अहमदाबाद सिविल अस्पताल में डॉ. जागृति ने लौटाई 12 वर्षीय बच्ची की आँखों की रोशनी, पिता ने जताया आभार
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल स्थित एमएनजे इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जागृति ने वह कर दिखाया जिसे दर्जनों निजी डॉक्टर असंभव बता चुके थे — एक जन्मजात दृष्टिहीन बच्ची को 12 साल की उम्र में पूरी आँखों की रोशनी दे दी। 25 अगस्त 2026 को 41वें नेत्रदान पखवाड़े के अवसर पर बच्ची के पिता ने सरकारी स्वास्थ्य तंत्र और चिकित्सकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
एक पिता की लंबी जद्दोजहद
बच्ची के पिता ने बताया कि उन्होंने अहमदाबाद के कई निजी अस्पतालों में बेटी का इलाज करवाया, लेकिन हर जगह से एक ही जवाब मिला — 'आपकी बच्ची कभी देख नहीं सकती।' हार न मानते हुए वे 2015 में, जब बच्ची लगभग एक वर्ष की थी, उसे अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ले आए। वहाँ डॉ. जागृति ने बच्ची की दोनों आँखों का उपचार किया।
पिता ने कहा, 'आज मेरे बच्चे को यहाँ लाए 12 वर्ष हो गए हैं। जागृति मैडम ने ही इसका इलाज किया है और मैं उनका, इस अस्पताल का और सरकार का बहुत-बहुत शुक्रगुजार हूँ।' यह भावुक स्वीकारोक्ति सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उस भूमिका को रेखांकित करती है जो प्रायः अनदेखी रह जाती है।
बच्ची ने सुनाई अपनी खुशी
अब छठी कक्षा में पढ़ रही 12 वर्षीया बच्ची ने बताया कि उसका ऑपरेशन करीब एक वर्ष पहले हुआ था और अब उसकी नज़र पूरी तरह साफ है। उसने कहा, 'मैं अब अपने दोस्तों के साथ खेल भी सकती हूँ और जो करना चाहती हूँ, सब कुछ कर सकती हूँ।' बच्ची ने डॉ. जागृति को विशेष धन्यवाद दिया।
एमएनजे इंस्टिट्यूट — पश्चिम भारत का सबसे बड़ा नेत्र अस्पताल
एमएनजे इंस्टिट्यूट ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी पश्चिमी क्षेत्र का सबसे बड़ा नेत्र अस्पताल है। 200 बेड की क्षमता वाले इस संस्थान में सुपर स्पेशियलिटी नेत्र चिकित्सा, मोतियाबिंद सर्जरी, लो विज़न एड्स, ऑर्बिट और ऑकुलोप्लास्टी तथा नेत्र कैंसर जैसी सेवाएँ उपलब्ध हैं। यहाँ 150 से अधिक रेजिडेंट डॉक्टर प्रशिक्षित हैं। राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम (NPCB) के तहत यह संस्थान देशभर के जिला स्तरीय सर्जनों को भी प्रशिक्षण देता है।
41वाँ नेत्रदान पखवाड़ा और जागरूकता अभियान
अस्पताल के एक चिकित्सक ने बताया कि 25 अगस्त से 8 सितंबर 2026 तक पूरे देश में 41वाँ नेत्रदान पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य नेत्रदान के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना और दान की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
चिकित्सक ने बताया कि नेत्रगोलक (आईबॉल) की कमी के कारण दृष्टिहीनता के अनेक मामले अनुपचारित रह जाते हैं। उन्होंने कहा, 'यदि अधिक नेत्रगोलक उपलब्ध हों तो हम अधिक लोगों की दृष्टि बहाल कर सकते हैं। दान किए गए नेत्रगोलकों का उपयोग सर्जरी, शोध और मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में भी होता है।'
आगे की राह
यह मामला इस बात का प्रमाण है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ, जब सक्षम चिकित्सकों के हाथों में हों, तो वे उन परिवारों के लिए अंतिम उम्मीद बन सकती हैं जो निजी अस्पतालों की ऊँची फीस और निराशाजनक निदान के बाद टूट चुके हों। नेत्रदान पखवाड़े के इस आयोजन से यह अपेक्षा है कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लेंगे, जिससे डॉ. जागृति जैसे चिकित्सक और भी कई बच्चों को रोशनी दे सकें।