मुहूर्त ट्रेडिंग 2026: विशेषज्ञों की सलाह — चयनित शेयरों में निवेश करें, आक्रामक दांव से बचें
सारांश
मुख्य बातें
दिवाली पर 7 नवंबर 2026 (रविवार) को आयोजित होने वाले पारंपरिक मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र से पहले बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को सतर्कता बरतने की स्पष्ट सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, संवत 2083 की शुरुआत को भले ही शुभ माना जाता हो, लेकिन केवल भावनात्मक उत्साह या परंपरा के आधार पर लिए गए जल्दबाजी के निवेश निर्णय नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। बाजार के प्रमुख सूचकांक हालिया तेज़ रैली के बाद महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तरों के करीब पहुँच चुके हैं, जिससे इस सीमित-अवधि के सत्र में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है।
बाजार की मौजूदा स्थिति
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी इस समय 24,600 के आसपास कारोबार कर रहा है। विशेषज्ञों ने 24,350 को निकटतम समर्थन (सपोर्ट) स्तर और 24,700 से 24,800 के दायरे को प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) क्षेत्र बताया है। मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान सीमित समय और अपेक्षाकृत कम तरलता (लिक्विडिटी) के चलते कीमतों में तेज़ बदलाव संभव है।
यह ऐसे समय में आया है जब बाजार लगातार छह कारोबारी सत्रों की बढ़त दर्ज कर चुका है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि इस तेज़ी के बाद मुनाफावसूली का दबाव भी बन सकता है।
मूल्यांकन और आय अनुमान
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के अनुसार, निफ्टी वर्तमान में लगभग 17.5 गुना अनुमानित आय (फॉरवर्ड अर्निंग्स) पर कारोबार कर रहा है, जो इसके दीर्घकालिक औसत से करीब 16 प्रतिशत कम है — एक संकेत जो निफ्टी के मूल्यांकन को आकर्षक श्रेणी में रखता है। हालाँकि स्मॉलकैप शेयर अब भी अपने ऐतिहासिक औसत मूल्यांकन से करीब 25 प्रतिशत प्रीमियम पर कारोबार कर रहे हैं, जो सावधानी का संकेत है।
आय वृद्धि के मोर्चे पर ब्रोकरेज का अनुमान है कि निफ्टी की प्रति शेयर आय (EPS) वित्त वर्ष 2026 में 5 प्रतिशत बढ़ने के बाद वित्त वर्ष 2027 और 2028 में क्रमशः 16 प्रतिशत और 14 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।
संवत 2083 के लिए विशेषज्ञों की पसंदीदा क्षेत्र
विशेषज्ञों ने संवत 2083 के लिए कई क्षेत्रों को अनुकूल बताया है। इनमें बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, पूंजी बाजार, विनिर्माण, वैश्विक आउटसोर्सिंग, निर्यात आधारित व्यवसाय, उपभोक्ता क्षेत्र और डिजिटल कारोबार प्रमुख हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य उपकरण, एयरोस्पेस, ऑटो कंपोनेंट्स, सक्रिय औषधीय सामग्री (API), परिधान उद्योग, पोर्ट लॉजिस्टिक्स, संगठित आभूषण कारोबार और क्विक-कॉमर्स में भी अवसर देखे जा रहे हैं।
जोखिम कारक और वैश्विक संकेत
विश्लेषकों ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की कमजोरी निकट अवधि में निवेशकों की धारणा पर असर डाल सकते हैं। बड़े ऑर्डर या अत्यधिक आक्रामक ट्रेडिंग से बचने की स्पष्ट सलाह दी गई है।
इसके बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की वापसी और बेहतर कॉर्पोरेट नतीजे भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक दीर्घकालिक आधार बना रहे हैं।
नए निवेशकों के लिए मार्गदर्शन
नए निवेशकों को सलाह दी गई है कि वे केवल शुभ अवसर की भावना से किसी शेयर में निवेश न करें। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों में छोटी राशि से शुरुआत करें और दीर्घकालिक नजरिया बनाए रखें। लंबी अवधि के निवेशकों को एसेट एलोकेशन की समीक्षा कर चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाने का सुझाव दिया गया है।
संक्षेप में, विशेषज्ञों का संदेश स्पष्ट है — मुहूर्त ट्रेडिंग का सांकेतिक और परंपरागत महत्व है, लेकिन निवेश का निर्णय सदैव तथ्यों, बुनियादी विश्लेषण और जोखिम क्षमता के आधार पर ही लेना चाहिए।