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दिल्ली विधानसभा में राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद: बच्चों ने उठाए प्रदूषण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे

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दिल्ली विधानसभा में राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद: बच्चों ने उठाए प्रदूषण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे

सारांश

दिल्ली विधानसभा में 7 अक्टूबर को हुई राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद में 7 से 17 वर्ष के बच्चों ने विधायकों की सीटों पर बैठकर प्रदूषण, जल संरक्षण और जलवायु परिवर्तन पर बहस की। अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इसे युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव देने की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद का आयोजन 7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली विधानसभा में किया गया।
7 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों ने प्रदूषण, जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता और घटते हरित क्षेत्रों पर बहस की।
एक छात्रा ने अध्यक्ष की भूमिका निभाई; अन्य ने मंत्री, सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के नेताओं की भूमिकाएँ अदा कीं।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बच्चों की तथ्य-आधारित और अनुशासित चर्चाओं की सराहना की।
गुप्ता ने कहा कि आज के निर्णय भावी पीढ़ियों की दुनिया तय करेंगे और पर्यावरण संरक्षण सीधे मानव जीवन से जुड़ा है।

राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद के तहत 7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली विधानसभा में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें 7 से 17 वर्ष की आयु के बच्चों ने विधायकों की सीटों पर बैठकर प्रदूषण, जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे ज्वलंत विषयों पर बहस की। विभिन्न राज्यों से आए इन युवा प्रतिनिधियों ने संसदीय प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव लेते हुए लोकतंत्र की नींव को करीब से समझा।

सत्र का स्वरूप और प्रतिभागिता

इस अनूठे आयोजन में देशभर के विभिन्न राज्यों के युवा प्रतिभागियों को एक मंच पर लाया गया। एक छात्रा ने अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और सदन की कार्यवाही का संचालन किया, जबकि अन्य प्रतिभागियों ने मंत्रिमंडल मंत्रियों, सत्तारूढ़ दल के सदस्यों और विपक्ष के नेताओं की भूमिकाएँ निभाईं। बच्चों ने प्रदूषण, जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता, घटते हरित क्षेत्रों और जिम्मेदार नागरिकता जैसे विषयों पर आत्मविश्वास के साथ अपने विचार प्रस्तुत किए।

विधानसभा अध्यक्ष की सराहना

दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बच्चों की तथ्य-आधारित, अनुशासित और शांतिपूर्ण चर्चाओं की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का मंच है, और युवा प्रतिभागियों ने प्रश्न पूछने, विभिन्न दृष्टिकोणों को सुनने तथा अपने तर्कों को तार्किक रूप से प्रस्तुत करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। गुप्ता ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र केवल अपने विचार व्यक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि असहमति को समझना और संवाद के माध्यम से समाधान की ओर बढ़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पर्यावरण और भावी पीढ़ी पर चिंता

अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस बात पर बल दिया कि पर्यावरण संरक्षण सीधे तौर पर मानव जीवन से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा के लिए वृक्षों का संरक्षण अनिवार्य है, जबकि जल उपलब्धता और घटता हरित आवरण भावी पीढ़ियों के लिए प्रमुख चुनौतियाँ बनी हुई हैं। गुप्ता ने कहा कि आज लिए जाने वाले निर्णय यह निर्धारित करेंगे कि आने वाली पीढ़ियाँ किस प्रकार की दुनिया विरासत में पाएँगी।

बाल संसद के आयोजन का उद्देश्य

गुप्ता ने स्पष्ट किया कि विधानसभा कक्ष के भीतर बाल संसद का आयोजन करने का निर्णय युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव देने के उद्देश्य से लिया गया था। उन्होंने कहा कि किताबें और परीक्षाएँ महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखना भी उतना ही आवश्यक है। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ जब देश में पर्यावरण शिक्षा और युवा भागीदारी को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

आगे की राह

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि नीति-निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं की सक्रिय भागीदारी न केवल संभव है, बल्कि आवश्यक भी है। गौरतलब है कि देश के विभिन्न हिस्सों में इस प्रकार की बाल संसदें आयोजित होती रही हैं, लेकिन दिल्ली विधानसभा जैसे प्रतिष्ठित मंच पर इसका आयोजन युवा पर्यावरण चेतना को एक नई दिशा दे सकता है। उम्मीद है कि इस पहल से प्रेरित होकर और अधिक राज्य ऐसे आयोजन करेंगे, जहाँ बच्चे पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद कर सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक दिन की संसदीय नाटकीयता और दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव के बीच की खाई को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। दिल्ली, जो देश के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है, वहाँ की विधानसभा में बच्चों का प्रदूषण पर बहस करना एक तीखी विडंबना है। असली सवाल यह है कि इन युवा आवाज़ों को सुनने के बाद नीति-निर्माता क्या ठोस कदम उठाएंगे — क्योंकि जागरूकता बढ़ाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना दो अलग-अलग चीज़ें हैं।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद क्या है?
राष्ट्रीय पर्यावरण बाल संसद एक ऐसी पहल है जिसमें विभिन्न राज्यों के बच्चों को वास्तविक विधानसभा या संसदीय कक्ष में पर्यावरण और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर बहस करने का अवसर दिया जाता है। इसका उद्देश्य युवाओं को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।
7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली विधानसभा में बाल संसद में किन मुद्दों पर बहस हुई?
इस सत्र में बच्चों ने प्रदूषण, जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छता, घटते हरित क्षेत्रों और जिम्मेदार नागरिकता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने इन मुद्दों पर तथ्य-आधारित और अनुशासित ढंग से चर्चा की।
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बाल संसद पर क्या कहा?
अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बच्चों की चर्चाओं की सराहना करते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल विचार व्यक्त करने तक सीमित नहीं, बल्कि असहमति को समझना और संवाद से समाधान निकालना भी उसका हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण सीधे मानव जीवन से जुड़ा है और आज के निर्णय भावी पीढ़ियों की दुनिया तय करेंगे।
बाल संसद में बच्चों ने कौन-कौन सी भूमिकाएँ निभाईं?
एक छात्रा ने अध्यक्ष की भूमिका निभाई और सदन की कार्यवाही का संचालन किया। अन्य प्रतिभागियों ने मंत्रिमंडल मंत्रियों, सत्तारूढ़ दल के सदस्यों और विपक्ष के नेताओं की भूमिकाएँ अदा कीं।
इस तरह की बाल संसद का महत्व क्यों है?
ऐसे आयोजन बच्चों को संसदीय बहस की कार्यप्रणाली का प्रत्यक्ष अनुभव देते हैं और उन्हें पर्यावरण व सामाजिक मुद्दों पर सोचने-समझने के लिए प्रेरित करते हैं। यह पहल युवा पीढ़ी में लोकतांत्रिक मूल्यों और पर्यावरण चेतना को जड़ से मज़बूत करने का प्रयास है।
राष्ट्र प्रेस
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