काजल राठौड़ का अंगदान: ब्रेन डेड 24 वर्षीया ने मृत्यु के बाद दिया कई मरीजों को जीवन, डिप्टी सीएम संघवी ने सराहा
सारांश
मुख्य बातें
गांधीनगर के जीएमईआरएस सिविल अस्पताल में गुरुवार, 19 जून को 24 वर्षीया काजल राठौड़ को ब्रेन डेथ घोषित किया गया। गहरे शोक में डूबे परिजनों ने साहस का परिचय देते हुए काजल के अंगों को दान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, ताकि उनकी बेटी की मृत्यु के बाद भी कई ज़िंदगियाँ रोशन हो सकें। ग्रीन कॉरिडोर की मदद से अंगों को तत्काल अहमदाबाद सिविल अस्पताल पहुँचाया गया।
अंगदान का निर्णय और चिकित्सीय प्रक्रिया
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, काजल की किडनी, अग्न्याशय और लीवर प्रत्यारोपण के योग्य पाए गए। परिवार की सहमति मिलते ही चिकित्सा दल ने अंगदान की प्रक्रिया शुरू की। अंग प्रत्यारोपण में समय की अत्यधिक महत्ता को देखते हुए जीएमईआरएस अस्पताल के अधिकारियों ने तुरंत गांधीनगर जिला पुलिस से संपर्क कर ग्रीन कॉरिडोर बनाने की अनुमति माँगी।
यह ऐसे समय में आया जब अंगों की व्यवहार्यता की समय-सीमा तेज़ी से घट रही थी और हर मिनट किसी की ज़िंदगी से जुड़ा था।
ग्रीन कॉरिडोर और पुलिस की भूमिका
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर गांधीनगर और अहमदाबाद के सभी संबंधित पुलिस थानों को तत्काल अलर्ट किया गया। दोनों शहरों की पुलिस ने यातायात प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई और सुनिश्चित किया कि एंबुलेंस बिना किसी बाधा के अपने गंतव्य तक पहुँचे।
अधिकारियों के समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप एंबुलेंस निर्धारित समय पर अहमदाबाद सिविल अस्पताल पहुँच गई और अंगों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण संभव हो सका।
डिप्टी सीएम संघवी की प्रतिक्रिया
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने काजल राठौड़ के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और परिवार के प्रति संवेदनाएँ प्रकट कीं। उन्होंने कहा कि असीम पीड़ा के बावजूद परिजनों ने जो साहस और मानवता का परिचय दिया, वह समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
संघवी ने चिकित्सा दल की भी सराहना की जिन्होंने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। साथ ही उन्होंने गांधीनगर और अहमदाबाद पुलिस के अधिकारियों को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने परिवहन व्यवस्था को निर्बाध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने स्वयं अस्पताल और पुलिस टीम को निर्देश दिए थे कि अंगों को ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से सुरक्षित और समयबद्ध तरीके से पहुँचाया जाए।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि भारत में अंगदान की दर अभी भी विश्व औसत से काफी कम है। ऐसे में काजल राठौड़ के परिवार का यह निर्णय न केवल कुछ मरीजों को नया जीवन देता है, बल्कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी सहायक है।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन डेथ के बाद समय पर लिया गया अंगदान का निर्णय एक साथ कई मरीजों की जान बचा सकता है। काजल के अंगों से मिलने वाला जीवनदान इसी मानवीय संभावना का साक्षात प्रमाण है।
आगे क्या
अहमदाबाद सिविल अस्पताल में प्रत्यारोपण प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। काजल राठौड़ की यह विरासत अंगदान आंदोलन को गुजरात में नई गति दे सकती है।