का नाम रखने या लेबलिंग के उद्देश्य से नहीं किया जाना चाहिए।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में एनर्जी ड्रिंक का बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है और इन उत्पादों की मार्केटिंग युवाओं को लक्षित करती है, जिससे नियामकीय निगरानी की माँग लंबे समय से उठती रही है।

किन दावों पर है आपत्ति

एफएसएसएआई के अनुसार, इन ब्रांड्स ने अपने उत्पादों की लेबलिंग और मार्केटिंग में ऐसे दावे किए जो कार्यात्मक या चिकित्सीय लाभ का संकेत देते हैं — जैसे एनर्जी लेवल बढ़ाना, फोकस बेहतर करना, शरीर और दिमाग को ताजगी देना, मानसिक उत्तेजना, सामान्य कमज़ोरी में सहायता आदि। नियामक का कहना है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत खाद्य उत्पादों के लिए ऐसे दावों की अनुमति नहीं है।

पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एफएसएसएआई ने इस क्षेत्र में सख्त रुख अपनाया हो। जून 2026 में भी नियामक ने कई फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (एफबीओ) को गुमराह करने वाले दावों, ब्रांडिंग और लेबलिंग उल्लंघनों तथा उपभोक्ता शिकायतों के आधार पर नोटिस जारी किए थे और सुधार के निर्देश दिए थे। ये ताज़ा नोटिस उसी अभियान की अगली कड़ी हैं।

आगे क्या होगा

नोटिस पाने वाले ब्रांड्स को एफएसएसएआई के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। यदि उल्लंघन साबित होता है, तो नियामक उत्पादों की लेबलिंग में बदलाव का आदेश दे सकता है या आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत में एनर्जी ड्रिंक सेगमेंट के लिए स्पष्ट नियामकीय ढाँचा बनाने की प्रक्रिया तेज़ हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह उस नियामकीय शून्य को उजागर करती है जिसमें अरबों रुपये का एनर्जी ड्रिंक उद्योग वर्षों से फल-फूल रहा है। जब तक 'एनर्जी ड्रिंक' की कोई कानूनी परिभाषा नहीं थी, ब्रांड्स ने इसी अस्पष्टता का फायदा उठाया। असली सवाल यह है कि क्या एफएसएसएआई अब एक स्पष्ट मानक ढाँचा बनाएगा, या केवल नोटिस भेजकर अनुपालन का भ्रम बनाए रखेगा। नोटिस के बाद ठोस नियामकीय मानक न आए तो यह कार्रवाई महज़ प्रतीकात्मक साबित होगी।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएसएसएआई ने रेड बुल और पेप्सिको को नोटिस क्यों भेजा?
एफएसएसएआई ने इन ब्रांड्स को 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द के इस्तेमाल और उत्पाद लेबल पर कथित तौर पर गुमराह करने वाले स्वास्थ्य दावों के कारण नोटिस भेजा है। नियामक का कहना है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत ऐसे दावों की अनुमति नहीं है।
भारत में 'एनर्जी ड्रिंक' के लिए क्या कोई कानूनी मानक है?
नहीं। एफएसएसएआई के अनुसार, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 और उसके अंतर्गत बने नियमों में 'एनर्जी ड्रिंक्स' के लिए कोई परिभाषित मानक तय नहीं किया गया है। यही इन नोटिसों का मुख्य आधार है।
किन उत्पादों को नोटिस मिला है?
नोटिस पाने वाले उत्पादों में रेड बुल एनर्जी ड्रिंक, हेल एनर्जी, कैम्पा एनर्जी ड्रिंक, मॉन्स्टर एनर्जी, और पेप्सिको इंडिया के एड्रेनालिन रश तथा स्टिंग शामिल हैं।
इन ब्रांड्स पर किस तरह के दावे करने का आरोप है?
एफएसएसएआई का आरोप है कि इन ब्रांड्स ने एनर्जी लेवल बढ़ाने, फोकस सुधारने, मानसिक उत्तेजना और सामान्य कमज़ोरी में मदद जैसे कार्यात्मक या चिकित्सीय लाभ के दावे किए, जो मौजूदा खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अनुमत नहीं हैं।
नोटिस के बाद इन ब्रांड्स पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
नोटिस पाने वाले ब्रांड्स को एफएसएसएआई के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा। उल्लंघन साबित होने पर नियामक लेबलिंग में बदलाव का आदेश दे सकता है या आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले