अंगदान में गुजरात के तीन सरकारी अस्पतालों को राष्ट्रीय पुरस्कार, IKDRC ने देश में मारी बाज़ी
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने 12 अगस्त 2026 को घोषणा की कि राज्य के तीन प्रमुख सरकारी अस्पतालों को 3 अगस्त को नई दिल्ली के डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित 16वें इंडियन नेशनल ऑर्गन डोनेशन डे समारोह में तीन बड़े राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में गुजरात ने यह उपलब्धि हासिल की है।
किस अस्पताल को कौन-सा पुरस्कार मिला
अहमदाबाद स्थित IKDRC (इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिज़ीज़ेज़ एंड रिसर्च सेंटर) को 'ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन में लीडिंग गवर्नमेंट हॉस्पिटल में एक्सीलेंस' पुरस्कार दिया गया। अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल को दानकर्ताओं से सफल अंग-निकासी के लिए 'बेस्ट नॉन-ट्रांसप्लांट ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर (NTORC)' पुरस्कार मिला। सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल को ब्रेन स्टेम डेथ की समय पर पहचान, परिजनों की संवेदनशील काउंसलिंग और वैज्ञानिक प्रक्रिया के लिए 'बेस्ट ब्रेन स्टेम डेथ टीम' राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया।
IKDRC का प्रदर्शन: आँकड़े जो बोलते हैं
स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने बताया कि वर्ष 2025 में IKDRC-अहमदाबाद में कुल 597 अंग प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक संपन्न हुए — जिनमें 502 किडनी, 86 लिवर और 9 पैंक्रियास प्रत्यारोपण शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें से 380 मरीज़ों को पीएम-जेवाई (PM-JAY) योजना के अंतर्गत निःशुल्क प्रत्यारोपण का लाभ मिला। यहाँ उपचार लेने वाले 34 प्रतिशत मरीज़ अन्य राज्यों से आते हैं, जो संस्था की राष्ट्रीय विश्वसनीयता को रेखांकित करता है।
अहमदाबाद और सूरत के अस्पतालों की उपलब्धियाँ
अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल ने वर्ष 2025-26 के दौरान 104 ब्रेन स्टेम डेथ मामलों में से 48 मृतक दानकर्ताओं से 171 जीवनदायी अंग और 34 ऊतक (टिशू) सफलतापूर्वक निकाले, जिनसे अनेक मरीज़ों को नया जीवन मिला। वहीं, न्यू सिविल हॉस्पिटल, सूरत की टीम ने इसी अवधि में 82 ब्रेन स्टेम डेथ मामलों को सफलतापूर्वक प्रमाणित कर अंगदान प्रक्रिया को अधिक त्वरित और प्रभावी बनाया।
मंत्री पानशेरिया की अपील और संवेदना
स्वास्थ्य मंत्री पानशेरिया ने उन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सम्मान व्यक्त किया, जिन्होंने अपनों को खोने के बाद भी अंगदान का साहसिक निर्णय लिया। उन्होंने कहा, 'मृत्यु के बाद शरीर को किसी और को जीवन देने के लिए समर्पित करना सबसे श्रेष्ठ दान है।' उन्होंने राज्य के सभी नागरिकों और अस्पतालों से अंगदान के प्रति जागरूक होने और इसमें भागीदारी करने की विनम्र अपील की, ताकि ब्रेन डेड व्यक्ति का कोई भी अंग व्यर्थ न जाए।
गुजरात: देश का रोल मॉडल
पानशेरिया ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, SOTTO गुजरात (स्टेट ऑर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइज़ेशन) और सरकारी अस्पतालों के बीच सुदृढ़ समन्वय, उन्नत तकनीक और चिकित्सकों की निष्ठा के बल पर गुजरात अंगदान के क्षेत्र में देश का 'रोल मॉडल' बनकर उभरा है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में अंगदान की दर अभी भी वैश्विक औसत से काफी नीचे है, और इस दिशा में राज्य-स्तरीय नेतृत्व की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।