गुजरात में फूड सेफ्टी अभियान: 187 रेस्टोरेंट जाँचे, 137 तत्काल बंद; सूरत फूड पॉइजनिंग के बाद सख्त कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने 20 अगस्त 2026 को गांधीनगर में खाद्य एवं औषधि नियमन तंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। यह बैठक सूरत के वराछा इलाके में 18 अगस्त को हुई फूड पॉइजनिंग की गंभीर घटना की पृष्ठभूमि में बुलाई गई, जिसमें एक पाँच वर्षीय बच्ची की दुखद मृत्यु हो गई थी। राज्य सरकार ने इस घटना के बाद पूरे प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान छेड़ दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
स्पेशल ड्राइव के तहत राज्यभर में 187 रेस्टोरेंट में आकस्मिक जाँच की गई। इनमें से 137 रेस्टोरेंट में गंभीर अस्वच्छता और अस्वास्थ्यकर स्थिति पाए जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए गए। इसके अतिरिक्त 40 रेस्टोरेंट को सुधार के लिए इम्प्रूवमेंट नोटिस जारी किए गए और चार रेस्टोरेंट के लाइसेंस तत्काल निलंबित कर दिए गए।
सीलिंग की कार्रवाई के तहत कुल छह रेस्टोरेंट को सील किया गया — जिसमें राजकोट महानगरपालिका क्षेत्र के दो, राजकोट जिले का एक और नडियाद जिले के तीन रेस्टोरेंट शामिल हैं।
सूरत में सघन निरीक्षण अभियान
सूरत महानगरपालिका (SMC) के स्वास्थ्य विभाग के फूड सेफ्टी अधिकारियों और सैनिटेशन स्टाफ की संयुक्त टीमों ने शहर के सभी क्षेत्रों में 209 होटल-रेस्टोरेंट और 34 ढाबों में सघन निरीक्षण किया। जाँच में किचन की स्वच्छता, बासी भोजन, मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र और डेयरी उत्पादों से संबंधित डिस्प्ले बोर्ड की स्थिति परखी गई।
इस अभियान में 548 किलोग्राम अखाद्य खाद्य सामग्री नष्ट की गई। 128 होटल-रेस्टोरेंट को नोटिस देकर ₹4,43,800 का प्रशासनिक जुर्माना वसूला गया। गंभीर खामियाँ पाए जाने पर 43 होटल-रेस्टोरेंट को तत्काल बंद कराया गया।
सरकार की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने सूरत फूड पॉइजनिंग कांड के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए पूरे राज्य में रेस्टोरेंट और खाद्य प्रतिष्ठानों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की जाँच के लिए यह विशेष अभियान शुरू करने के आदेश दिए। यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य सुरक्षा को लेकर नागरिकों में बेचैनी बढ़ रही है और राज्य सरकार पर जवाबदेही का दबाव है।
खाद्य एवं औषधि नियमन तंत्र की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मिलावटखोरी और अस्वास्थ्यकर गतिविधियों में लिप्त प्रतिष्ठानों के विरुद्ध यह कड़ी कानूनी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि फूड पॉइजनिंग की यह घटना वराछा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में हुई, जहाँ बड़ी संख्या में श्रमिक वर्ग के परिवार रहते हैं और बाहर का खाना खाने पर निर्भर हैं। 548 किलोग्राम अखाद्य सामग्री का नष्ट किया जाना और 137 प्रतिष्ठानों का बंद होना यह दर्शाता है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन व्यापक पैमाने पर हो रहा था।
क्या होगा आगे
खाद्य एवं औषधि नियमन तंत्र ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान एकबारगी कार्रवाई नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली प्रक्रिया होगी। जिन प्रतिष्ठानों को इम्प्रूवमेंट नोटिस दिया गया है, उनका पुनर्निरीक्षण किया जाएगा। सूरत की बच्ची की मृत्यु से उपजे जन-आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार से उम्मीद है कि वह नियमित निगरानी तंत्र को और मज़बूत करेगी।