एफएसएसएआई की कार्रवाई: ओल्ड मोंक, मैकडॉवेल्स समेत कई ब्रांड्स पर फर्जी फ्लेवर और 'ऐज' दावों का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने ओल्ड मोंक रम, मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की और कई अन्य प्रमुख शराब ब्रांड्स के खिलाफ बिक्री-प्रतिबंध के आदेश जारी किए हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 3 अगस्त 2026 को जारी बयान में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई उत्पाद लेबल पर भ्रामक 'ऐज' दावों और नियमों के विरुद्ध बाहरी फ्लेवरिंग पदार्थों के इस्तेमाल के कारण की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच में पाया गया कि कुछ निर्माता मुख्यतः स्पिरिट या एक्स्ट्रा-न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) से पेय तैयार कर रहे थे और फिर उनमें बाहरी आर्टिफिशियल या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर मिलाकर उन्हें रम या व्हिस्की जैसा स्वाद दे रहे थे। मंत्रालय के अनुसार, ऐसे उत्पाद न केवल घटिया गुणवत्ता के हैं, बल्कि उन्हें 'स्टैंडर्ड कैटेगरी' के नाम से बेचना उपभोक्ताओं को गुमराह करना भी है।
लैब परीक्षण रिपोर्टों का हवाला देते हुए मंत्रालय ने बताया कि इन फ्लेवर के मिश्रण से उत्पाद का प्राकृतिक स्वाद छिप जाता है, जो 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (अल्कोहलिक बेवरेजेज) रेगुलेशंस, 2018' के तहत उन्हें 'सब-स्टैंडर्ड' की श्रेणी में डालता है।
किन इकाइयों पर लगा प्रतिबंध
एफएसएसएआई ने लैब रिपोर्टों के आधार पर निम्नलिखित इकाइयों के उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाई है:
— मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर की खोपोली यूनिट
— यूनाइटेड स्पिरिट्स की बारामती फैसिलिटी
— आईएनबीआरईडब्ल्यू बेवरेजेज, मध्य प्रदेश
— एसोसिएटेड अल्कोहल एंड ब्रुअरीज, मध्य प्रदेश
— यूनाइटेड स्पिरिट्स की एक अन्य मध्य प्रदेश यूनिट
प्रभावित ब्रांड्स में ओल्ड मोंक रम के विभिन्न प्रकार, मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम, बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की, ओल्ड कास्क डीलक्स XXX रम, एंटीक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्की शामिल हैं।
'7 साल पुरानी' का दावा और नियामक स्थिति
सरकार ने 'ओल्ड मोंक XXX रम' के एक वेरिएंट पर '7 साल पुरानी ब्लेंडेड' होने के दावे को विशेष रूप से भ्रामक बताया। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 2018 के अल्कोहलिक बेवरेजेज रेगुलेशंस के अनुसार, ब्लेंडेड स्पिरिट की उम्र का दावा उस ब्लेंड में मौजूद सबसे कम उम्र वाली स्पिरिट के आधार पर ही किया जा सकता है।
गौरतलब है कि कॉफी और वैनिला जैसे फ्लेवरिंग पदार्थों की अनुमति तब होती है जब कानूनी प्रावधान हो और कोई उचित तकनीकी कारण हो। लेकिन मौजूदा मामले में आरोप यह है कि रम में रम-जैसा और व्हिस्की में व्हिस्की-जैसा फ्लेवर बाहर से मिलाया गया — जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
जाँच का दायरा
गोवा में मैंडेक्सी डिस्टिलरीज एंड ब्रुअरीज में भी जाँच और सैंपलिंग की गई है। इसके अलावा महाराष्ट्र में छह अन्य निर्माताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई पूरी शराब इंडस्ट्री के खिलाफ नहीं है — कई निर्माता निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पादन कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आई है जब उपभोक्ता संरक्षण और खाद्य लेबलिंग की पारदर्शिता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
बिक्री-प्रतिबंध के बाद संबंधित कंपनियों को नियामक प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से अल्कोहलिक बेवरेज सेगमेंट में लेबलिंग मानकों की व्यापक समीक्षा का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।