31 जुलाई 2026
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सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: एनसीएस शुगर्स के ₹105.44 करोड़ PNB लोन फ्रॉड में हैदराबाद-विजयनगरम के 10 ठिकानों पर छापे

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सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: एनसीएस शुगर्स के ₹105.44 करोड़ PNB लोन फ्रॉड में हैदराबाद-विजयनगरम के 10 ठिकानों पर छापे

सारांश

सीबीआई ने ₹105.44 करोड़ के PNB लोन फ्रॉड में एनसीएस शुगर्स के 10 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे। फर्जी दस्तावेजों से ऋण लेकर धन के दुरुपयोग का आरोप है। कंपनी 2017 में भी ₹82.11 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में जांच के घेरे में रह चुकी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 31 जुलाई को हैदराबाद , विजयनगरम और काकीनाडा में 10 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
एनसीएस शुगर्स लिमिटेड पर पंजाब नेशनल बैंक के साथ ₹105.44 करोड़ के लोन फ्रॉड का आरोप है।
आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों से ऋण लेकर राशि का निर्धारित उद्देश्यों से अलग दुरुपयोग किया गया।
मामला बेंगलुरु स्थित सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच में चेन्नई PNB की शिकायत पर दर्ज हुआ।
2017 में भी सीबीआई ने एनसीएस शुगर्स के अधिकारियों के खिलाफ ₹82.11 करोड़ की अलग धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।
जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है; अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार, 31 जुलाई को एनसीएस शुगर्स लिमिटेड द्वारा पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के साथ किए गए कथित ₹105.44 करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में हैदराबाद, विजयनगरम और काकीनाडा में एक साथ 10 व्यावसायिक और आवासीय ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी में बड़ी संख्या में दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए।

तलाशी अभियान का दायरा

एजेंसी के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 10 स्थानों पर एक साथ चलाए गए इस अभियान में एनसीएस शुगर्स लिमिटेड के निदेशकों से जुड़ी फैक्ट्री, पंजीकृत कार्यालय और आवासीय संपत्तियाँ शामिल थीं। सीबीआई ने बताया कि तलाशी के दौरान जांच से संबंधित आवश्यक अभिलेखों सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए।

एजेंसी ने स्पष्ट किया कि जब्त सामग्री की जांच तीन उद्देश्यों से की जा रही है — आपराधिक षड्यंत्र का पूरा दायरा उजागर करना, धन के हेरफेर और उसकी आवाजाही का पता लगाना, तथा इस मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्ट भूमिका निर्धारित करना।

मामले की पृष्ठभूमि

चेन्नई स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत के आधार पर बेंगलुरु में सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच में एनसीएस शुगर्स लिमिटेड, उसके निदेशकों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति के दुरुपयोग और जालसाजी के आरोप लगाए गए हैं।

आरोपों का स्वरूप

आरोप है कि आरोपियों ने ऋणदाता बैंक को फर्जी दस्तावेज असली बताकर सौंपे और उनके आधार पर ऋण सुविधाएँ प्राप्त कीं। बाद में लोन की राशि को निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्यों में लगाने के बजाय अन्यत्र उपयोग किया गया और उसका दुरुपयोग किया गया। आरोपी कंपनी बैंक का बकाया चुकाने में विफल रही, जिससे उसके लोन खाते अनियमित/डिफॉल्ट श्रेणी में आ गए और PNB को ₹105.44 करोड़ का नुकसान हुआ।

एनसीएस शुगर्स का पुराना रिकॉर्ड

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एनसीएस शुगर्स सीबीआई की जांच के घेरे में आई है। 2017 में भी सीबीआई ने कंपनी के कम से कम दो अधिकारियों के खिलाफ 'प्रोजेक्ट एंड इक्विपमेंट कॉर्पोरेशन' के साथ ₹82.11 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक अलग मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। यानी यह कंपनी दो अलग-अलग बड़े वित्तीय घोटालों में संदिग्ध के रूप में सामने आ चुकी है।

आगे की जांच

सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच करेगी। जांच का अगला चरण यह तय करेगा कि क्या मामले में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आती है, जिनका उल्लेख प्राथमिकी में किया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ फर्जी दस्तावेजों की जांच ऋण वितरण के बाद तक नहीं हो पाती। यह ऐसे समय में आया है जब PNB पहले ही नीरव मोदी घोटाले जैसे बड़े फ्रॉड के बाद अपनी साख बहाल करने में जुटा है। दो अलग-अलग मामलों में — 2017 में ₹82.11 करोड़ और अब ₹105.44 करोड़ — एक ही कंपनी का बार-बार जांच के घेरे में आना यह सवाल उठाता है कि बैंकों की आंतरिक निगरानी प्रणाली पहली बार की चूक के बाद भी क्यों चूकती रही। असली जवाबदेही तब होगी जब अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी सार्वजनिक हो।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने एनसीएस शुगर्स पर छापे क्यों मारे?
सीबीआई ने एनसीएस शुगर्स लिमिटेड द्वारा पंजाब नेशनल बैंक के साथ किए गए कथित ₹105.44 करोड़ के लोन फ्रॉड की जांच के तहत यह छापेमारी की। आरोप है कि कंपनी ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण लिया और राशि का दुरुपयोग किया।
एनसीएस शुगर्स लोन फ्रॉड केस में कितनी जगहों पर तलाशी ली गई?
सीबीआई ने हैदराबाद, विजयनगरम और काकीनाडा में कुल 10 व्यावसायिक और आवासीय ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। इनमें कंपनी की फैक्ट्री, पंजीकृत कार्यालय और निदेशकों की आवासीय संपत्तियाँ शामिल थीं।
एनसीएस शुगर्स पर क्या-क्या आरोप हैं?
कंपनी और उसके निदेशकों पर आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति के दुरुपयोग और जालसाजी के आरोप हैं। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों से ऋण लेकर राशि को निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्यों के बजाय अन्यत्र लगाया गया।
क्या एनसीएस शुगर्स पहले भी सीबीआई जांच में रही है?
हाँ, 2017 में भी सीबीआई ने एनसीएस शुगर्स के कम से कम दो अधिकारियों के खिलाफ 'प्रोजेक्ट एंड इक्विपमेंट कॉर्पोरेशन' के साथ ₹82.11 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का अलग मामला दर्ज किया था। यह कंपनी का दूसरा बड़ा वित्तीय घोटाला है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सीबीआई अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच करेगी। एजेंसी धन के हेरफेर का पूरा खाका तैयार करेगी और प्राथमिकी में उल्लिखित अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
राष्ट्र प्रेस
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