महाराष्ट्र एफडीए की बड़ी कार्रवाई: ₹1.07 करोड़ के असुरक्षित खाद्य पदार्थ जब्त, 8 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने राज्यभर में असुरक्षित और अवैध खाद्य पदार्थों के विरुद्ध एक माह तक चले विशेष अभियान में 11 छापों के दौरान ₹1.07 करोड़ से अधिक मूल्य के खाद्य पदार्थ जब्त किए और 8 प्रतिष्ठानों के खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिए। 18 अगस्त 2026 को सार्वजनिक की गई इस कार्रवाई में 10 लोगों की गिरफ्तारी भी हुई और मुंबई के कई नामी प्रतिष्ठान जाँच के घेरे में आए।
अभियान की मुख्य उपलब्धियाँ
एफडीए के इस विशेष अभियान में करीब ₹1 करोड़ मूल्य का प्रतिबंधित गुटखा और पान मसाला बरामद किया गया। इसके अलावा 5,600 किलोग्राम से अधिक असुरक्षित डेयरी उत्पाद, बेकरी आइटम और खाद्य तेल जब्त किए गए, जिनकी अनुमानित कीमत ₹8.2 लाख बताई गई है। विभाग ने 65 होटल और रेस्तरां का निरीक्षण किया, जिनमें से 50 प्रतिष्ठानों को चेतावनी नोटिस जारी किए गए।
ओटर्स क्लब और डेली फ्रेश बेकर्स पर कार्रवाई
मुंबई के बांद्रा पश्चिम स्थित प्रतिष्ठित ओटर्स क्लब का खाद्य लाइसेंस निलंबित किया गया। 17 अगस्त को हुए निरीक्षण में पाया गया कि क्लब में ग्राहकों को कृत्रिम या एनालॉग पनीर से बने व्यंजन असली पनीर के नाम पर परोसे जा रहे थे। जाँच में रसोईघर की खराब साफ-सफाई, गंदे फर्श, टूटी टाइलें, जाम नालियाँ और खराब रेफ्रिजरेशन व्यवस्था जैसी गंभीर अनियमितताएँ भी सामने आईं।
दहिसर पूर्व स्थित डेली फ्रेश बेकर्स एंड केक्स में भी गंभीर खामियाँ मिलीं। केक बनाने का काम साफ कार्यस्थल की बजाय फर्श पर किया जा रहा था। रसोई में तिलचट्टे, मक्खियाँ और चींटियाँ पाई गईं, जबकि एक्सपायर्ड फूड कलर का उपयोग हो रहा था। कर्मचारियों के पास स्वास्थ्य और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र नहीं थे और वे बिना दस्ताने व एप्रन के काम कर रहे थे।
अन्य प्रतिष्ठानों में मिली खामियाँ
खार पश्चिम स्थित प्रिंस ऑफ वेल्स रेस्तरां का खाद्य पंजीकरण निलंबित किया गया। निरीक्षण में भोजन के तापमान नियंत्रण की अपर्याप्त व्यवस्था, खाद्य सामग्री का खराब भंडारण, अस्वच्छ बर्तन, दीवारों और छतों की जर्जर स्थिति तथा एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस को प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित न करने जैसी कमियाँ सामने आईं।
विले पार्ले पूर्व स्थित राज ऑयल ट्रेडिंग का लाइसेंस भी निलंबित हुआ। गोदाम में खाद्य पदार्थों, रसायनों और खतरनाक वस्तुओं को अलग-अलग रखने की कोई व्यवस्था नहीं थी। चूहों के उपद्रव के स्पष्ट संकेत मिले — तेल के पैकेटों पर कुतरने के निशान और दुर्गंध पाई गई। तापमान और नमी नियंत्रण के मानकों का पालन भी नहीं हो रहा था।
एफडीए की प्रतिक्रिया और आगे की राह
एफडीए अधिकारियों ने कहा कि यह अभियान खाद्य सुरक्षा नियमों के सख्त अनुपालन और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की रक्षा के उद्देश्य से चलाया गया। विभाग ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आने वाले समय में भी इसी तरह के निरीक्षण और कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों को बनाए रखा जा सके।