19 सितंबर 2026
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सेमीकॉन इंडिया 2026: दुनिया की 20% सेमीकंडक्टर डिज़ाइन वर्कफोर्स भारतीय, 85,000 इंजीनियरों को ट्रेनिंग जारी

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सेमीकॉन इंडिया 2026: दुनिया की 20% सेमीकंडक्टर डिज़ाइन वर्कफोर्स भारतीय, 85,000 इंजीनियरों को ट्रेनिंग जारी

सारांश

सेमीकॉन इंडिया 2026 में MeitY सचिव एस. कृष्णन का बयान महज़ आँकड़ा नहीं — यह भारत की वैश्विक चिप महत्त्वाकांक्षा का खाका है। दुनिया की 20% सेमीकंडक्टर डिज़ाइन प्रतिभा भारतीय है और 85,000 इंजीनियरों की ट्रेनिंग जारी है — अब असली दाँव मैन्युफैक्चरिंग में उतरने का है।

मुख्य बातें

कृष्णन ने सेमीकॉन इंडिया 2026 के तीसरे दिन ( 19 सितंबर 2026 ) मुख्य नीतिगत प्राथमिकताएँ साझा कीं।
वैश्विक सेमीकंडक्टर डिज़ाइन वर्कफोर्स का लगभग 20 प्रतिशत भारतीय पेशेवरों से है।
सरकार 85,000 डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के कार्यक्रम पर काम कर रही है।
240 घंटे के स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम का पायलट सफल रहा; भारत में अन्य देशों की तुलना में बेहतर परिणाम मिले।
सरकार प्रत्येक निवेश प्रस्ताव का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने के बाद ही सार्वजनिक धन से इंसेंटिव देगी।
घरेलू और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की रुचि के पीछे टैलेंट पूल और नीतिगत स्थिरता मुख्य कारण।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने 19 सितंबर 2026 को सेमीकॉन इंडिया 2026 के तीसरे दिन घोषणा की कि वैश्विक सेमीकंडक्टर डिज़ाइन वर्कफोर्स में भारतीयों की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार 85,000 डिज़ाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने के कार्यक्रम पर तेज़ी से आगे बढ़ रही है।

डिज़ाइन टैलेंट में भारत की बढ़त

सचिव कृष्णन ने कहा, 'चिप डिज़ाइन के क्षेत्र में पहले से ही बहुत सारे कुशल टैलेंट मौजूद हैं। दुनिया की सेमीकंडक्टर डिज़ाइन वर्कफोर्स का लगभग 20 फीसदी हिस्सा भारत से है। हमने डिज़ाइन टैलेंट पर काफी ज़ोर दिया है और लगभग 85,000 डिज़ाइन इंजीनियरों को ट्रेनिंग देने का प्रोग्राम चल रहा है।' यह आँकड़ा इस बात की पुष्टि करता है कि भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में मैन्युफैक्चरिंग से पहले डिज़ाइन के मोर्चे पर पहले ही मज़बूत पकड़ बना चुका है।

240 घंटे के स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम की पहल

मंत्रालय ने 240 घंटे के एक विशेष स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम के ज़रिए मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कृष्णन ने बताया, 'एक कंपनी ने इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर आज़माया और फीडबैक दिया कि दूसरे देशों में इसी तरह की कोशिशों की तुलना में उन्हें भारत में कहीं अधिक सफलता मिली। इसलिए हम सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर खास ज़ोर देते हुए स्किल डेवलपमेंट के सभी पहलुओं को प्राथमिकता देंगे।' गौरतलब है कि भारत में कुशल जनशक्ति की उपलब्धता को बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ लंबे समय से एक प्रमुख निवेश आकर्षण मानती रही हैं।

निवेश प्रस्तावों पर सतर्क और पारदर्शी रुख

निवेश नीति में सहयोग के सवाल पर सचिव कृष्णन ने स्पष्ट किया कि सरकार हर प्रस्ताव का बेहद सावधानी से मूल्यांकन करेगी। उनके शब्दों में, 'चूंकि इसमें जनता का पैसा शामिल है, इसलिए हम हर प्रस्ताव का ठीक से मूल्यांकन करने के बाद ही इंसेंटिव देने का वादा कर सकते हैं।' यह रुख उन आलोचनाओं के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण है जो कहती हैं कि बड़े सरकारी प्रोत्साहनों का लाभ हमेशा सार्वजनिक हित के अनुरूप नहीं होता।

