सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: एनसीएस शुगर्स के ₹105.44 करोड़ PNB लोन फ्रॉड में हैदराबाद-विजयनगरम के 10 ठिकानों पर छापे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार, 31 जुलाई को एनसीएस शुगर्स लिमिटेड द्वारा पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के साथ किए गए कथित ₹105.44 करोड़ के लोन फ्रॉड मामले में हैदराबाद, विजयनगरम और काकीनाडा में एक साथ 10 व्यावसायिक और आवासीय ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस छापेमारी में बड़ी संख्या में दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए।
तलाशी अभियान का दायरा
एजेंसी के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 10 स्थानों पर एक साथ चलाए गए इस अभियान में एनसीएस शुगर्स लिमिटेड के निदेशकों से जुड़ी फैक्ट्री, पंजीकृत कार्यालय और आवासीय संपत्तियाँ शामिल थीं। सीबीआई ने बताया कि तलाशी के दौरान जांच से संबंधित आवश्यक अभिलेखों सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद कर जब्त किए गए।
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि जब्त सामग्री की जांच तीन उद्देश्यों से की जा रही है — आपराधिक षड्यंत्र का पूरा दायरा उजागर करना, धन के हेरफेर और उसकी आवाजाही का पता लगाना, तथा इस मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्ट भूमिका निर्धारित करना।
मामले की पृष्ठभूमि
चेन्नई स्थित पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत के आधार पर बेंगलुरु में सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच में एनसीएस शुगर्स लिमिटेड, उसके निदेशकों और अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, संपत्ति के दुरुपयोग और जालसाजी के आरोप लगाए गए हैं।
आरोपों का स्वरूप
आरोप है कि आरोपियों ने ऋणदाता बैंक को फर्जी दस्तावेज असली बताकर सौंपे और उनके आधार पर ऋण सुविधाएँ प्राप्त कीं। बाद में लोन की राशि को निर्धारित व्यावसायिक उद्देश्यों में लगाने के बजाय अन्यत्र उपयोग किया गया और उसका दुरुपयोग किया गया। आरोपी कंपनी बैंक का बकाया चुकाने में विफल रही, जिससे उसके लोन खाते अनियमित/डिफॉल्ट श्रेणी में आ गए और PNB को ₹105.44 करोड़ का नुकसान हुआ।
एनसीएस शुगर्स का पुराना रिकॉर्ड
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एनसीएस शुगर्स सीबीआई की जांच के घेरे में आई है। 2017 में भी सीबीआई ने कंपनी के कम से कम दो अधिकारियों के खिलाफ 'प्रोजेक्ट एंड इक्विपमेंट कॉर्पोरेशन' के साथ ₹82.11 करोड़ की कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक अलग मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। यानी यह कंपनी दो अलग-अलग बड़े वित्तीय घोटालों में संदिग्ध के रूप में सामने आ चुकी है।
आगे की जांच
सीबीआई की बैंकिंग सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच करेगी। जांच का अगला चरण यह तय करेगा कि क्या मामले में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आती है, जिनका उल्लेख प्राथमिकी में किया गया है।