एफएसएसएआई ने एवरेस्ट की कंपाउंडेड हींग पर लगाया प्रतिबंध, चिकन मसाला और गरम मसाला में भी लेबलिंग उल्लंघन
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने 29 अगस्त को एवरेस्ट फ़ूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की सभी वैरिएंट वाली कंपाउंडेड हींग की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया, क्योंकि जांच में उत्पाद 'मिसब्रांडेड' और 'सब-स्टैंडर्ड' पाए गए। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत जारी निषेध आदेश के ज़रिये की गई है। इसी क्रम में मेसर्स लालजी गोधू एंड कंपनी की कंपाउंडेड हींग के निर्माण और बिक्री पर भी अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है।
एवरेस्ट हींग में क्या मिली गड़बड़ी
एफएसएसएआई की जांच में सामने आया कि एवरेस्ट की कंपाउंडेड हींग में अल्कोहल में घुलनशील अर्क शून्य (0.00%) पाया गया, जबकि खाद्य मानकों के अनुसार यह कम-से-कम 5 प्रतिशत होना अनिवार्य है। पीले हींग पाउडर में यह मात्रा 3.29 प्रतिशत और काले हींग पाउडर में 4.40 प्रतिशत पाई गई — दोनों ही निर्धारित सीमा से कम।
प्राधिकरण के अनुसार, नियमित बाज़ार निगरानी के दौरान विभिन्न स्थानों से लिए गए नमूनों में लगातार यही कमी दर्ज की गई, जिसके बाद सभी वैरिएंट की कंपाउंडेड हींग की बिक्री पर एकसाथ रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
चिकन मसाला और गरम मसाला में लेबलिंग उल्लंघन
एफएसएसएआई की पूर्व अनुपालन समीक्षा में एवरेस्ट के कुछ अन्य मसाला उत्पादों में भी खामियाँ उजागर हुईं। चिकन मसाला, गरम मसाला और एग करी पाउडर के लेबल पर 5 प्रतिशत से अधिक नमक की मात्रा घोषित नहीं की गई थी और मसालों का सही अनुपात भी अंकित नहीं था, जो खाद्य मानकों का उल्लंघन है। हालांकि, एफएसएसएआई का वर्तमान प्रतिबंध केवल कंपाउंडेड हींग तक सीमित है; इन मसाला उत्पादों पर अभी बिक्री-रोक नहीं लगाई गई है।
लालजी गोधू एंड कंपनी पर कार्रवाई
मेसर्स लालजी गोधू एंड कंपनी की कंपाउंडेड हींग — पाउडर और लंप (ठोस) दोनों रूपों में — सब-स्टैंडर्ड और मिलावटी पाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण में इस्तेमाल की गई कच्ची हींग की कई किस्मों में स्टार्च की मात्रा निर्धारित 1 प्रतिशत की सीमा से अधिक थी। इसके आधार पर कंपनी के उत्पादन और बिक्री, दोनों पर तत्काल रोक लगाई गई।
आगे क्या होगा
एफएसएसएआई ने दोनों कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे मानकों के अनुरूप उत्पाद बनाने और बेचने के लिए सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करें। यदि संतोषजनक जवाब या अनुपालन नहीं मिला, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब देश में खाद्य मिलावट और लेबलिंग उल्लंघन के मामलों पर नियामक निगरानी लगातार कड़ी हो रही है।