क्या नॉन-वेज खाने पर एनएचआरसी का सख्त रुख भारतीय रेलवे के लिए समस्या बन सकता है?

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क्या नॉन-वेज खाने पर एनएचआरसी का सख्त रुख भारतीय रेलवे के लिए समस्या बन सकता है?

सारांश

भारतीय रेलवे में नॉन-वेज भोजन पर एनएचआरसी का सख्त रुख क्या यात्रियों के लिए नई समस्याएं खड़ी कर सकता है? जानें इस विवाद के पीछे की सच्चाई और आयोग के निर्देशों के प्रभाव के बारे में।

Key Takeaways

  • एनएचआरसी का सख्त रुख यात्रियों की धार्मिक स्वतंत्रता पर जोर देता है।
  • रेलवे बोर्ड को चार हफ्ते में नई एटीआर पेश करने का आदेश दिया गया है।
  • हलाल और झटका मांस परोसने वाले ठेकेदारों की जानकारी का खुलासा अनिवार्य किया गया है।

नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भारतीय रेल में परोसे जाने वाले नॉन-वेज भोजन को लेकर उठे विवाद पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने रेलवे बोर्ड, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) और पर्यटन मंत्रालय से दोबारा विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) की मांग की है।

यह मामला 21 नवंबर 2025 को दर्ज कराई गई एक शिकायत से संबंधित है, जिस पर आयोग ने 5 जनवरी 2026 को सुनवाई की।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि भारतीय रेल और आईआरसीटीसी द्वारा केवल हलाल तरीके से तैयार किया गया मांस परोसा जा रहा है। इससे न केवल यात्रियों की खाने की पसंद और धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है, बल्कि यह हिंदू अनुसूचित जाति (एससी) समुदायों के उन लोगों के रोजगार और आजीविका पर भी असर डालता है, जो पारंपरिक रूप से मांस व्यापार से जुड़े रहे हैं।

शिकायत में कहा गया कि इस व्यवस्था से हिंदू और सिख यात्रियों को उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप भोजन का विकल्प नहीं मिलता, जो संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19(1)(जी), 21 और 25 का उल्लंघन है।

24 नवंबर को आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में एनएचआरसी ने इस मामले में संज्ञान लिया था और रेलवे बोर्ड को दो हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था।

इसके बाद आईआरसीटीसी ने 10 दिसंबर को रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि उसके पास कोई ऐसी नीति नहीं है, जिसमें हलाल प्रमाणन अनिवार्य हो और वह केवल एफएसएसएआई के मानकों का पालन करता है।

हालांकि, एनएचआरसी ने इस रिपोर्ट को अधूरी और पारदर्शिता से रहित बताया। आयोग ने कहा कि यात्रियों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि वे जो नॉन-वेज भोजन खा रहे हैं, वह हलाल है या झटका। यदि केवल हलाल मांस परोसा जाता है, तो इससे गैर-मुस्लिम समुदायों के रोजगार अवसर सीमित हो सकते हैं।

आयोग ने सिख रीहत मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि बपतिस्मा प्राप्त सिखों के लिए मुस्लिम तरीके से काटे गए जानवर का मांस खाना वर्जित है। ऐसे में जानकारी का खुलासा जरूरी है। आईआरसीटीसी की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-से ठेकेदार हलाल, झटका या दोनों तरह का मांस परोस रहे हैं।

आयोग ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह चार हफ्ते के भीतर नई एटीआर दाखिल करे, जिसमें सभी रेलवे स्टेशनों, ट्रेनों, होटलों और रेस्टोरेंट्स में भोजन सप्लाई करने वाले ठेकेदारों की सूची हो और यह भी स्पष्ट किया जाए कि वे हलाल, झटका या दोनों प्रकार का मांस परोसते हैं।

इसके साथ ही, एफएसएसएआई को अपने गुणवत्ता मानकों में इस विषय को शामिल करने और पर्यटन मंत्रालय को होटल स्टार रेटिंग और वर्गीकरण में मांस काटने की विधि के खुलासे से जुड़े प्रावधान जोड़ने पर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। एनएचआरसी ने साफ किया है कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता, समानता और यात्रियों की स्वतंत्रता को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

--आईएएएनएस

वीकेयू/एबीएम

Point of View

बल्कि यह समाज के विभिन्न वर्गों के लिए रोजगार के अवसरों पर भी प्रभाव डालता है। आयोग का सख्त रुख यह दर्शाता है कि यात्रियों की स्वतंत्रता और उनकी पसंद का सम्मान किया जाना चाहिए।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

एनएचआरसी ने रेलवे से क्या मांगा है?
एनएचआरसी ने रेलवे बोर्ड, एफएसएसएआई और पर्यटन मंत्रालय से नई एटीआर की मांग की है, जिसमें सभी ठेकेदारों की जानकारी होनी चाहिए।
क्या नॉन-वेज भोजन परोसा जा रहा है?
आरोप है कि केवल हलाल मांस परोसा जा रहा है, जिससे कुछ समुदायों की धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन होता है।
आयोग का क्या कहना है?
आयोग ने कहा है कि यात्रियों को यह जानने का अधिकार है कि वे क्या खा रहे हैं और पारदर्शिता को बनाए रखना आवश्यक है।
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