एफएसएसएआई का बड़ा फैसला: एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर राष्ट्रीय प्रतिबंध का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने 24 सितंबर 2026 को देशभर में एनालॉग पनीर के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है। खाद्य नियामक ने इस उद्देश्य से एक मसौदा संशोधन जारी किया है और 60 दिनों के भीतर सार्वजनिक तथा उद्योग जगत से सुझाव आमंत्रित किए हैं। यह कदम उस बढ़ती चिंता के बीच उठाया गया है जिसमें वनस्पति तेल व गैर-डेयरी सामग्री से निर्मित उत्पादों को असली पनीर के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा था।
मसौदा संशोधन में क्या है
FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (बिक्री पर प्रतिबंध और प्रतिबंधात्मक प्रावधान) विनियमों में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत जो उत्पाद वर्तमान में 'डेयरी के संदर्भ में एनालॉग' श्रेणी में लाइसेंस या पंजीकरण प्राप्त कर चुके हैं, उन्हें अपने नाम, लेबलिंग और विपणन सामग्री में 'पनीर' शब्द का उपयोग तत्काल बंद करना होगा।
नियामक के अनुसार, इस प्रस्तावित संशोधन को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित होने के 60 दिन बाद प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए अंतिम रूप दिया जाएगा। इस प्रकार यह अभी एक प्रस्ताव है, न कि लागू नियम।
राज्य सरकारें पहले ही कर चुकी हैं कार्रवाई
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध का यह प्रस्ताव आने से पहले ही कई राज्य सरकारें एनालॉग पनीर के खिलाफ सख्त कदम उठा चुकी हैं। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं का हवाला देते हुए कृत्रिम पनीर के उत्पादन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगाया था।
यह प्रतिबंध उस समय लागू किया गया जब महाराष्ट्र में जांचे गए पनीर के 35 प्रतिशत से अधिक नमूने गुणवत्ता परीक्षण में विफल पाए गए थे। जांच में वनस्पति वसा की मिलावट जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं।
इसी क्रम में गुजरात सरकार ने भी पूरे राज्य में गैर-मानक एनालॉग पनीर, चीज़ और बटर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं को भ्रमित किए जाने, खाद्य सुरक्षा पर खतरे और डेयरी क्षेत्र को नुकसान पहुँचने की आशंकाओं को इसका कारण बताया था।
उपभोक्ताओं और डेयरी उद्योग पर असर
नियामक के अनुसार, वनस्पति तेल और अन्य गैर-डेयरी सामग्री से बने उत्पादों को पनीर के रूप में बेचने से न केवल उपभोक्ता गुमराह होते हैं, बल्कि असली डेयरी उत्पादकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का डेयरी क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा और घरेलू बाज़ार में कीमतों के दबाव से जूझ रहा है।
FSSAI ने पहले भी कई खाद्य कारोबारियों के खिलाफ निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और गुणवत्ता संबंधी अनियमितताएं पाए जाने पर लाइसेंस निलंबित किए हैं तथा प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। यह प्रस्तावित राष्ट्रीय प्रतिबंध उन बिखरी हुई राज्य-स्तरीय कार्रवाइयों को एक सुसंगत राष्ट्रीय ढाँचे में समेटने का प्रयास है।
आगे की प्रक्रिया
मसौदा संशोधन को राजपत्र में प्रकाशन के बाद 60 दिनों तक सार्वजनिक परामर्श के लिए खुला रखा जाएगा। इस दौरान उद्योग संगठन, डेयरी उत्पादक और आम नागरिक अपनी आपत्तियाँ और सुझाव दर्ज करा सकते हैं। सभी पक्षों के विचार प्राप्त होने के पश्चात नियामक संशोधन को अंतिम रूप देगा। यदि यह नियम लागू होता है, तो एनालॉग पनीर बेचने वाले व्यवसायों को अपनी लेबलिंग और उत्पाद श्रेणी में व्यापक बदलाव करने होंगे।