पुरी में 27 पीएम श्री स्कूलों के छात्रों ने मॉडल संसद में सीखी लोकतांत्रिक प्रक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के पुरी में 7 नवंबर को पुरी टाउन हॉल में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित 'मॉडल संसद' कार्यक्रम में जिले के 27 पीएम श्री स्कूलों के चयनित विद्यार्थियों ने संसदीय कार्यप्रणाली को व्यावहारिक रूप से समझा। पुरी के सांसद डॉ. संबित पात्रा इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के प्रति जागरूकता पैदा करना था।
मुख्य घटनाक्रम
इस आयोजन में छात्रों ने विपक्ष और ट्रेजरी बेंच दोनों की भूमिकाएँ निभाईं और लोकतंत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया। उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि विपक्ष की भूमिका निभाने वाले छात्रों ने भी सहयोगात्मक रवैया अपनाया और हर विषय पर रचनात्मक चर्चा में भाग लिया। इस प्रकार छात्रों ने संसद में स्वस्थ एवं सार्थक बहस के महत्व को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया।
सांसद डॉ. संबित पात्रा की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम के बाद डॉ. संबित पात्रा ने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों ने मॉडल संसद में सभी विषयों को 'बहुत अच्छे तरीके से प्रस्तुत किया।' उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि कार्यक्रम में विपक्ष की भूमिका भी सहयोगात्मक रही और प्रत्येक विषय पर विस्तृत चर्चा हुई।
पात्रा ने कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ विद्यार्थियों में लोकतांत्रिक सोच और स्वस्थ बहस की संस्कृति विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि पुरी के इस मॉडल संसद कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र को बचाए रखना ज़रूरी है।
लोकतंत्र और विकसित भारत का संदेश
सांसद ने कहा कि लोकतंत्र के रास्ते से ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि देश में अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि 'अराजकता हमेशा तोड़ने का काम करती है, जोड़ने का नहीं।' यह कार्यक्रम ऐसे समय में आया है जब देशभर में युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से जोड़ने की मुहिम तेज़ हो रही है।
पीएम श्री स्कूलों की भूमिका
गौरतलब है कि पीएम श्री योजना के तहत चयनित स्कूलों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक और समग्र शिक्षा प्रदान करने के लिए विकसित किया जा रहा है। पुरी जिले में 27 ऐसे स्कूल हैं, जिनके चयनित विद्यार्थियों ने इस अनूठे कार्यक्रम में प्रतिभागिता की। इस तरह के प्रयोग छात्रों को पाठ्यपुस्तकों से परे संविधान और संसदीय परंपराओं की व्यावहारिक समझ देते हैं।
आगे की राह
जिला प्रशासन के इस पहल को शिक्षा जगत में सकारात्मक दृष्टि से देखा जा रहा है। यदि इस प्रारूप को अन्य जिलों में भी दोहराया जाए, तो यह राज्यभर के विद्यार्थियों में नागरिक चेतना और संसदीय लोकतंत्र के प्रति रुचि जगाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।