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शिवानी के अंगदान से तीन लोगों को मिला जीवन, CM मोहन यादव ने परिवार को किया नमन

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शिवानी के अंगदान से तीन लोगों को मिला जीवन, CM मोहन यादव ने परिवार को किया नमन

सारांश

सड़क दुर्घटना में ब्रेन डेड हुईं नर्मदापुरम की शिवानी के परिवार ने गहरे दुख में भी अंगदान का निर्णय लेकर तीन लोगों को जीवनदान दिया। CM मोहन यादव ने परिवार को नमन किया और मध्य प्रदेश पुलिस ने पैतृक गाँव में 'गार्ड ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया — ग्रामीण भारत में अंगदान जागरूकता का एक विरल और प्रेरक उदाहरण।

मुख्य बातें

नर्मदापुरम की बिलाश टांटी शर्मा (शिवानी) सड़क दुर्घटना में ब्रेन डेड होने के बाद इस दुनिया से विदा हुईं।
परिजनों के अंगदान के निर्णय से तीन लोगों को नई ज़िंदगी मिली।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 16 अक्टूबर 2026 को शिवानी के परिवार की सराहना की और अंगदान महाअभियान की अपील की।
मध्य प्रदेश पुलिस ने पैतृक गाँव खापा खुर्द में 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर परिवार को सम्मानित किया।
यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में अंगदान के प्रति बढ़ती जागरूकता का प्रेरक उदाहरण मानी जा रही है।

मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के ग्राम खापा खुर्द (बनखेड़ी) निवासी बिलाश टांटी शर्मा (शिवानी) एक सड़क दुर्घटना में ब्रेन डेड हो जाने के बाद इस दुनिया से चली गईं, लेकिन उनके परिजनों के साहसी निर्णय ने तीन अनजान लोगों को नई ज़िंदगी दे दी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 16 अक्टूबर 2026 को शिवानी के परिवार की भावभीनी प्रशंसा करते हुए इस मानवीय पहल को नमन किया।

मुख्य घटनाक्रम

जानकारी के अनुसार, सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल शिवानी को एम्स भोपाल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। गहरे दुख की उस घड़ी में परिवार ने अंगदान का ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिसके फलस्वरूप तीन लोगों की जान बच सकी और उनके जीवन में नई उम्मीद की किरण जगी।

राज्य सरकार के निर्देश पर मध्य प्रदेश पुलिस ने शिवानी के पैतृक गाँव खापा खुर्द में उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर असाधारण सम्मान प्रदान किया। यह सम्मान न केवल एक परिवार के बलिदान को मान्यता देता है, बल्कि पूरे समाज को अंगदान के प्रति प्रेरित करने का संदेश भी देता है।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह एक अत्यंत भावुक और विरल क्षण था, जब एम्स भोपाल में अपने प्रियजन के अंगदान के माध्यम से कई ज़िंदगियों को नई उम्मीद देने वाले दानदाता परिवार को उनके पैतृक गाँव में मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने आगे कहा — 'जिस परिवार ने अपार दुख की घड़ी में भी दूसरों को जीवन देने का महान निर्णय लिया, उसके इस त्याग और मानवता के प्रति समर्पण को मिला यह सम्मान वास्तव में हृदय को भावविभोर कर देता है।'

यादव ने यह भी कहा कि अंगदान केवल अंगों का दान नहीं, बल्कि किसी के बुझते हुए संसार में आशा का दीप जलाना है। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार और मध्य प्रदेश पुलिस की इस संवेदनशील पहल के लिए आभार व्यक्त किया।

आम जनता पर असर

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील करते हुए कहा कि सभी मिलकर अंगदान के इस महाअभियान को आगे बढ़ाएं, ताकि हर जीवन को जीने का एक और अवसर मिल सके। यह घटना दर्शाती है कि अंगदान के प्रति जागरूकता अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव ला रही है।

गौरतलब है कि भारत में अंगदाताओं की संख्या अभी भी ज़रूरत के अनुपात में बेहद कम है। ऐसे में ग्रामीण पृष्ठभूमि के एक परिवार का यह कदम समाज में एक व्यापक संदेश देता है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारें देशभर में अंगदान जागरूकता अभियान तेज़ कर रही हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा में रहते हैं, लेकिन पर्याप्त जागरूकता के अभाव और परिवारों की झिझक के कारण अंगदान के मामले सीमित रहते हैं। शिवानी के परिवार जैसे उदाहरण समाज की सोच बदलने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संकल्प लिया है कि मध्य प्रदेश सरकार अंगदान को बढ़ावा देने के लिए जन-जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाएगी। शिवानी का यह महादान तीन परिवारों की ज़िंदगी बदल चुका है और आने वाले समय में यह कहानी अनेक परिवारों को इसी राह पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ अंगदान को लेकर सामाजिक और धार्मिक संकोच अक्सर बाधा बनता है। मुख्यमंत्री की प्रशंसा और पुलिस का 'गार्ड ऑफ ऑनर' एक सकारात्मक नीतिगत संकेत है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह सम्मान एक व्यवस्थित जागरूकता अभियान में बदलता है या केवल एक भावनात्मक क्षण बनकर रह जाता है। भारत में अंगदाताओं की संख्या प्रति दस लाख जनसंख्या पर अभी भी विकसित देशों से कई गुना कम है। एकल परिवार को सम्मानित करना प्रेरक है, किंतु नीति-स्तर पर ग्रामीण अस्पतालों में ब्रेन-डेथ प्रोटोकॉल और अंगदान पंजीकरण को सुलभ बनाए बिना यह बदलाव सीमित ही रहेगा।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवानी कौन थीं और उनका अंगदान कैसे हुआ?
शिवानी का पूरा नाम बिलाश टांटी शर्मा था और वे मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले के ग्राम खापा खुर्द (बनखेड़ी) की निवासी थीं। एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें एम्स भोपाल में ब्रेन डेड घोषित किया गया, जिसके बाद उनके परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया।
शिवानी के अंगदान से कितने लोगों को फायदा हुआ?
शिवानी के अंगदान से तीन लोगों को नई ज़िंदगी मिली। उनके परिजनों के इस निर्णय ने तीन परिवारों में उम्मीद की नई किरण जगाई।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिवानी के परिवार की प्रशंसा क्यों की?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि अपार दुख की घड़ी में अंगदान का निर्णय लेना मानवता और परोपकार की विरल मिसाल है। उन्होंने इसे 'आशा का दीप जलाना' बताया और परिवार के त्याग को सम्मान दिया।
मध्य प्रदेश पुलिस ने परिवार को 'गार्ड ऑफ ऑनर' क्यों दिया?
राज्य सरकार के निर्देश पर मध्य प्रदेश पुलिस ने शिवानी के पैतृक गाँव खापा खुर्द में उनके परिवार को 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर सम्मानित किया। यह सम्मान परिवार के बलिदान और अंगदान के प्रति समर्पण को सरकारी मान्यता देने के लिए दिया गया।
अंगदान को लेकर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से क्या अपील की?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे सब मिलकर अंगदान के महाअभियान को आगे बढ़ाएं, ताकि हर जीवन को जीने का एक और अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि अंगदान के प्रति जागरूकता अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव ला रही है।
राष्ट्र प्रेस
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