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बीआरएस की 'चार्जशीट': केटीआर ने तेलंगाना में कांग्रेस के 1,000 दिनों को बताया अक्षम और भ्रष्ट

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बीआरएस की 'चार्जशीट': केटीआर ने तेलंगाना में कांग्रेस के 1,000 दिनों को बताया अक्षम और भ्रष्ट

सारांश

बीआरएस ने तेलंगाना में कांग्रेस के 1,000 दिनों के शासन के खिलाफ 'चार्जशीट' जारी कर लगभग 30 कथित घोटालों का ब्यौरा दिया। केटीआर ने ₹4.5 लाख करोड़ कर्ज पर जवाबदेही माँगी और 119 विधानसभा क्षेत्रों में 7 दिवसीय जन-संपर्क अभियान की घोषणा की।

मुख्य बातें

बीआरएस ने 2 सितंबर को हैदराबाद में 'चार्जशीट' जारी कर तेलंगाना में कांग्रेस के 1,000 दिनों के शासन को अक्षम, भ्रष्ट और अराजक बताया।
कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने कथित तौर पर लगभग 30 घोटालों और विवादों का ब्यौरा चार्जशीट में दर्ज होने का दावा किया।
₹4.5 लाख करोड़ के कर्ज के उपयोग पर पारदर्शिता की माँग की गई।
कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर 100 दिनों में वादे पूरे करने की गारंटी देने के बाद 1,000 दिन बाद भी उन्हें लागू न करने का आरोप।
सभी 119 विधानसभा क्षेत्रों में 7 दिवसीय जन-संपर्क अभियान की घोषणा की गई।
किसानों को रायतू भरोसा , फसल खरीद और कर्ज राहत जैसे मुद्दों पर निराश किए जाने का आरोप।

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने बुधवार, 2 सितंबर को हैदराबाद स्थित तेलंगाना भवन में एक औपचारिक 'चार्जशीट' जारी करते हुए तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के 1,000 दिनों के शासन को अक्षम, भ्रष्ट और अराजक करार दिया। बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (केटीआर) ने आरोप लगाया कि ये 1,000 दिन तेलंगाना की जनता के लिए उत्पीड़न के दिन रहे हैं।

चार्जशीट में क्या है

केटीआर के अनुसार, इस चार्जशीट में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर हुए लगभग 30 घोटालों और विवादों का विस्तृत ब्यौरा दर्ज किया गया है। उन्होंने ठेकों, भूमि सौदों और सरकारी परियोजनाओं में अनियमितताओं का आरोप लगाया और सरकार से इन मुद्दों पर पारदर्शिता के साथ जवाब देने की माँग की। बीआरएस नेता ने ₹4.5 लाख करोड़ के कर्ज के उपयोग पर भी सवाल उठाए और कहा कि इस राशि के खर्च का कोई स्पष्ट हिसाब जनता के सामने नहीं रखा गया।

वादे बनाम हकीकत: कांग्रेस पर आरोप

केटीआर ने कहा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर सभी वादे पूरे करने की गारंटी दी थी। उनके अनुसार, 1,000 दिन बीत जाने के बाद भी एक भी वादा पूरी तरह लागू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 'स्वर्ग जैसा माहौल' बनाने का वादा किया था, लेकिन कथित तौर पर राज्य को रोज़मर्रा की जिंदगी में गंभीर कठिनाइयों की ओर धकेल दिया।

किसानों और आम जनता पर असर

कृषि क्षेत्र पर केटीआर ने आरोप लगाया कि किसानों को रायतू भरोसा योजना, फसल खरीद, खाद की उपलब्धता, किसान बीमा और कर्ज राहत जैसे कई मोर्चों पर निराशा हाथ लगी है। उनका कहना था कि कल्याणकारी भुगतान और खरीद में हुई देरी ने किसानों की आर्थिक स्थिति को और कमज़ोर किया है। इसके अलावा उन्होंने छात्रों, बेरोज़गार युवाओं, महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों की बढ़ती मुश्किलों का भी उल्लेख किया।

