केटीआर का कांग्रेस पर गंभीर आरोप: 420 वादों का न निभाना सबसे बड़ा धोखा
सारांश
Key Takeaways
- केटीआर ने कांग्रेस पर 420 वादों का न निभाने का आरोप लगाया।
- कांग्रेस ने हर परिवार को 2.5 लाख रुपये देने का वादा किया था।
- मुख्यमंत्री के साइन की गई फाइल के गायब होने पर एसआईटी गठन की मांग।
- तेलंगाना की आर्थिक स्थिति में गिरावट आई है।
- महिलाओं को 2,500 रुपये की मासिक सहायता का वादा किया गया था।
हैदराबाद, 17 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रमा राव ने मंगलवार को तेलंगाना की कांग्रेस सरकार पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव में किए गए 420 वादों को पूरा न करना “दुनिया का सबसे बड़ा धोखा” है।
विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए केटीआर ने कहा कि किसी भी अन्य पार्टी ने इतनी संख्या में वादे नहीं किए और उन्हें पूरा करने में विफल नहीं रही। उन्होंने कांग्रेस पर 100 दिनों के भीतर गारंटियों को लागू करने का वादा करने के बाद मुकरने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, “कांग्रेस का दावा था कि हर परिवार को 2.5 लाख रुपये तक का लाभ मिलेगा। अब दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद, क्या सरकार एक भी ऐसा परिवार दिखा सकती है, जिसे यह लाभ मिला हो?”
केटीआर ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतियों और प्रतिबद्धताओं का प्रतिबिंब होना चाहिए, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे महज औपचारिकता बना दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद पहले अभिभाषण में तत्कालीन राज्यपाल तमिलिसाई सौंदरराजन और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने “छह गारंटियों” को कानूनी दर्जा देने का वादा किया था।
केटीआर ने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री द्वारा इस संबंध में साइन की गई फाइल का क्या हुआ। उन्होंने मांग की, “अगर इतनी महत्वपूर्ण फाइल गायब हो गई है, तो उसकी तलाश के लिए तुरंत विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन होना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि जब पहला राज्यपाल अभिभाषण अधूरे वादों के कारण भरोसेमंद नहीं रहा, तो बाद के अभिभाषणों की विश्वसनीयता भी संदिग्ध हो जाती है। उन्होंने कहा, “अगर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर वाली फाइल की कोई अहमियत नहीं है, तो जनता इस सरकार पर कैसे विश्वास करे?”
बीआरएस नेता ने आरोप लगाया कि पिछले 28 महीनों में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था कमजोर हो गई है। उन्होंने सरकार पर कर्ज बढ़ाने, वित्तीय कुप्रबंधन, फंड डायवर्जन और विकास की बजाय राजनीतिक प्रचार को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
केटीआर ने यह भी कहा कि तेलंगाना के संसाधनों का उपयोग अन्य राज्यों में राजनीतिक अभियानों के लिए किया जा रहा है, जबकि केंद्र से फंड लाने में सरकार विफल रही है।
आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने कहा कि जो तेलंगाना कभी सबसे तेजी से बढ़ने वाले राज्यों में था, वहां अब गिरावट देखी जा रही है। उन्होंने जीएसटी कलेक्शन, रजिस्ट्रेशन और वाहन राजस्व में कमी पर सवाल उठाते हुए इसे “नकारात्मक नीतियों और सोच” का परिणाम बताया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उद्योग और आईटी में रोजगार में गिरावट आ रही है और निवेश सम्मेलनों में किए जा रहे दावे केवल प्रचार हैं। साथ ही, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की विरासत को मिटाने की कोशिश का भी आरोप लगाया।
कल्याणकारी योजनाओं पर बोलते हुए केटीआर ने कहा कि महिलाएं, किसान, पेंशनधारक और बेरोजगार युवा सभी सरकार की नीतियों से निराश हैं। उन्होंने महिलाओं को 2,500 रुपये मासिक सहायता, ब्याज मुक्त ऋण, कृषि ऋण माफी और बेरोजगारी भत्ते जैसे वादों की स्थिति पर सवाल उठाए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई कई योजनाओं को या तो बंद कर दिया गया है या कमजोर कर दिया गया है।