25 अगस्त 2026
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अहमदाबाद सिविल अस्पताल में डॉ. जागृति ने लौटाई 12 वर्षीय बच्ची की आँखों की रोशनी, पिता ने जताया आभार

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अहमदाबाद सिविल अस्पताल में डॉ. जागृति ने लौटाई 12 वर्षीय बच्ची की आँखों की रोशनी, पिता ने जताया आभार

सारांश

जिसे निजी डॉक्टरों ने नामुमकिन कहा, वह अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में मुमकिन हो गया। डॉ. जागृति ने 12 साल की मेहनत और एक सटीक ऑपरेशन से एक बच्ची को दुनिया दिखा दी — और 41वें नेत्रदान पखवाड़े के मौके पर यह कहानी हज़ारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन गई।

मुख्य बातें

जागृति ने अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 12 वर्षीया बच्ची की दोनों आँखों का सफल उपचार किया, जिसे अन्य डॉक्टर असाध्य बता चुके थे।
बच्ची को 2015 में लगभग एक वर्ष की आयु में अस्पताल लाया गया था; करीब एक वर्ष पूर्व ऑपरेशन के बाद उसकी दृष्टि पूरी तरह बहाल हुई।
बच्ची अब छठी कक्षा में पढ़ रही है और सामान्य जीवन जी रही है।
एमएनजे इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी पश्चिम भारत का सबसे बड़ा नेत्र अस्पताल है — 200 बेड , 150+ रेजिडेंट डॉक्टर ।
41वाँ नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक देशभर में मनाया जा रहा है।
अस्पताल के अनुसार नेत्रगोलकों की कमी के कारण दृष्टिहीनता के अनेक मामले अनुपचारित रहते हैं।

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल स्थित एमएनजे इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जागृति ने वह कर दिखाया जिसे दर्जनों निजी डॉक्टर असंभव बता चुके थे — एक जन्मजात दृष्टिहीन बच्ची को 12 साल की उम्र में पूरी आँखों की रोशनी दे दी। 25 अगस्त 2026 को 41वें नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर बच्ची के पिता ने सरकारी स्वास्थ्य तंत्र और चिकित्सकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

एक पिता की लंबी जद्दोजहद

बच्ची के पिता ने बताया कि उन्होंने अहमदाबाद के कई निजी अस्पतालों में बेटी का इलाज करवाया, लेकिन हर जगह से एक ही जवाब मिला — 'आपकी बच्ची कभी देख नहीं सकती।' हार न मानते हुए वे 2015 में, जब बच्ची लगभग एक वर्ष की थी, उसे अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ले आए। वहाँ डॉ. जागृति ने बच्ची की दोनों आँखों का उपचार किया।

पिता ने कहा, 'आज मेरे बच्चे को यहाँ लाए 12 वर्ष हो गए हैं। जागृति मैडम ने ही इसका इलाज किया है और मैं उनका, इस अस्पताल का और सरकार का बहुत-बहुत शुक्रगुजार हूँ।' यह भावुक स्वीकारोक्ति सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उस भूमिका को रेखांकित करती है जो प्रायः अनदेखी रह जाती है।

बच्ची ने सुनाई अपनी खुशी

अब छठी कक्षा में पढ़ रही 12 वर्षीया बच्ची ने बताया कि उसका ऑपरेशन करीब एक वर्ष पहले हुआ था और अब उसकी नज़र पूरी तरह साफ है। उसने कहा, 'मैं अब अपने दोस्तों के साथ खेल भी सकती हूँ और जो करना चाहती हूँ, सब कुछ कर सकती हूँ।' बच्ची ने डॉ. जागृति को विशेष धन्यवाद दिया।