जन-संपर्क अभियान की घोषणा

केटीआर ने तेलंगाना के सभी 119 विधानसभा क्षेत्रों में 7 दिवसीय जन-संपर्क अभियान की घोषणा की। इस अभियान में किसानों, महिलाओं, युवाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के साथ विशेष संवाद सत्र और विरोध प्रदर्शन शामिल होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बीआरएस आने वाले विधानसभा सत्र में अधूरे वादों, आर्थिक कुप्रबंधन और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को घेरेगी।

भविष्य की जवाबदेही का दावा

बीआरएस नेता ने दावा किया कि जब उनकी पार्टी सत्ता में वापस लौटेगी, तो पिछले 1,000 दिनों में कथित तौर पर जनता के धन के दुरुपयोग की पूरी जाँच की जाएगी और एक-एक रुपया वसूला जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में विपक्षी राजनीति नए सिरे से सक्रिय हो रही है और अगले विधानसभा चुनाव की दिशा में दलों की रणनीतियाँ आकार ले रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 दिन एक प्रतीकात्मक पड़ाव है जिसे विपक्ष चुनावी कथा के रूप में भुनाना चाहता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि बीआरएस खुद 2023 के चुनाव में सत्ता से बाहर हुई थी और उस पर भी शासनकाल के दौरान गंभीर आरोप लगते रहे हैं — ऐसे में 'नैतिक विपक्ष' की भूमिका की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है। ₹4.5 लाख करोड़ के कर्ज पर उठाए गए सवाल वैध हैं, लेकिन जब तक स्वतंत्र लेखापरीक्षा के आँकड़े सामने नहीं आते, ये आरोप राजनीतिक बयानबाज़ी से आगे नहीं जाते। असली परीक्षा यह होगी कि क्या 7 दिवसीय जन-संपर्क अभियान ज़मीनी असंतोष को वोट में बदल पाता है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीआरएस की 'चार्जशीट' क्या है और इसमें क्या आरोप लगाए गए हैं?
यह बीआरएस द्वारा 2 सितंबर को जारी एक दस्तावेज़ है, जिसमें तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के 1,000 दिनों के शासन को अक्षम, भ्रष्ट और अराजक बताया गया है। इसमें कथित तौर पर लगभग 30 घोटालों और विवादों का ब्यौरा है, जिनमें ठेके, भूमि सौदे और सरकारी परियोजनाओं में अनियमितताएँ शामिल हैं।
केटीआर ने ₹4.5 लाख करोड़ के कर्ज पर क्या सवाल उठाए?
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव ने माँग की कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लिए गए ₹4.5 लाख करोड़ के कर्ज का उपयोग कहाँ और कैसे हुआ, इस पर पारदर्शिता बरती जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस राशि का कोई स्पष्ट हिसाब जनता के सामने नहीं रखा गया।
बीआरएस ने किसानों के संदर्भ में कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
केटीआर ने आरोप लगाया कि किसानों को रायतू भरोसा योजना, फसल खरीद, खाद की उपलब्धता, किसान बीमा और कर्ज राहत जैसे कई मोर्चों पर निराशा हाथ लगी है। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी भुगतान और खरीद में देरी ने किसानों की आर्थिक स्थिति और कमज़ोर की है।
बीआरएस का 7 दिवसीय जन-संपर्क अभियान क्या है?
केटीआर ने तेलंगाना के सभी 119 विधानसभा क्षेत्रों में 7 दिवसीय जन-संपर्क अभियान की घोषणा की है। इसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के साथ विशेष संवाद सत्र और विरोध प्रदर्शन शामिल होंगे।
कांग्रेस पर 100 दिनों के वादे पूरे न करने का आरोप क्यों लगाया गया?
बीआरएस का कहना है कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी सहित कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने सत्ता में आने के 100 दिनों के भीतर सभी चुनावी वादे पूरे करने की गारंटी दी थी। केटीआर के अनुसार, 1,000 दिन बीत जाने के बाद भी एक भी वादा पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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