महाराष्ट्र FDA का बड़ा फैसला: नकली पनीर पर एक साल का प्रतिबंध, 35% नमूने फेल
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 5 अगस्त 2026 को पूरे राज्य में एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर एक वर्ष के लिए तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSS Act), 2006 की धारा 30(2)(A) के साथ धारा 18 और 29 के तहत जारी किया गया है। FDA की अपनी जाँच में पाया गया कि परीक्षण किए गए 308 नमूनों में से 109 (35.4 प्रतिशत) राज्य के मानकों पर खरे नहीं उतरे।
प्रतिबंध का दायरा और कानूनी आधार
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में जारी इस आदेश के तहत राज्य के सभी जिलों में किसी भी प्रकार के नॉन-डेयरी पनीर की पैकिंग, थोक व खुदरा बिक्री और प्रदर्शन पर पाबंदी लगाई गई है। होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर, क्लाउड किचन और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान अब एनालॉग पनीर का उपयोग, तैयारी, भंडारण या किसी भी व्यंजन में परोस नहीं सकेंगे।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ FSS Act की धाराओं 50, 51, 52, 55 और 59 के तहत भारी जुर्माना, उत्पाद जब्ती और गैर-अनुपालन वाले स्टॉक को नष्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
जाँच में क्या सामने आया
1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच FDA ने पनीर और डेयरी एनालॉग के 308 नमूनों की प्रयोगशाला जाँच की। इनमें से 79 नमूने घटिया गुणवत्ता वाले और 30 नमूने असुरक्षित घोषित किए गए। जाँच में पाया गया कि कई मामलों में प्राकृतिक दूध वसा की जगह सस्ते वनस्पति तेल और गैर-दुग्ध वसा का इस्तेमाल हो रहा था। प्रयोगशाला परीक्षण में ब्यूटायरो-रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग और आयोडीन वैल्यू जैसे मानकों में गड़बड़ी सामने आई।
FDA के अनुसार, एनालॉग पनीर में असली दूध से बने पनीर की तुलना में प्रोटीन सहित अन्य पोषक तत्व काफी कम होते हैं। यह उन उपभोक्ताओं के लिए विशेष रूप से नुकसानदेह है जो शाकाहारी आहार में पनीर को प्रोटीन के प्रमुख स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
विधानसभा दबाव और राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह कदम महाराष्ट्र विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक विक्रम पचपुते द्वारा राज्य में बढ़ते सिंथेटिक पनीर के कारोबार का मुद्दा बार-बार उठाने के बाद उठाया गया है। पचपुते ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'यह कदम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण है।'
गौरतलब है कि राज्य में एक साल तक निगरानी और जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद मिलावट और भ्रामक बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी — यही कारण रहा कि FDA ने अंततः सीधे प्रतिबंध का रास्ता चुना।
असली पनीर निर्माताओं पर नए दायित्व
दूध से बने वास्तविक पनीर और छेना के निर्माताओं को खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग और डिस्प्ले) विनियम, 2020 का सख्ती से पालन करना होगा। बिना बैच नंबर, बिल या उचित पैकेजिंग के खुले पनीर की बिक्री पर भी कड़ी कार्रवाई होगी, क्योंकि इससे उत्पाद के स्रोत की पहचान करना कठिन हो जाता है।
आगे क्या होगा
FDA की निरीक्षण टीमें अब खाद्य कारोबारियों, आपूर्तिकर्ताओं और कैटरिंग कंपनियों पर अचानक छापेमारी करेंगी। यह प्रतिबंध एक वर्ष की अवधि के लिए है, जिसके बाद स्थिति की समीक्षा अपेक्षित है। खाद्य उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रियान्वयन कड़ा रहा, तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।