गुजरात में खाद्य सुरक्षा अभियान: 386 हॉस्टल-कैंटीन जाँचे, 194 नमूने लैब भेजे, 2 लाइसेंस निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने सूरत के पीपी सवानी इंटरनेशनल स्कूल छात्रावास में 13 सितंबर को हुई कथित फूड पॉइजनिंग की घटना के बाद राज्यभर में व्यापक खाद्य सुरक्षा जाँच अभियान छेड़ा है। 16 सितंबर तक 386 हॉस्टल और कैंटीनों का निरीक्षण किया जा चुका है, 194 खाद्य नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं और दो संस्थानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, निरीक्षण किए गए 386 संस्थानों में 100 सरकारी, 71 अर्द्ध-सरकारी और 213 निजी हॉस्टल एवं कैंटीन शामिल हैं। जाँच के दौरान 102 सुधार नोटिस जारी किए गए, जबकि 18 हॉस्टल और कैंटीनों ने स्वेच्छा से अपना संचालन अस्थायी रूप से बंद कर सफाई और सुधारात्मक कार्रवाई शुरू की।
स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी बताया कि जाँच के दौरान लगभग 200 हॉस्टलों ने अपनी रसोइयों की सफाई करवाई, क्योंकि उनमें गंभीर कमियाँ पाई गई थीं। आने वाले दिनों में निरीक्षण का दूसरा चरण भी चलाए जाने की योजना है।
सूरत की घटना — क्या हुआ था
13 सितंबर की रात पीपी सवानी इंटरनेशनल स्कूल के छात्रावास में रात्रिभोज के बाद करीब 85 छात्रों ने पेट दर्द और उल्टी की शिकायत की। उस दिन रात के खाने में पनीर-मटर, रोटी, फ्राइड राइस और छाछ परोसी गई थी।
छात्रावास में लगभग 2,200 छात्र और कर्मचारी रहते हैं। भोजन के कुछ घंटे बाद लक्षण दिखाई देने पर प्रभावित छात्रों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। सूरत नगर निगम ने रसोई से खाद्य नमूने एकत्र कर जाँच के लिए भेज दिए। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक बीमारी का सटीक कारण फूड पॉइजनिंग होना साबित नहीं हुआ है और जाँच जारी है।
सरकार की प्रतिक्रिया
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कहा कि कई हॉस्टलों की रसोइयों में गंदगी और अस्वच्छ परिस्थितियाँ पाई गई हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि लापरवाही के कारण छात्र बीमार पड़ते हैं तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
मंत्री ने कहा, 'जब हॉस्टलों में फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाएँ होती हैं तो इसकी पूरी जिम्मेदारी हॉस्टल प्रबंधन की होती है। ऐसी घटनाएँ गंभीर लापरवाही के कारण सामने आती हैं। अभिभावक अपने बच्चों को निजी हॉस्टलों में रखने के लिए शुल्क देते हैं, जबकि सरकारी हॉस्टलों पर सरकार खर्च करती है। हॉस्टल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करे तथा बासी या दूषित भोजन न परोसा जाए।'
आम जनता और छात्रों पर असर
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब राज्यभर के अभिभावकों में छात्रावासों की खाद्य गुणवत्ता को लेकर चिंता गहरी हो गई है। गौरतलब है कि गुजरात में बड़ी संख्या में छात्र दूरदराज से शहरों में पढ़ने आते हैं और निजी व सरकारी हॉस्टलों पर निर्भर रहते हैं। 102 सुधार नोटिस और स्वैच्छिक बंदी इस बात का संकेत हैं कि स्वच्छता की स्थिति व्यापक रूप से चिंताजनक थी।
क्या होगा आगे
निरीक्षण का दूसरा चरण शीघ्र शुरू होने की घोषणा की गई है। 194 खाद्य नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि नमूनों में दूषण की पुष्टि होती है, तो संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की संभावना है। सूरत घटना की जाँच भी अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।