गुजरात में नकली पनीर-चीज पर बड़ी कार्रवाई: 1,705 किलो एनालॉग उत्पाद नष्ट, ₹5.28 लाख का नुकसान
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने 6 और 7 अगस्त को राज्यव्यापी छापेमारी अभियान में 1,705 किलोग्राम एनालॉग पनीर और चीज उत्पाद जब्त कर नष्ट किए, जिनकी अनुमानित बाज़ार कीमत ₹5.28 लाख आंकी गई है। खाद्य और औषधि नियंत्रण प्रशासन (एफडीसीए) ने राज्य भर के 842 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अचानक निरीक्षण कर इन उत्पादों को मिलावटी और जन-स्वास्थ्य के लिए हानिकारक घोषित किया। यह अभियान गुजरात सरकार द्वारा एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, बिक्री, भंडारण, परिवहन और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बाद शुरू किया गया।
अभियान का विस्तार और मुख्य जब्तियाँ
एफडीसीए के अनुसार, यह दो-दिवसीय कार्रवाई मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया के सीधे निर्देशों पर आरंभ की गई। 6 अगस्त को सबसे बड़ी एकल जब्ती वड़ोदरा नगर निगम क्षेत्र में हुई, जहाँ 471 किलोग्राम एनालॉग डेयरी उत्पाद नष्ट किए गए, जिनकी कीमत लगभग ₹1.5 लाख थी।
सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने ₹58,000 से अधिक मूल्य का 235 किलोग्राम सामान नष्ट किया, जबकि राजकोट म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने ₹30,000 से अधिक कीमत का 115 किलोग्राम माल जब्त कर नष्ट किया।
दूसरे दिन जूनागढ़ में सबसे बड़ी कार्रवाई
7 अगस्त को अभियान के दूसरे दिन सबसे बड़ी जब्ती जूनागढ़ जिले में दर्ज की गई, जहाँ अधिकारियों ने ₹2.04 लाख से अधिक मूल्य के 585 किलोग्राम एनालॉग डेयरी उत्पाद नष्ट किए। इसी दिन सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने ₹6,750 मूल्य का 27 किलोग्राम और जामनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने ₹6,500 मूल्य का 29 किलोग्राम एनालॉग सामान जब्त कर नष्ट किया।
सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने खाद्य मिलावट के मामलों में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा, 'लोगों की सेहत के साथ कोई लापरवाही नहीं बरती जाएगी। दूध, पनीर या चीज के नाम पर एनालॉग उत्पाद बेचकर लोगों की सेहत को खतरे में डालने वाले किसी भी व्यापारी या निर्माता को बख्शा नहीं जाएगा।' उन्होंने होटलों, रेस्तरां और खाद्य व्यवसायियों को केवल शुद्ध और प्रमाणित उत्पाद उपयोग करने का निर्देश दिया।
राष्ट्रीय नियामक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि इस वर्ष की शुरुआत में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य व्यवसायों को निर्देश दिया था कि चीज एनालॉग उत्पादों को असली पनीर के रूप में नहीं बेचा जाए। एफएसएसएआई के अनुसार, जो रेस्तरां ऐसे उत्पादों का उपयोग करते हैं, उन्हें अपने मेन्यू या डिस्प्ले बोर्ड पर इसकी स्पष्ट जानकारी ग्राहकों को देनी होगी। एनालॉग पनीर वास्तव में दूध की जगह वेजिटेबल फैट और अन्य गैर-डेयरी सामग्री से बना उत्पाद होता है, जिसे असली डेयरी उत्पाद के रूप में बेचना उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है।
आगे की कार्रवाई
एफडीसीए ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आने वाले दिनों में भी पूरे राज्य में जारी रहेगा। गुजरात सरकार का यह कदम कई महीनों की जाँच के बाद उठाया गया है, जिसमें पाया गया कि बड़े पैमाने पर असली डेयरी उत्पादों की जगह एनालॉग उत्पाद बेचे या उपयोग किए जा रहे थे।