गुजरात में नकली दवाओं पर जीरो-टॉलरेंस: 50 कंपनियों के लाइसेंस रद्द, स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया की सख्त चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने नकली और मिलावटी दवाओं के खिलाफ 2 सितंबर 2026 को अपनी 'जीरो-टॉलरेंस' नीति के तहत बड़ी कार्रवाई की है, जिसमें राज्यभर में 50 दवा कंपनियों के लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने गांधीनगर में स्पष्ट किया कि यह अभियान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सीधे निर्देश पर चलाया जा रहा है और जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
छापेमारी के दौरान कई स्थानों पर मिलावटी और नकली दवाएं, कफ सिरप और अन्य उत्पाद बरामद हुए हैं। इन गड़बड़ियों में संलिप्त फैक्टरियों और फार्मास्युटिकल कंपनियों को सील कर उनके लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। खाद्य विभाग और ड्रग्स विभाग दोनों मिलकर पूरे राज्य में एक साथ कार्रवाई कर रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने कहा, 'मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हमें साफ निर्देश दिए थे कि जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी के तहत, दवा और खाने-पीने की चीजों में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कल एक बैठक हुई थी। पूरे गुजरात में फूड डिपार्टमेंट और हमारा ड्रग्स डिपार्टमेंट हर जगह छापेमारी कर रहा है।'
अभियान की व्यापकता
यह अभियान पिछले चार महीनों से लगातार जारी है। उल्लेखनीय है कि इस कार्रवाई में अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भी सक्रिय भूमिका निभाई है। ड्रग्स विभाग के अधिकारियों ने क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर तीन राज्यों में छापेमारी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नकली दवाओं को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं और केंद्र सरकार भी राज्यों से सख्त कदम उठाने का आग्रह कर चुकी है।
गौरतलब है कि गुजरात देश के प्रमुख फार्मास्युटिकल उत्पादक राज्यों में से एक है, और यहाँ से निर्यात होने वाली दवाओं की गुणवत्ता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की साख पर भी पड़ता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और चेतावनी
मंत्री पानशेरिया ने कहा, 'पिछले चार महीने से गुजरात में अभियान चलाया जा रहा है। सभी जगहों पर जनता की प्रतिक्रिया अच्छी मिल रही है। रेस्टोरेंट में गंदगी और मिलावटी खाना लोगों को देना, नकली दवाओं को बनाने वालों पर हमने सख्त कार्रवाई की है और दोषियों को दबोचा है।'
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, 'मुझे उम्मीद है कि गुजरात में मिलावट की कोई भी गलत हरकत नहीं करेगा, वरना उसे सजा भुगतनी पड़ेगी। हमारी पुलिस और ड्रग्स विभाग उस पर सख्त कार्रवाई करेगा।'
आम जनता पर असर
नकली और मिलावटी दवाओं का सीधा खतरा उन मरीजों को होता है जो इन पर भरोसा करते हैं। घटिया कफ सिरप और अन्य दवाइयाँ न केवल बेअसर होती हैं, बल्कि जानलेवा भी हो सकती हैं। इस अभियान से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहाँ नकली दवाओं की पहुँच अधिक रहती है।
क्या होगा आगे
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। दोषी कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नियमित और बहु-विभागीय कार्रवाई ही दीर्घकालिक समाधान हो सकती है।