एफएसएसएआई ने एवरेस्ट और लालजी गोधू की मिश्रित हींग पर लगाया देशव्यापी प्रतिबंध, गुणवत्ता मानकों में गंभीर चूक उजागर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 29 अगस्त 2026 को देश के दो प्रमुख मसाला ब्रांड — एम/एस एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस लालजी गोधू एंड कंपनी — की कम्पाउंडेड (मिश्रित) हींग की बिक्री और वितरण पर देशभर में प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत की गई यह कार्रवाई तब सामने आई जब प्रयोगशाला परीक्षणों में दोनों कंपनियों के हींग उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध केवल हींग उत्पादों तक सीमित है और अन्य मसाला उत्पाद इससे अप्रभावित हैं।
मामले की शुरुआत कैसे हुई
इस कार्रवाई की नींव एक उपभोक्ता की शिकायत से पड़ी, जिसने हींग की गुणवत्ता को लेकर एफएसएसएआई के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही प्राधिकरण ने बाज़ार में उपलब्ध विभिन्न हींग ब्रांडों की व्यापक जाँच शुरू की। शुरुआती प्रयोगशाला परीक्षणों में एवरेस्ट और लालजी गोधू की कम्पाउंडेड हींग गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
इसके बाद दोनों कंपनियों की मुंबई स्थित केंद्रीय लाइसेंस प्राप्त निर्माण इकाइयों से नमूने लेकर विस्तृत परीक्षण कराया गया। इसके साथ ही गुजरात के उमरगांव स्थित एवरेस्ट की एक अन्य विनिर्माण इकाई पर राज्य खाद्य सुरक्षा विभाग के सहयोग से भी सैंपलिंग की गई।
जाँच में क्या मिला
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, कम्पाउंडेड हींग में कम से कम 5 प्रतिशत अल्कोहल-सॉल्युबल एक्सट्रैक्ट होना अनिवार्य है, जो असली हींग की उपस्थिति का प्रमुख संकेतक माना जाता है। जाँच में पाया गया कि दोनों कंपनियों के उत्पादों में यह मात्रा केवल 0 से 3 प्रतिशत के बीच थी — यानी निर्धारित न्यूनतम सीमा से भी काफी नीचे।
इसके अलावा, लालजी गोधू एंड कंपनी की इकाई से प्राप्त शुद्ध हींग की छह अलग-अलग किस्मों का भी परीक्षण किया गया। नियमों के अनुसार शुद्ध हींग में स्टार्च की मात्रा 1 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन इन नमूनों में स्टार्च की मात्रा 15 प्रतिशत से 32 प्रतिशत तक पाई गई — जो निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उत्पाद में मिलावट या गंभीर गुणवत्ता संबंधी कमी का संकेत है।
एफएसएसएआई की कार्रवाई और निर्देश
इन गंभीर अनियमितताओं के मद्देनज़र एफएसएसएआई ने दोनों कंपनियों की कम्पाउंडेड हींग की बिक्री और वितरण पर देशभर में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। प्राधिकरण ने दोनों कंपनियों को यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे इन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठा रही हैं और भविष्य में उत्पादों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कैसे बनाएंगी।
साथ ही, प्राधिकरण ने कंपनियों को बाज़ार में उपलब्ध संबंधित बैचों को स्वेच्छा से वापस मंगाने पर विचार करने की सलाह दी है, ताकि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह ध्यान देने योग्य है कि प्रतिबंध केवल हींग उत्पादों पर है — गरम मसाला, अंडा करी मसाला या चिकन करी मसाला जैसे अन्य उत्पाद इस आदेश से अप्रभावित हैं।
उपभोक्ताओं पर असर और सलाह
यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर देशभर में उपभोक्ता जागरूकता बढ़ रही है। एफएसएसएआई ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय लाइसेंस, लेबलिंग और गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर ध्यान दें तथा किसी भी संदिग्ध उत्पाद की शिकायत संबंधित अधिकारियों को करें।
गौरतलब है कि एफएसएसएआई लगातार ऐसे उत्पादों की निगरानी कर रहा है जो निर्धारित मानकों का पालन नहीं करते। इस मामले में त्वरित कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि खाद्य गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
आगे क्या होगा
दोनों कंपनियों को अब प्राधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा और सुधारात्मक कदमों का ब्यौरा देना होगा। जब तक उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते, तब तक बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध जारी रहेगा। यह कार्रवाई भारत में खाद्य नियामक निगरानी के बढ़ते दायरे और उपभोक्ता संरक्षण के प्रति प्राधिकरण की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।