मध्य प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट को मिला नया बल: डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने AIIMS भोपाल से की विस्तृत चर्चा

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मध्य प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट को मिला नया बल: डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने AIIMS भोपाल से की विस्तृत चर्चा

सारांश

मध्य प्रदेश सरकार ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट को नई गति देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने AIIMS भोपाल से आयुष्मान भारत में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट जोड़ने, डिजिटल प्लेटफॉर्म और रोबोटिक सर्जरी पर चर्चा की — यह पहल लाखों प्रतीक्षारत मरीज़ों के लिए उम्मीद की किरण है।

मुख्य बातें

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने 6 मई 2026 को AIIMS भोपाल के प्रतिनिधिमंडल के साथ ऑर्गन ट्रांसप्लांट विस्तार पर विस्तृत बैठक की।
आयुष्मान भारत योजना में किडनी ट्रांसप्लांट पैकेज बढ़ाने और हार्ट व लंग ट्रांसप्लांट शामिल करने पर विचार।
ऑर्गन डोनर्स को 'गार्ड ऑफ ऑनर' और उनके परिजनों को 26 जनवरी व 15 अगस्त पर सार्वजनिक सम्मान दिया जा रहा है।
शासकीय अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के बीच साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव रखा गया।
रोबोटिक सर्जरी के विस्तार पर चर्चा; ब्रेन-डेड डोनर पहचान और त्वरित रेफरल प्रणाली को मज़बूत करने पर सहमति।
मधाबानंद कर सहित AIIMS प्रतिनिधिमंडल को उप मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया।

मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 6 मई 2026 को भोपाल में एम्स (AIIMS) भोपाल के प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्य में ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण पर विस्तृत चर्चा की। शुक्ल ने स्पष्ट किया कि अंग प्रत्यारोपण पर राज्य सरकार का विशेष जोर इसलिए है क्योंकि यह प्रयास अनेक लोगों की जिंदगी में निर्णायक बदलाव ला सकता है।

ऑर्गन डोनर्स को सम्मान और प्रोत्साहन

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि प्रदेश में ऑर्गन डोनर्स को 'गार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान किया जा रहा है और उनके परिजनों को 26 जनवरी एवं 15 अगस्त के अवसर पर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाता है। यह पहल डोनर परिवारों में गर्व की भावना जगाने और समाज में अंगदान की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की जा रही है।

शुक्ल ने कहा कि आमजन में ऑर्गन डोनेशन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर जन-जागरूकता अभियान, कार्यशालाएँ एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोग इस पुनीत कार्य से जुड़ सकें।

आयुष्मान भारत में किडनी, हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट शामिल करने पर विचार

बैठक में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किडनी ट्रांसप्लांट पैकेज में वृद्धि करने तथा हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांट को इस योजना में शामिल करने के विषय पर गहन चर्चा हुई। यह कदम उन गरीब और मध्यम वर्गीय मरीज़ों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, जो महंगे प्रत्यारोपण ऑपरेशन का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और रोबोटिक सर्जरी पर जोर

अंग प्राप्ति प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए संभावित ब्रेन-डेड डोनर्स की समय पर पहचान एवं त्वरित रेफरल प्रणाली को मजबूत करने पर तकनीकी सहयोग के विषयों पर विमर्श किया गया। इस दिशा में प्रदेश के शासकीय अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव भी रखा गया।

बैठक में प्रत्यारोपण सर्जरी में आधुनिक तकनीकों, विशेष रूप से रोबोटिक सर्जरी के विस्तार पर भी चर्चा हुई, जिससे उपचार की गुणवत्ता और सफलता दर में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। गौरतलब है कि रोबोटिक सर्जरी से जटिल प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं में सटीकता बढ़ती है और मरीज़ की रिकवरी तेज़ होती है।

AIIMS भोपाल की उपलब्धियों की सराहना

उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने एम्स द्वारा अब तक की गई हार्ट ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट एवं लंग ट्रांसप्लांट सेवाओं की प्रगति की सराहना की। उन्होंने निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर सहित समस्त प्रतिनिधिमंडल को सम्मानित किया और राज्य सरकार की ओर से इन सेवाओं के विस्तार हेतु पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।

आगे की राह

शुक्ल ने कहा कि बैठक में प्राप्त सुझावों पर शीघ्र यथोचित कार्यवाही की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में अंगदान की दर अभी भी विश्व औसत से काफी कम है और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में ट्रांसप्लांट इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करना लाखों प्रतीक्षारत मरीज़ों के लिए जीवनदायी साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी। भारत में प्रति दस लाख जनसंख्या पर अंगदान दर अभी भी एक से कम है, जबकि स्पेन जैसे देशों में यह 40 से अधिक है — यह अंतर केवल जागरूकता का नहीं, बल्कि तंत्र और विश्वास का भी है। आयुष्मान भारत में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट जोड़ना महत्वाकांक्षी है, लेकिन बिना पर्याप्त प्रशिक्षित जनशक्ति और समयबद्ध क्रियान्वयन के यह घोषणा कागज़ी रह सकती है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और रोबोटिक सर्जरी के सुझाव स्वागतयोग्य हैं, पर इनके लिए ठोस बजट आवंटन और जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए क्या नई पहल की जा रही है?
मध्य प्रदेश सरकार ने AIIMS भोपाल के साथ मिलकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट गतिविधियों के विस्तार की योजना बनाई है। इसमें आयुष्मान भारत योजना में हार्ट व लंग ट्रांसप्लांट शामिल करना, डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करना और रोबोटिक सर्जरी का विस्तार शामिल है।
आयुष्मान भारत में हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट कब शामिल होंगे?
6 मई 2026 की बैठक में इस विषय पर चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक तिथि घोषित नहीं की गई है। डिप्टी सीएम शुक्ल ने कहा कि प्राप्त सुझावों पर शीघ्र यथोचित कार्यवाही की जाएगी।
ऑर्गन डोनर्स को मध्य प्रदेश में कैसे सम्मानित किया जाता है?
मध्य प्रदेश सरकार ऑर्गन डोनर्स को 'गार्ड ऑफ ऑनर' प्रदान करती है और उनके परिजनों को 26 जनवरी एवं 15 अगस्त के अवसर पर सार्वजनिक समारोहों में सम्मानित किया जाता है। यह पहल अंगदान की संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई है।
AIIMS भोपाल की बैठक में ब्रेन-डेड डोनर के संदर्भ में क्या चर्चा हुई?
बैठक में संभावित ब्रेन-डेड डोनर्स की समय पर पहचान और त्वरित रेफरल प्रणाली को मज़बूत करने पर तकनीकी सहयोग के विषयों पर विमर्श हुआ। शासकीय अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के बीच एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने का सुझाव भी रखा गया।
AIIMS भोपाल के निदेशक कौन हैं और उन्हें इस बैठक में क्यों सम्मानित किया गया?
AIIMS भोपाल के निदेशक प्रो. डॉ. मधाबानंद कर हैं। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने उन्हें और समस्त प्रतिनिधिमंडल को एम्स द्वारा अब तक की गई ऑर्गन ट्रांसप्लांट सेवाओं और जागरूकता गतिविधियों के लिए सम्मानित किया।
राष्ट्र प्रेस
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