बिहार में पहला सरकारी-अनुदानित लिवर ट्रांसप्लांट: ₹15 लाख की मदद से तीन मरीजों को मिली नई जिंदगी
सारांश
मुख्य बातें
पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में 7 नवंबर 2026 को बिहार का पहला सरकारी-अनुदानित लिवर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की पहल पर राज्य सरकार ने प्रति मरीज ₹15 लाख का अनुदान उपलब्ध कराया, जिससे आर्थिक रूप से कमज़ोर मरीजों के लिए यह जीवनरक्षक उपचार संभव हो सका। इस ऐतिहासिक उपलब्धि की नींव पटना के 16 वर्षीय मोनू कुमार के परिजनों के साहसी अंगदान के निर्णय पर टिकी है।
मुख्य घटनाक्रम
सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद मोनू कुमार को आईजीआईएमएस में उपचार के दौरान ब्रेन डेड घोषित किया गया। इस अत्यंत कठिन परिस्थिति में उनके परिजनों ने उनका लिवर और दोनों किडनी दान करने की सहमति दी। इस मानवीय निर्णय से एक साथ तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिला।
मोनू का लिवर आईजीआईएमएस में भर्ती 19 वर्षीय युवती को प्रत्यारोपित किया गया। उनकी दोनों किडनियाँ भी दान में दी गईं — एक का प्रत्यारोपण आईजीआईएमएस में और दूसरी का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), पटना में सफलतापूर्वक किया गया।
सरकारी अनुदान की भूमिका
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने आईजीआईएमएस के निदेशक और लिवर प्रत्यारोपण विभाग के विभागाध्यक्ष को पूर्व घोषित नीति के अनुरूप ₹15 लाख प्रति मरीज अनुदान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लिवर प्रत्यारोपण जैसी जटिल चिकित्सा प्रक्रिया की लागत अधिकांश मध्यम और निम्न-आय वर्ग के परिवारों की पहुँच से बाहर होती है। गौरतलब है कि यह बिहार में सरकारी वित्तीय सहायता से संपन्न होने वाला पहला ऐसा प्रत्यारोपण है।
संस्थागत सहयोग और टीम की भूमिका
इस जटिल प्रक्रिया को सफल बनाने में कई संस्थाओं का समन्वित प्रयास रहा। इनमें आईजीआईएमएस की ब्रेन डेथ कमेटी, एसओटीटीओ बिहार, एनओटीटीओ दिल्ली, आरओटीटीओ कोलकाता तथा आईजीआईएमएस और एम्स, पटना की चिकित्सकीय टीमें शामिल थीं। प्रत्यारोपण के बाद आईजीआईएमएस की टीम ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से उनके कार्यालय में मुलाकात की, जहाँ मंत्री ने पूरी टीम की सराहना की।
स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने भी चिकित्सकीय दल के प्रयासों को सराहनीय बताया। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार की स्वास्थ्य अवसंरचना को लेकर विशेषज्ञों में लंबे समय से बहस चल रही है।
आम जनता पर असर
स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी भी जरूरतमंद मरीज को जीवनरक्षक उपचार से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने मोनू कुमार के परिजनों के निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि 'अंगदान महादान है'। सरकार का लक्ष्य राज्य में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना और अंगदान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है।
क्या होगा आगे
इस सफलता के बाद बैठक में बिहार के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी लिवर प्रत्यारोपण जैसी जटिल चिकित्सा सुविधाएँ शुरू करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसमें आवश्यक संसाधनों, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और संस्थागत क्षमता विकसित करने पर विचार किया गया। यदि यह विस्तार योजना मूर्त रूप लेती है, तो बिहार के मरीजों को उन्नत अंग प्रत्यारोपण सेवाओं के लिए दिल्ली या मुंबई जाने की ज़रूरत कम पड़ेगी।