एमएनजे इंस्टिट्यूट — पश्चिम भारत का सबसे बड़ा नेत्र अस्पताल

एमएनजे इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी पश्चिमी क्षेत्र का सबसे बड़ा नेत्र अस्पताल है। 200 बेड की क्षमता वाले इस संस्थान में सुपर स्पेशियलिटी नेत्र चिकित्सा, मोतियाबिंद सर्जरी, लो विज़न एड्स, ऑर्बिट और ऑकुलोप्लास्टी तथा नेत्र कैंसर जैसी सेवाएँ उपलब्ध हैं। यहाँ 150 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर प्रशिक्षित हैं। राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम (NPCB) के तहत यह संस्थान देशभर के जिला स्तरीय सर्जनों को भी प्रशिक्षण देता है।

41वाँ नेत्रदान पखवाड़ा और जागरूकता अभियान

अस्पताल के एक चिकित्सक ने बताया कि 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक पूरे देश में 41वाँ नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य नेत्रदान के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना और दान की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

चिकित्सक ने बताया कि नेत्रगोलक (आईबॉल) की कमी के कारण दृष्टिहीनता के अनेक मामले अनुपचारित रह जाते हैं। उन्होंने कहा, 'यदि अधिक नेत्रगोलक उपलब्ध हों तो हम अधिक लोगों की दृष्टि बहाल कर सकते हैं। दान किए गए नेत्रगोलकों का उपयोग सर्जरी, शोध और मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में भी होता है।'

आगे की राह

यह मामला इस बात का प्रमाण है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ, जब सक्षम चिकित्सकों के हाथों में हों, तो वे उन परिवारों के लिए अंतिम उम्मीद बन सकती हैं जो निजी अस्पतालों की ऊँची फीस और निराशाजनक निदान के बाद टूट चुके हों। नेत्रदान पखवाड़े के इस आयोजन से यह अपेक्षा है कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लेंगे, जिससे डॉ. जागृति जैसे चिकित्सक और भी कई बच्चों को रोशनी दे सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर संसाधन — खासकर नेत्रगोलकों की उपलब्धता — सीमित हैं। 41वें नेत्रदान पखवाड़े के बावजूद यदि दान की दर नहीं बढ़ी, तो ऐसी सफलता की कहानियाँ अपवाद ही रहेंगी, नियम नहीं। सरकारी नेत्र संस्थानों की क्षमता और नेत्रदान के बीच की यह खाई पाटना ही असली नीतिगत चुनौती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में किस बच्ची की आँखों की रोशनी लौटी?
अहमदाबाद के एक पिता की 12 वर्षीया बेटी, जो जन्म के करीब एक वर्ष बाद से दृष्टिहीन थी, को डॉ. जागृति ने सफल ऑपरेशन के ज़रिए दृष्टि प्रदान की। बच्ची को 2015 में सिविल अस्पताल लाया गया था और करीब एक वर्ष पूर्व उसका ऑपरेशन हुआ।
डॉ. जागृति कौन हैं और वे कहाँ काम करती हैं?
डॉ. जागृति अहमदाबाद के सिविल अस्पताल स्थित एमएनजे इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में नेत्र रोग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने उस बच्ची की दोनों आँखों का उपचार किया जिसे अन्य निजी डॉक्टरों ने असाध्य घोषित कर दिया था।
41वाँ नेत्रदान पखवाड़ा क्या है और यह कब मनाया जाता है?
41वाँ नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक पूरे भारत में मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना है।
एमएनजे इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी की क्या विशेषताएँ हैं?
यह पश्चिम भारत का सबसे बड़ा नेत्र अस्पताल है जिसमें 200 बेड और 150 से अधिक प्रशिक्षित रेजिडेंट डॉक्टर हैं। यहाँ मोतियाबिंद सर्जरी, नेत्र कैंसर, ऑकुलोप्लास्टी और सुपर स्पेशियलिटी नेत्र सेवाएँ उपलब्ध हैं तथा NPCB कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय सर्जनों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
नेत्रदान क्यों ज़रूरी है और दान किए गए नेत्रगोलकों का क्या उपयोग होता है?
नेत्रगोलकों की कमी के कारण दृष्टिहीनता के कई मामले अनुपचारित रह जाते हैं। दान किए गए नेत्रगोलकों का उपयोग कॉर्निया प्रत्यारोपण सर्जरी, चिकित्सा शोध और मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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