घरेलू और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी

MeitY सचिव ने कहा कि बड़ी संख्या में घरेलू और बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारतीय सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने इस रुचि के पीछे दो मुख्य कारण गिनाए — भारत के टैलेंट पूल पर भरोसा और नीतिगत स्थिरता तथा मज़बूत सरकारी समर्थन। कृष्णन ने कहा, 'हम उन्हें सक्रिय रूप से प्रोत्साहित करेंगे और उनके साथ मिलकर काम करेंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की माँग तेज़ हो रही है और भारत खुद को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश में है।

आगे की राह

सेमीकॉन इंडिया 2026 में हुई इन घोषणाओं के बाद सेक्टर की निगाहें सरकार द्वारा प्रस्तावित प्रोत्साहन ढाँचे के विस्तृत दिशानिर्देशों पर टिकी हैं। 85,000 इंजीनियरों की ट्रेनिंग की समयसीमा और पायलट स्किल प्रोग्राम के व्यापक विस्तार पर मंत्रालय से स्पष्टता आना अभी बाकी है। भारत की सेमीकंडक्टर महत्त्वाकांक्षाओं की असली परीक्षा अब नीतिगत घोषणाओं से आगे बढ़कर ज़मीनी क्रियान्वयन में होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक पुरानी वास्तविकता की पुष्टि भर है — भारत का असली खाई मैन्युफैक्चरिंग में है, डिज़ाइन में नहीं। 85,000 इंजीनियरों की ट्रेनिंग और 240 घंटे का पायलट प्रोग्राम सही दिशा में कदम हैं, पर वैश्विक सेमीकंडक्टर दौड़ में ताइवान, दक्षिण कोरिया और अब अमेरिका अरबों डॉलर फ़ैब्रिकेशन में लगा चुके हैं। निवेश प्रस्तावों की 'सावधानीपूर्वक जाँच' की नीति विवेकपूर्ण है, लेकिन इसकी आड़ में नौकरशाही विलंब न हो — यह सुनिश्चित करना उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेमीकॉन इंडिया 2026 क्या है और इसमें क्या हुआ?
सेमीकॉन इंडिया 2026 भारत सरकार द्वारा आयोजित एक प्रमुख सेमीकंडक्टर उद्योग सम्मेलन है। 19 सितंबर 2026 को इसके तीसरे दिन MeitY सचिव एस. कृष्णन ने स्किल डेवलपमेंट, निवेश नीति और भारत की वैश्विक चिप डिज़ाइन हिस्सेदारी पर अहम जानकारियाँ साझा कीं।
भारत की सेमीकंडक्टर डिज़ाइन वर्कफोर्स में वैश्विक हिस्सेदारी कितनी है?
MeitY सचिव एस. कृष्णन के अनुसार, दुनिया की सेमीकंडक्टर डिज़ाइन वर्कफोर्स का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा भारतीय पेशेवरों से है। साथ ही, लगभग 85,000 डिज़ाइन इंजीनियरों को ट्रेनिंग देने का कार्यक्रम चल रहा है।
240 घंटे का स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम क्या है?
यह एक विशेष कौशल विकास पहल है जिसे सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए तैयार किया गया है। एक कंपनी के पायलट प्रोजेक्ट के फीडबैक के अनुसार, भारत में इस कार्यक्रम के नतीजे अन्य देशों की तुलना में बेहतर रहे।
सरकार सेमीकंडक्टर निवेश पर इंसेंटिव कैसे देगी?
MeitY सचिव कृष्णन ने स्पष्ट किया कि चूंकि इसमें सार्वजनिक धन शामिल है, इसलिए हर निवेश प्रस्ताव का बारीकी से मूल्यांकन किया जाएगा और उसके बाद ही इंसेंटिव का वादा किया जाएगा। यह पारदर्शी और जवाबदेही-आधारित दृष्टिकोण है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में सेमीकंडक्टर निवेश के लिए क्यों आकर्षित हो रही हैं?
MeitY सचिव के अनुसार, दो मुख्य कारण हैं — भारत के विशाल और कुशल टैलेंट पूल पर भरोसा, तथा सरकारी नीतियों से मिलने वाली स्थिरता और मज़बूत समर्थन। इन्हीं कारणों से घरेलू और वैश्विक दोनों तरह की कंपनियाँ भारत में निवेश के लिए इच्छुक हैं।
राष्ट्र प्रेस
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